ओरछा (मध्य प्रदेश): संगठन को सशक्त बनाने और आपसी गिले-शिकवे दूर करने के उद्देश्य से ओरछा में आयोजित मध्य प्रदेश भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के प्रमुख क्षत्रपों के बीच की असहजता खुलकर सामने आई।
बैठक के दौरान कई अवसरों पर बड़े नेताओं के बीच संवाद होना तो दूर, सार्वजनिक मंचों पर नजरें तक मिलती नहीं दिखीं। संगठन को एकजुटता का संदेश देने वाले मंच पर बड़े नेताओं का यह अलग-थलग अंदाज दिनभर राजनीतिक गलियारों और कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
🍽️ पहले सत्र और लंच टेबल पर दूरी: अलग-अलग समय पर पहुंचे दिग्गज
बैठक के शुरुआती सत्र और लंच का घटनाक्रम:
पहुंचने का समय: पूर्वाह्न 9:00 बजे से प्रारंभ हुई कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगभग 11:30 बजे पहुंचे। इसके बाद केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे।
सत्र में अलग बैठक व्यवस्था: उद्घाटन व प्रथम सत्र के दौरान तीनों ही प्रमुख नेता अलग-अलग स्थानों पर बैठे नजर आए।
लंच टेबल पर भी नहीं दिखे साथ: दोपहर के भोजन के समय भी तीनों दिग्गज एक साथ बैठकर लंच करते नहीं दिखाई दिए, जिससे दूरियों की चर्चा को और बल मिला।
लंच के बाद का माहौल और मेल-मुलाकात:📸 भोजन कक्ष में फोटो सेशन और कार्यकर्ताओं का मजमा
CM मोहन यादव का जमावड़ा: उद्घाटन सत्र के समापन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के साथ भोजन कक्ष में पहुंचे। भोजन के बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ फोटो सेशन कराया।
शिवराज सिंह चौहान की एंट्री: मुख्यमंत्री जब फोटो सेशन समाप्त कर वापस अपने कक्ष की ओर जाने लगे, ठीक उसी समय केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान टहलते हुए भोजन कक्ष में पहुंचे।
कमरे के भीतर की टाइमिंग और बॉडी लैंग्वेज:⏳ एक-दूसरे के निकलने की प्रतीक्षा करते रहे नेता: सियासी गलियारों में चर्चा तेज
कार्यकर्ताओं से घिरे रहे शिवराज: जहां कुछ क्षण पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इर्द-गिर्द कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी थी, वहां मुख्यमंत्री के निकलते ही शिवराज सिंह चौहान कार्यकर्ताओं से घिर गए।
सिंधिया का आगमन: शिवराज सिंह चौहान के प्रस्थान करने के कुछ समय बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह के साथ वहां पहुंचे और कार्यकर्ताओं से औपचारिक मेल-मुलाकात कर रवाना हुए।
सामने आने से बचते दिखे नेता: तीनों बड़े नेता एक ही परिसर और कक्ष में मौजूद रहे, परंतु एक साथ चलने या बैठने के बजाय एक-दूसरे के वहां से निकलने की प्रतीक्षा करते नजर आए।
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