जालंधर: पंजाब के जालंधर शहर और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों घरेलू (LPG) और कमर्शियल गैस सिलेंडरों का संकट लगातार गहराता जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की परेशानियां चरम पर पहुंच गई हैं। दरअसल, इस स्थानीय संकट के तार सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति से जुड़े हुए हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जारी भारी तनाव के चलते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) का जलमार्ग अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच किसी प्रकार का ठोस कूटनीतिक समझौता नहीं होने से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिसके चलते भारतीय घरेलू बाजार में भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। जालंधर शहर तथा आसपास के क्षेत्रों में गैस एजेंसियों पर सिलेंडरों की भारी कमी साफ देखी जा रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बुकिंग कराने के कई दिनों बाद भी उन्हें समय पर घरेलू गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की भी बाजार में भारी किल्लत बनी हुई है। इस संकट के बीच कई असामाजिक तत्वों द्वारा कथित तौर पर ऊंचे दामों पर ब्लैक (कालाबाजारी) में सिलेंडर बेचे जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिससे आम नागरिकों को जेब से अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इस अभूतपूर्व गैस संकट के कारण शहर के होटल, ढाबा और छोटे रेस्तरां कारोबारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। स्थानीय व्यापारियों का साफ कहना है कि कमर्शियल गैस की भारी कमी और बढ़ी हुई कीमतों के कारण उनका दैनिक काम-काज पूरी तरह ठप होने की कगार पर है और व्यवसाय का संचालन खर्च लगातार बढ़ रहा है। आम जनता और गृहणियों ने जिला प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा कालाबाजारी को रोकने के लिए अब तक कोई प्रभावी या दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया है, जिससे आम जनता को कोई राहत मिल सके। उपभोक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि गैस सप्लाई को जल्द से जल्द सुचारू बनाया जाए और ब्लैक मार्केटिंग करने वाले वेंडरों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, कई मध्यमवर्गीय परिवारों को घर में दो वक्त का खाना बनाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि गैस खत्म होने के बाद नया रिफिल सिलेंडर मिलने में कई-कई दिन लग रहे हैं, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में होटल या बाहर से महंगा खाना मंगवाना पड़ रहा है या फिर इंडक्शन और हीटर जैसे वैकल्पिक बिजली साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। महिलाओं ने बताया कि भीषण गर्मी के इस मौसम में गैस की इस भारी कमी ने घरेलू बजट और व्यवस्था को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। उधर, इस पूरे मामले पर अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए स्थानीय गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि उन्हें मुख्य रिफाइनरियों और बॉटलिंग प्लांट से ही पर्याप्त मात्रा में लिक्विड गैस की सप्लाई नहीं मिल पा रही है। बैकएंड से ही कोटा कम होने के चलते वे चाहकर भी उपभोक्ताओं की बढ़ती दैनिक मांग को समय पर पूरा करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों और बाजार के जानकारों के अनुसार, जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाड़ी देशों के हालात पूरी तरह सामान्य नहीं होते और वैश्विक सप्लाई व्यवस्था सुचारु नहीं होती, तब तक घरेलू स्तर पर यह गैस संकट इसी तरह जारी रह सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जालंधर के नागरिकों और विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से तुरंत इस मामले में उच्च स्तरीय हस्तक्षेप करने और वैकल्पिक माध्यमों से स्थिति को नियंत्रित करने की पुरजोर अपील की है।🍳 होटलों और छोटे कारोबारियों पर पड़ा सीधा असर: गैस की कमी से बिगड़ा रसोई का बजट, बाहर से खाना मंगाने की मजबूरी
🌐 अंतरराष्ट्रीय हालात सुधरने तक संकट रहने के आसार: गैस एजेंसी संचालकों ने जताई बेबसी, सरकारों से हस्तक्षेप की मांग
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जालंधर: पंजाब के जालंधर शहर और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों घरेलू (LPG) और कमर्शियल गैस सिलेंडरों का संकट लगातार गहराता जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की परेशानियां चरम पर पहुंच गई हैं। दरअसल, इस स्थानीय संकट के तार सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति से जुड़े हुए हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जारी भारी तनाव के चलते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) का जलमार्ग अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच किसी प्रकार का ठोस कूटनीतिक समझौता नहीं होने से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिसके चलते भारतीय घरेलू बाजार में भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। जालंधर शहर तथा आसपास के क्षेत्रों में गैस एजेंसियों पर सिलेंडरों की भारी कमी साफ देखी जा रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बुकिंग कराने के कई दिनों बाद भी उन्हें समय पर घरेलू गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की भी बाजार में भारी किल्लत बनी हुई है। इस संकट के बीच कई असामाजिक तत्वों द्वारा कथित तौर पर ऊंचे दामों पर ब्लैक (कालाबाजारी) में सिलेंडर बेचे जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, जिससे आम नागरिकों को जेब से अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
🍳 होटलों और छोटे कारोबारियों पर पड़ा सीधा असर: गैस की कमी से बिगड़ा रसोई का बजट, बाहर से खाना मंगाने की मजबूरी
इस अभूतपूर्व गैस संकट के कारण शहर के होटल, ढाबा और छोटे रेस्तरां कारोबारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। स्थानीय व्यापारियों का साफ कहना है कि कमर्शियल गैस की भारी कमी और बढ़ी हुई कीमतों के कारण उनका दैनिक काम-काज पूरी तरह ठप होने की कगार पर है और व्यवसाय का संचालन खर्च लगातार बढ़ रहा है। आम जनता और गृहणियों ने जिला प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा कालाबाजारी को रोकने के लिए अब तक कोई प्रभावी या दंडात्मक कदम नहीं उठाया गया है, जिससे आम जनता को कोई राहत मिल सके। उपभोक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि गैस सप्लाई को जल्द से जल्द सुचारू बनाया जाए और ब्लैक मार्केटिंग करने वाले वेंडरों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, कई मध्यमवर्गीय परिवारों को घर में दो वक्त का खाना बनाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि गैस खत्म होने के बाद नया रिफिल सिलेंडर मिलने में कई-कई दिन लग रहे हैं, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में होटल या बाहर से महंगा खाना मंगवाना पड़ रहा है या फिर इंडक्शन और हीटर जैसे वैकल्पिक बिजली साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। महिलाओं ने बताया कि भीषण गर्मी के इस मौसम में गैस की इस भारी कमी ने घरेलू बजट और व्यवस्था को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है।
🌐 अंतरराष्ट्रीय हालात सुधरने तक संकट रहने के आसार: गैस एजेंसी संचालकों ने जताई बेबसी, सरकारों से हस्तक्षेप की मांग
उधर, इस पूरे मामले पर अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए स्थानीय गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि उन्हें मुख्य रिफाइनरियों और बॉटलिंग प्लांट से ही पर्याप्त मात्रा में लिक्विड गैस की सप्लाई नहीं मिल पा रही है। बैकएंड से ही कोटा कम होने के चलते वे चाहकर भी उपभोक्ताओं की बढ़ती दैनिक मांग को समय पर पूरा करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों और बाजार के जानकारों के अनुसार, जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाड़ी देशों के हालात पूरी तरह सामान्य नहीं होते और वैश्विक सप्लाई व्यवस्था सुचारु नहीं होती, तब तक घरेलू स्तर पर यह गैस संकट इसी तरह जारी रह सकता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जालंधर के नागरिकों और विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से तुरंत इस मामले में उच्च स्तरीय हस्तक्षेप करने और वैकल्पिक माध्यमों से स्थिति को नियंत्रित करने की पुरजोर अपील की है।


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