खूंटीः जिले के सुदूर ग्रामीण इलाकों में पुलिस पदाधिकारियों की पहल इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. आमतौर पर अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था संभालने वाली खाकी वर्दी यहां बच्चों के भविष्य को संवारने का काम कर रही है. ग्रामीण बच्चों को शिक्षा और सामाजिक जागरुकता का पाठ पढ़ाया जा रहा है.
“जागरुकता से मजबूत होगा समाज”
मारंगहादा में पदस्थापित एएसआई रमजानुल हक खाली समय में क्षेत्र के अलग-अलग स्कूलों में नियमित रुप से पहुंचते हैं और स्कूली बच्चों को सामाजिक बुराइयों से बचने के तरीके बताते हैं. खासकर मानव तस्करी, बाल विवाह और गलत संगत के खतरे को लेकर वे बच्चों और किशोरियों को जागरूक कर रहे हैं. रमजानुल हक अपने अनुभव के आधार पर बच्चों को समझाते हैं कि किस तरह तस्कर गरीब और मासूम बच्चों को झूठे प्रलोभन देकर अपनी जाल में फंसाते हैं. वहीं कम उम्र में शादी के दुष्परिणामों के बारे में भी विस्तार से जानकारी देते हैं.
“बच्चों को गलत रास्तों से दूर रखना जरूरी” रमजानुल हक का कहना है कि यह इलाका पहले नक्सलवाद और बाद में अफीम की खेती जैसी समस्याओं से प्रभावित रहा है. ऐसे माहौल में बच्चों को भटकाव से रोकना बेहद जरूरी है. उनका मानना है कि शिक्षा और जागरुकता ही बच्चों को गलत रास्तों से दूर रख सकता है. खूंटी एसपी ने बताई जागरुकता अभियान की वजह खूंटी के एसपी ऋषभ गर्ग ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि पुलिस को जनता के साथ संवाद करना चाहिए, ताकि लोग बिना किसी डर के अपनी परेशानी बता सकें. इसी आधार पर खूंटी पुलिस ने यह पहल शुरु की है. सभी थानों के पदाधिकारी समय निकालकर अपने क्षेत्र के स्कूलों में जाते हैं और खासकर 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं से मिलकर नशा के कुप्रभाव, ट्रैफिक के नियम, पॉक्सो से संबंधित मामलों से अवगत कराते हैं. उन्होंने बताया कि आने वाले समय में स्कूली बच्चों को प्रतियोगिता परीक्षाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी, ताकि वे भविष्य से जुड़ा सही विकल्प चुन पाएं. स्थानीय निवासियों ने की पहल की सराहना मारंगहादा निवासी और एबीवीपी के प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने खूंटी पुलिस की इस पहल की सराहना की है. खाकी वर्दी में जब एक पुलिस पदाधिकारी स्कूल की क्लास में बच्चों के बीच पहुंचता है, तो बच्चों के मन से पुलिस का डर भी कम होता है. इस पहल से बच्चों में एक सजग नागरिक बनने की ललक पैदा होगी.बता दें कि खूंटी का नाम झारखंड के पिछड़े जिलों में शुमार है. आदिवासी बहुल यह जिला लंबे समय तक नक्सलवाद का दंश झेलता रहा है. बाद के वर्षों में तस्करों ने इसको अफीम की खेती का गढ़ बना लिया. यहां से व्यापक स्तर पर रोजगार के लिए पलायन के साथ-साथ मानव तस्करी भी होती रही है. इन दुश्वारियों के बीच खूंटी पुलिस की स्कूली बच्चों के साथ संवाद वाली पहल की चौतरफा तारीफ हो रही है.यह खबर आपको कैसी लगी?


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