नई दिल्ली: दिल्ली तमिल एडवोकेट्स एसोसिएशन ने नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद लापता हुए मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस वी. शिवज्ञानम की सुरक्षित खोजबीन और स्वदेश वापसी को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को पत्र प्रेषित किया है।
एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश से व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए अनुरोध किया है कि इस अतिसंवेदनशील मामले को केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और संबंधित आपदा राहत एजेंसियों के संज्ञान में लाकर पूर्व जज का शीघ्र पता लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
एसोसिएशन के अनुसार जस्टिस वी. शिवज्ञानम (सेवानिवृत्त) का भारतीय न्यायपालिका में लगभग 34 वर्षों का सुदीर्घ एवं प्रतिष्ठित कार्यकाल रहा है। मद्रास हाईकोर्ट से सेवानिवृत्ति के पश्चात, सुप्रीम कोर्ट द्वारा उन्हें 23 जुलाई 2025 से वरिष्ठ अधिवक्ता (सीनियर एडवोकेट) के रूप में नामित किया गया था। पत्र में उल्लेख किया गया है कि जस्टिस शिवज्ञानम तमिलनाडु के तीर्थयात्रियों के एक समूह के साथ नेपाल भ्रमण पर गए थे, जिसकी यात्रा बस में ली गई सामूहिक तस्वीर भी सामने आई है।
📱 26 अगस्त को पत्नी से व्हाट्सएप कॉल पर हुई थी आखिरी बातचीत: फिर टूटा संपर्क
लापता होने का घटनाक्रम और प्रत्यक्षदर्शियों का विवरण:
आखिरी बातचीत: प्राप्त जानकारी के अनुसार जस्टिस शिवज्ञानम ने 26 अगस्त की सुबह अपनी धर्मपत्नी से व्हाट्सएप वीडियो/वॉइस कॉल के जरिए अंतिम बार बात की थी, जिसके बाद से उनका फोन बंद आ रहा है और कोई संपर्क नहीं हो सका।
तिमुरे में रेस्क्यू हुए यात्रियों का बयान: नेपाल के तिमुरे स्थित एपीएफ (APF) नेपाल बॉर्डर आउटपोस्ट के पास सुरक्षित बचाए गए एक अन्य बस के यात्रियों ने परिवार को बताया कि जस्टिस शिवज्ञानम जिस बस में सवार थे, वह उनकी बस से महज 100 से 200 मीटर की दूरी पर चल रही थी।
चिंता में डूबा परिवार: कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई स्पष्ट सुराग न मिलने के कारण पूर्व जज के परिजन और कानूनी बिरादरी उनकी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं।
राहत-बचाव अभियान और कानूनी बिरादरी की गुहार:🚨 केंद्र सरकार और राजनयिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई की मांग
राजनयिक दखल की जरूरत: दिल्ली तमिल एडवोकेट्स एसोसिएशन ने CJI से पुरजोर अपील की है कि वे भारत सरकार और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के शीर्ष अधिकारियों के साथ इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाएं।
सघन तलाशी अभियान: एसोसिएशन ने मांग की है कि भूस्खलन और मलबे से प्रभावित तिमुरे व रसुवागढ़ी मार्ग पर आधुनिक तकनीक और हेलिकॉप्टर के माध्यम से विशेष सर्च ऑपरेशन चलाकर उनकी वर्तमान स्थिति सुनिश्चित की जाए।
एसोसिएशन की पहल और न्यायिक संरक्षण:🏛️ वरिष्ठ न्यायविदों के मार्गदर्शन में CJI से हस्तक्षेप की उम्मीद
वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मार्गदर्शन: यह औपचारिक अपील एसोसिएशन के संरक्षक-अध्यक्ष व मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस. नागामुथु (सीनियर एडवोकेट) तथा सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड पी.वी. योगेश्वरन के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में तैयार कर भेजी गई है।
संवेदनशील दखल की आशा: एसोसिएशन ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है कि देश के मुख्य न्यायाधीश इस मानवीय व गंभीर संकट को देखते हुए अत्यंत संवेदनशीलता के साथ मामले में हस्तक्षेप करेंगे और केंद्र सरकार को आवश्यक निर्देश देंगे।
यह खबर आपको कैसी लगी?


देश




























