बिलासपुर। सरकंडा मुक्तिधाम में शहर का पहला एलपीजी आधारित शवदाह गृह निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शुक्रवार को महापौर रामशरण यादव ने भूमिपूजन कर इसकी शुरुआत की। शवदाहगृह बनने के बाद एलपीजी गैस के माध्यम से अंतिम संस्कार की सुविधा मिलने लगेगी। कोरोना की दूसरी लहर जब अपने चरम पर रही, उस दौरान रोजाना जिले में 60 से 70 मरीजों की मौत हो रही थी।
ऐसे में मुक्तिधाम में उनकी अंत्येष्टि के लिए जगह तक कम पड़ रही थी। इस समस्या को देखते हुए महापौर रामशरण यादव ने इलेक्ट्रिक व एलपीजी आधारित शवदाह गृह निर्माण की प्रक्रिया शुरू की। इसी के तहत एसईसीएल से भी मदद मांगी। तब एसईसीएल ने अपने सीएसआर मद से एलपीजी आधारित शवदाह गृह निर्माण के लिए 47 लाख रुपये स्वीकृत किए। वहीं शुक्रवार महापौर रामशरण यादव और सभापति शेख नजीरुद्दीन ने मुक्तिधाम सरकंडा में इसके निर्माण कार्य का पूजन कर काम शुरू करवाया।
अब जल्द ही मुक्तिधाम में इसके माध्यम से अंतिम संस्कार होने लगेगा। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के चेयरमैन अजय यादव, स्वास्थ्य विभाग के चेयरमैन राजेश शुक्ला, पार्षद साई भास्कर, मुख्य अभियंता सुधीर गुप्ता, कार्यपालन अभियंता सुब्रत कर, उप अभियंता भूषण पैकरा के साथ अर्जन सिंह, भरत जुरयानी व निगम कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
मधुबन व भारतीय नगर मुक्तिधाम में जल्द होगा निर्माण
महापौर ने बताया कि एसईसीएल से मिले 47 लाख रुपये से भारतीय नगर मुक्तिधाम और दयालबंद स्थित मधुबन में भी एलपीजी आधारित शवदाह गृह बनेगा। इसका निर्माण कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा। इसके बाद शहर के तीन प्रमुख मुक्तिधामों में एलपीजी आधारित शवदाह गृह की सुविधा मिलने लगेगी।
इनके आएगा काम
शवदाह गृह बनने के बाद लावारिश शव के साथ ऐसे गरीब वर्ग जो अंतिम संस्कार का खर्च नहीं उठा सकते हैं, उनका अंतिम संस्कार इसके माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावा विपदा आने और एक साथ कई मौत होने की दशा पर भी इनका उपयोग किया जाएगा। इस शवदाह गृह में चंद मिनट में ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
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