छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश): सड़कों पर ‘भौकाल’ जमाने के लिए गाड़ियों की छत पर नियम विरुद्ध हूटर या लाल-नीली बत्तियां लगाने वालों और नंबर प्लेट पर रोब झाड़ने के लिए पदनाम, जाति या स्लोगन लिखवाने वालों की अब खैर नहीं होगी।
छिंदवाड़ा यातायात पुलिस 1 अगस्त से 15 अगस्त तक 15 दिवसीय विशेष अभियान चला रही है। इस दौरान उन वाहन चालकों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी जो वाहनों की नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करते हैं, गाड़ियों में काली फिल्म (Dark Film) लगाकर घूमते हैं या फिर बिना अनुमति के हूटर और फ्लैशर लाइट का इस्तेमाल करते हैं।
🚔 नंबर प्लेट से छेड़छाड़ और अनधिकृत हूटर लगाने वालों पर कटेगा ₹5000 तक का चालान
छिंदवाड़ा यातायात डीएसपी रामेश्वर प्रसाद चौबे ने जानकारी देते हुए बताया कि, “1 अगस्त से 15 अगस्त तक यातायात विभाग द्वारा शहर और जिला स्तर पर विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहन चालकों को चिह्नित किया जाएगा, जो अपनी कार या दोपहिया वाहनों की नंबर प्लेट से छेड़छाड़ कर उस पर कुछ भी लिखवा लेते हैं अथवा पदनाम की तख्ती लगा लेते हैं। इसके साथ ही निजी वाहनों में नियम विरुद्ध हूटर और फ्लैशर लाइट लगाकर चलने वालों पर भी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
🚘 भोपाल में छिंदवाड़ा महापौर की कार पर हुआ था एक्शन, कटा था ₹3000 का चालान
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व छिंदवाड़ा नगर पालिक निगम के महापौर विक्रम आहके अपने वाहन से भोपाल गए हुए थे।
भोपाल के एमपी नगर इलाके में पुलिस चेकिंग के दौरान महापौर की कार में लगी ‘महापौर’ की तख्ती और हूटर को निकलवाकर ₹3000 की चालानी कार्रवाई की गई थी। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद से महापौर ने अपने वाहन में कोई भी नेम प्लेट नहीं लगाई है। लेकिन इसके बावजूद छिंदवाड़ा जिले में कई राजनीतिक दलों के नेता व प्रभावशाली लोग अपनी गाड़ियों में अवैध रूप से हूटर और पदनाम की पट्टियां लगाकर घूम रहे हैं, जिन पर अब पुलिस की पैनी नजर है।
🚨 जानिए भारत में कौन-कौन से वाहन लगा सकते हैं हूटर और फ्लैश लाइट?
यातायात विभाग के डीएसपी रामेश्वर प्रसाद चौबे ने मोटर वाहन कानून की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि भारत के मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत केवल अति-आवश्यक और अधिकृत आपातकालीन सरकारी वाहनों को ही हूटर व फ्लैशर लाइट (बत्ती) लगाने की अनुमति है।
आम नागरिकों, नेताओं या मंत्रियों को भी अपने निजी वाहनों पर इसका उपयोग करना पूरी तरह से गैरकानूनी है। केवल निम्नलिखित आपातकालीन वाहनों को ही इसकी अनुमति प्राप्त है:
पुलिस वाहन: कानून व्यवस्था बनाए रखने और गश्त (Patrolling) के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियां।
एम्बुलेंस: गंभीर मरीजों की जान बचाने और समय पर अस्पताल पहुंचाने हेतु।
फायर ब्रिगेड: आगजनी की घटनाओं में राहत व बचाव के लिए दमकल गाड़ियां।
आपदा प्रबंधन: आपातकालीन स्थिति या दैवीय आपदा में राहत कार्य से जुड़े अधिकृत वाहन।
न्यायिक दंडाधिकारी: न्यायिक दंडाधिकारी स्तर के अधिकारियों को भी निर्धारित नियमों के तहत अनुमति है।
केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के नियम 50 के अनुसार, किसी भी वाहन की नंबर प्लेट पर पदनाम, नाम, जाति, धर्म, राजनीतिक दल या कोई भी स्लोगन लिखना पूरी तरह से गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है।⚖️ नंबर प्लेट से छेड़छाड़ करने पर ₹500 से ₹5000 तक जुर्माना, बार-बार उल्लंघन पर गाड़ी होगी जप्त
नंबर प्लेट पर केवल आधिकारिक तौर पर आवंटित पंजीकरण संख्या (Registration Number) ही स्पष्ट अक्षरों में लिखी होनी चाहिए। प्रायः देखा जाता है कि लोग रोब झाड़ने के लिए नंबर प्लेट पर पदनाम या विभिन्न स्लोगन लिखवा लेते हैं। यातायात पुलिस के अनुसार, इस उल्लंघन पर ₹500 से लेकर ₹5000 तक का चालान काटा जाएगा। यदि कोई वाहन चालक बार-बार नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो संबंधित वाहन को जप्त (Seize) भी किया जा सकता है।
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