खंडवा/किल्लौद। क्षेत्र के कई गांवों में फ्लोराइड युक्त पानी पीना लोगों की मजबूरी बन गया है। जिला प्रशासन की टालमटोल वाली नीति के कारण इस गंभीर समस्या पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। स्थिति इतनी विकट है कि कई गांवों में स्कूली बच्चों को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) द्वारा खतरनाक चिन्हित किए गए जल स्रोतों से ही पानी पीना पड़ रहा है।
बुधवार को ग्राम जूनापानी के शासकीय स्कूल में एक डरावनी तस्वीर सामने आई, जहाँ छात्राएं पीएचई विभाग द्वारा ‘लाल निशान’ लगाए गए हैंडपंप से पानी पीते हुए मिलीं। यहाँ 104 बच्चे अध्ययनरत हैं और वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण सभी प्रतिदिन इसी जहरीले पानी का उपयोग कर रहे हैं।
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मजबूरी का नाम फ्लोराइड: जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने अपने दौरे के दौरान जब स्कूल प्रभारी और छात्राओं से प्रतिबंधित हैंडपंप के उपयोग पर सवाल किया, तो जवाब मिला कि पेयजल के लिए अन्य कोई स्रोत उपलब्ध नहीं है। स्कूल प्रभारी इंदिरा सकवाल ने बताया कि इस हैंडपंप का पानी पीने से बच्चों की हड्डियों में दर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं।
प्रशासन के निर्देश कागजों तक सीमित: कलेक्टर ऋषव गुप्ता के निर्देशों के बावजूद धरातल पर वैकल्पिक जल स्रोतों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। एक ओर प्रशासन गांव-गांव शिविर लगाकर स्वास्थ्य परीक्षण का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ‘लाल निशान’ वाले हैंडपंपों को अब तक न तो बंद किया गया और न ही ग्रामीणों को शुद्ध पानी मुहैया कराया गया।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने किया आधा दर्जन गांवों का भ्रमण: गुरुवार को कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तमपाल सिंह ने जूनापानी, पाटाखाली, बिल्लौद, कुंडिया, बरमलांय, गरबड़ी और धनवानी का भ्रमण कर पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने पाया कि अधिकांश स्रोतों को पीएचई विभाग ने फ्लोराइड युक्त घोषित कर रखा है, फिर भी ग्रामीण यही पानी पीने को मजबूर हैं। उत्तमपाल सिंह ने जनपद पंचायत सीईओ जितेंद्र सिंह ठाकुर और पीएचई अधिकारियों से चर्चा कर तत्काल फ्लोराइड मुक्त पानी उपलब्ध कराने की मांग की।
जिला कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता प्रेमांशु जैन ने बताया कि भ्रमण के दौरान श्याम राठौर, रविंद्र विश्नोई, लक्ष्मीनारायण पवार, ब्लॉक अध्यक्ष आनंद सिंह कलम, शेर सिंह तोमर, राहुल राजपूत, संदीप राजपूत, जितेंद्र देवड़ा और प्रदीप धनवानी सहित कई ग्रामीण उपस्थित थे।



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