रायपुर। दीपावली के दूसरे दिन हिन्दू संवत्सर के कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गोवर्धन पूजा उत्साह से मनाया जा रहा है। महिलाओं ने गोमाता के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजा की और परिक्रमा करने की परंपरा निभाई। पूजा का यह दौर दिनभर चलेगा।
यादव समाज ने लगाया गोबर का तिलक
यादव समाज के लोगों ने अपने इष्टदेव भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करके गोमाता को पूजा। गोमाता के पैर पर तिलक लगाकर गोबर से अपने माथे पर तिलक किया। खिचड़ी का भोग अर्पित किया।
यादव युवक महासभा के प्रमुख माधवलाल यादव ने बताया कि यादव समाज की पालनहार गो माता के महत्व को प्रतिपादित करने गोवर्धन पूजा उत्सव मनाया जाता है। टिकरापारा में रात को भव्य उत्सव मनाया जाएगा। इसे मातर जगाना कहा जाता है। पूजा करके यादव बंधु शस्त्र चालन, अखाड़ा प्रदर्शन करेंगे। रात भर नृत्य करेंगे।
गोमाता के ‘खुर’ यानी पैर को धोकर आरती उतार नए धान, कुम्हड़ा, कोचई, दही के मिश्रण से बनाए गए व्यंजन का भोग लगाएंगे। इस भोग को नया भोज अर्थात नेवज कहा जाता है। इसके बाद 15 दिनों तक घर घर जाकर गोमाता के गले में मयूर पंख से सजी सोहई बांधने की परंपरा निभाई जाएगी।
जैतूसाव मठ में पूजा
पुरानी बस्ती इलाके के जैतू साव मठ में महंत रामसुंदर दास ने गोमाता की पूजा-अर्चना कर गुड़-रोटी खिलाई। दोपहर को भगवान को छप्पन भोग अर्पित कर अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया जाएगा।
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