लखनऊ (उत्तर प्रदेश): राजधानी लखनऊ स्थित प्रदेश के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के एमबीबीएस (MBBS) इंटर्न डॉक्टरों ने मासिक स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और सरकार ने उनकी जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तीव्र करेंगे। छात्रों का कहना है कि एमबीबीएस पूरा करने के बाद इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पताल की दैनिक स्वास्थ्य सेवाओं में रीढ़ की तरह काम करते हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला मेहनताना अत्यंत कम है।
💰 ₹12,000 बनाम ₹30,000: अन्य राज्यों की तुलना में यूपी में बेहद कम मानदेय
स्टाइपेंड का तुलनात्मक विवरण और छात्रों की मांगें:
वर्तमान में मानदेय: KGMU में एमबीबीएस इंटर्न्स को वर्तमान में केवल ₹12,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में नाकाफी है।
प्रमुख मांग: इंटर्न डॉक्टरों की मांग है कि उनका मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर न्यूनतम ₹30,000 प्रति माह किया जाए।
दूसरे राज्यों से तुलना: छात्रों का तर्क है कि देश के कई अन्य राज्यों में एमबीबीएस इंटर्न्स को ₹30,000 से ₹35,000 तक मासिक भत्ता दिया जाता है; ऐसे में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इतनी कम राशि मिलना इंटर्न डॉक्टरों के साथ अन्याय है।
आंदोलन की रूपरेखा और छात्रों का पक्ष:⚠️ अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी, काम और जिम्मेदारी के अनुरूप मानदेय की मांग
उचित पारिश्रमिक का मुद्दा: प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि यह केवल स्टाइपेंड वृद्धि का मामला नहीं है, बल्कि इंटर्न डॉक्टरों के कठिन श्रम, आपातकालीन ड्यूटी और जिम्मेदारियों के अनुरूप सम्मानजनक पारिश्रमिक सुनिश्चित करने का सवाल है।
अनिश्चितकालीन प्रदर्शन का अल्टीमेटम: छात्रों ने दो टूक कहा है कि जब तक शासन स्तर पर लिखित आश्वासन और आदेश जारी नहीं होते, तब तक मुख्य गेट पर उनका शांतिपूर्ण धरना और भूख हड़ताल जारी रहेगी।
प्रशासनिक सतर्कता और सुरक्षा प्रबंध:👮 KGMU गेट पर भारी पुलिस बल तैनात, मरीजों की सुविधा बनाए रखने के प्रयास
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी: इंटर्न्स के प्रदर्शन और भूख हड़ताल को देखते हुए KGMU के मुख्य गेट और परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
प्रशासन की निगरानी: पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर उपस्थित होकर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सुचारू आवागमन: प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि विरोध प्रदर्शन के कारण ओपीडी (OPD) और इमरजेंसी में आने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
संस्थान और मरीजों पर पड़ने वाला संभावित असर:🏥 आंदोलन लंबा खिंचने पर चरमरा सकती हैं अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं
प्रमुख चिकित्सा केंद्र: KGMU उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा और प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, जहां प्रतिदिन राज्य भर और पड़ोसी राज्यों से हजारों गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।
सेवाएं प्रभावित होने की आशंका: अस्पताल के वार्डों, इमरजेंसी और प्राथमिक जांच से जुड़ी कई आवश्यक व्यवस्थाएं इंटर्न डॉक्टरों के सहयोग से चलती हैं; ऐसे में यदि यह हड़ताल लंबी खिंचती है, तो अस्पताल की नियमित चिकित्सा सेवाओं पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।
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