भुवनेश्वर/हैदराबाद: चिटफंड और रीयल एस्टेट के नाम पर देश के विभिन्न राज्यों के हजारों निवेशकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है।
ईडी की भुवनेश्वर जोनल ऑफिस की विशेष जांच टीम ने विशाखापट्टनम और हैदराबाद स्थित 5 प्रमुख परिसरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह दविश वेलफेयर बिल्डिंग्स एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड (WBEPL), कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर मल्ला विजया प्रसाद, निदेशक वराह रामकृष्ण सत्य श्रीनिवास राव अला तथा उनसे जुड़े अन्य प्रमुख सहयोगियों के परिसरों पर दी गई।
💵 ₹1.01 करोड़ की नकदी बरामद, 182 बैंक खाते फ्रीज और 6 लग्जरी गाड़ियां जब्त
छापेमारी की इस कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने ₹1.01 करोड़ की बेनामी नकदी जब्त की है।
इसके अतिरिक्त, अचल संपत्तियों के महत्वपूर्ण दस्तावेज, विभिन्न डिजिटल डिवाइसेज, सर्वर डेटा और वित्तीय हेरफेर से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं। वित्तीय धांधली पर शिकंजा कसते हुए जांच एजेंसी ने कंपनी और उसके निदेशकों से जुड़े 182 बैंक खातों को फ्रीज करने के आधिकारिक आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही, अवैध रूप से अर्जित धन से खरीदी गई 6 महंगी लग्जरी गाड़ियों पर भी जब्ती की कार्रवाई की गई है।
🏗️ रियल एस्टेट की आड़ में जुटाए ₹2,000 करोड़, पोंजी स्कीम की तर्ज पर चलाया कारोबार
ईडी की अब तक की जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी के निदेशकों ने रियल एस्टेट कारोबार का भ्रमजाल फैलाकर आम जनता से भारी-भरकम राशि जमा कराई।
आरोप है कि कंपनी ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) व सेबी (SEBI) के नियमों को ताक पर रखकर ₹2,000 करोड़ से अधिक की रकम जुटाई। कंपनी पोंजी स्कीम की तर्ज पर पुराने निवेशकों को रिटर्न देने के लिए नए निवेशकों से राशि एकत्र करती रही। इस पूरी जमा पूंजी का उपयोग कंपनी के निदेशकों द्वारा निजी वित्तीय लाभों और अन्य अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियों में किया गया।
📉 वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर और फर्जी जमीनी सौदे, धोखे से बंद कर दीं शाखाएं
जांच में कंपनी के बही-खातों और वित्तीय रिकॉर्ड्स में बड़े पैमाने पर हेराफेरी तथा भूमि सौदों में वास्तविक बाजार मूल्य छिपाने जैसी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं।
कंपनी ने देश के कई राज्यों में अपनी शाखाएं खोलकर निवेशकों को विशाखापट्टनम में मूल्यवान भूमि आबंटित करने का लुभावना आश्वासन दिया था। हालांकि, भारी फंड जुटाने के पश्चात कंपनी ने धीरे-धीरे अपनी क्षेत्रीय शाखाएं बंद कर दीं और निवेशकों का मूलधन तथा लाभांश लौटाने से पूरी तरह मुकर गई।
🌐 ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश समेत 5 राज्यों के लोग बने शिकार, CBI व SFIO की जांच के बाद ED का शिकंजा
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, इस विशाल फर्जीवाड़े का शिकार ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और आंध्र प्रदेश के हजारों निर्दोष ग्रामीण व मध्यमवर्गीय निवेशक बने हैं।
ईडी की यह समानांतर जांच भुवनेश्वर की आर्थिक अपराध शाखा (EOB), सीबीआई (CBI) धनबाद, ओडिशा पुलिस और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) द्वारा पूर्व में दर्ज की गई बहुस्तरीय एफआईआर (FIR) और चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई थी। ईडी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच गहनता से जारी है, और आने वाले दिनों में कुछ अन्य बेनामी संपत्तियों की कुर्की की जा सकती है।
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