ग्वालियर: बदलती जीवनशैली, मानसिक तनाव और खान-पान में लापरवाही के कारण ग्वालियर जिला उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के एक बड़े जाल में फंसता जा रहा है। जिले में अब तक हुई स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग) में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिसके तहत नौ लाख 37 हजार 677 लोगों की जांच में से एक लाख 42 हजार 891 लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित पाए गए हैं। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि इनमें से एक लाख 42 हजार 721 मरीज वर्तमान में विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर अपना नियमित उपचार करा रहे हैं। उच्च रक्तचाप के कुल मामलों में सबसे डरावनी स्थिति ग्वालियर शहरी क्षेत्र की है। यहां की कुल जांच का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस बीमारी की चपेट में आ चुका है। आंकड़े साफ बताते हैं कि शहरी भाग में रहने वाले लोगों में उच्च रक्तचाप की दर ग्रामीण इलाकों की तुलना में बेहद ज्यादा है। वहीं उच्च रक्तचाप को लेकर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-पांच (NFHS-5) की रिपोर्ट देश सहित ग्वालियर के युवाओं के लिए भी एक बड़ी खतरे की घंटी है। यह आंकड़े साबित करते हैं कि युवाओं में हृदय रोग (हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट) का जोखिम बहुत कम उम्र में ही विकसित हो रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, देश और राज्य में उच्च रक्तचाप की आयुवार स्थिति इस प्रकार है: युवाओं पर वार: देश में 40 वर्ष से कम उम्र के लगभग 11 से 14 प्रतिशत युवा इस समय उच्च रक्तचाप से सीधे तौर पर प्रभावित हैं।
15-29 वर्ष आयु वर्ग: इस बेहद कम उम्र के वर्ग में भी लगभग 9.7 प्रतिशत युवाओं में उच्च रक्तचाप की पुष्टि हो चुकी है।
‘प्री-हाइपरटेंशन’ का खतरा: यह वह स्थिति है जहां व्यक्ति पूरी तरह बीमार तो नहीं होता, लेकिन बीमारी की दहलीज पर खड़ा होता है। युवाओं में प्री-हाइपरटेंशन 44.5 प्रतिशत और युवतियों में 26.9 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है।
वयस्कों की स्थिति: भारत में कुल वयस्क पुरुषों में लगभग 24 प्रतिशत और महिलाओं में लगभग 21.3 प्रतिशत उच्च रक्तचाप पाया गया है।
“उच्च रक्तचाप को ‘साइलेंट किलर’ (Silent Killer) कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआत में आसानी से दिखाई नहीं देते और यह अंदर ही अंदर शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए 18 वर्ष की उम्र के बाद हर व्यक्ति को ब्लड प्रेशर (बीपी) की जांच जरूर करानी चाहिए। अपनी डाइट में नमक का सेवन कम करना चाहिए और नियमित रूप से 30 से 45 मिनट का व्यायाम अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। अब 20 से 40 आयु वर्ग में भी उच्च रक्तचाप के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे सतर्कता जरूरी है।” – डा. पुनीत रस्तोगी, विभागाध्यक्ष, कार्डियक सेंटर, जेएएच (JAH)।🏙️ शहरी क्षेत्र में सबसे डरावनी स्थिति: ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरों में तेजी से फैल रही बीमारी
📊 NFHS-5 रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े: युवाओं में ‘प्री-हाइपरटेंशन’ का बढ़ा गंभीर खतरा
🩺 क्या कहते हैं विशेषज्ञ?: 18 साल की उम्र के बाद बीपी की नियमित जांच और नमक का सेवन कम करना जरूरी
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ग्वालियर: बदलती जीवनशैली, मानसिक तनाव और खान-पान में लापरवाही के कारण ग्वालियर जिला उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के एक बड़े जाल में फंसता जा रहा है। जिले में अब तक हुई स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग) में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जिसके तहत नौ लाख 37 हजार 677 लोगों की जांच में से एक लाख 42 हजार 891 लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित पाए गए हैं। राहत की बात सिर्फ इतनी है कि इनमें से एक लाख 42 हजार 721 मरीज वर्तमान में विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर अपना नियमित उपचार करा रहे हैं।
🏙️ शहरी क्षेत्र में सबसे डरावनी स्थिति: ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरों में तेजी से फैल रही बीमारी
उच्च रक्तचाप के कुल मामलों में सबसे डरावनी स्थिति ग्वालियर शहरी क्षेत्र की है। यहां की कुल जांच का एक बहुत बड़ा हिस्सा इस बीमारी की चपेट में आ चुका है। आंकड़े साफ बताते हैं कि शहरी भाग में रहने वाले लोगों में उच्च रक्तचाप की दर ग्रामीण इलाकों की तुलना में बेहद ज्यादा है। वहीं उच्च रक्तचाप को लेकर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-पांच (NFHS-5) की रिपोर्ट देश सहित ग्वालियर के युवाओं के लिए भी एक बड़ी खतरे की घंटी है। यह आंकड़े साबित करते हैं कि युवाओं में हृदय रोग (हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट) का जोखिम बहुत कम उम्र में ही विकसित हो रहा है।
📊 NFHS-5 रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े: युवाओं में ‘प्री-हाइपरटेंशन’ का बढ़ा गंभीर खतरा
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार, देश और राज्य में उच्च रक्तचाप की आयुवार स्थिति इस प्रकार है:
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युवाओं पर वार: देश में 40 वर्ष से कम उम्र के लगभग 11 से 14 प्रतिशत युवा इस समय उच्च रक्तचाप से सीधे तौर पर प्रभावित हैं।
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15-29 वर्ष आयु वर्ग: इस बेहद कम उम्र के वर्ग में भी लगभग 9.7 प्रतिशत युवाओं में उच्च रक्तचाप की पुष्टि हो चुकी है।
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‘प्री-हाइपरटेंशन’ का खतरा: यह वह स्थिति है जहां व्यक्ति पूरी तरह बीमार तो नहीं होता, लेकिन बीमारी की दहलीज पर खड़ा होता है। युवाओं में प्री-हाइपरटेंशन 44.5 प्रतिशत और युवतियों में 26.9 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है।
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वयस्कों की स्थिति: भारत में कुल वयस्क पुरुषों में लगभग 24 प्रतिशत और महिलाओं में लगभग 21.3 प्रतिशत उच्च रक्तचाप पाया गया है।
🩺 क्या कहते हैं विशेषज्ञ?: 18 साल की उम्र के बाद बीपी की नियमित जांच और नमक का सेवन कम करना जरूरी
“उच्च रक्तचाप को ‘साइलेंट किलर’ (Silent Killer) कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण शुरुआत में आसानी से दिखाई नहीं देते और यह अंदर ही अंदर शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए 18 वर्ष की उम्र के बाद हर व्यक्ति को ब्लड प्रेशर (बीपी) की जांच जरूर करानी चाहिए। अपनी डाइट में नमक का सेवन कम करना चाहिए और नियमित रूप से 30 से 45 मिनट का व्यायाम अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। अब 20 से 40 आयु वर्ग में भी उच्च रक्तचाप के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे सतर्कता जरूरी है।” – डा. पुनीत रस्तोगी, विभागाध्यक्ष, कार्डियक सेंटर, जेएएच (JAH)।


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