रामपुर: समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दोहरे पैन कार्ड (PAN Card) से जुड़े एक गंभीर धोखाधड़ी के मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। रामपुर की विशेष MP-MLA सेशन कोर्ट ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों दोषियों की जेल की सजा को बढ़ाते हुए अब 10 साल के कठोर कारावास में तब्दील कर दिया है। इससे पहले नवंबर 2025 में निचली विशेष MP-MLA कोर्ट ने इस जालसाजी के लिए दोनों को 7-7 साल की जेल और 50-50 हजार रुपये के आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई थी। यह पूरा विवाद आधिकारिक दस्तावेजों में अलग-अलग जन्मतिथि (Date of Birth) दिखाकर दो अलग-अलग पैन कार्ड अवैध रूप से बनवाने और उनका इस्तेमाल करने से संबंधित था।
निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ जहां एक ओर आजम खान और अब्दुल्ला आज़म ने अपनी सजा माफी के लिए अपील दायर की थी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने इस धोखाधड़ी को गंभीर श्रेणी का बताते हुए दोषियों की सजा को और अधिक बढ़ाने की मांग को लेकर सेशन कोर्ट में एक जवाबी याचिका दायर की थी, जिस पर शनिवार को अंतिम फैसला आया।
⚖️ आदतन अपराध के आधार पर अभियोजन ने मांगी थी अधिकतम सजा: चुनावी हलफनामों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप
रामपुर कोर्ट में चली लंबी कानूनी बहस के दौरान अभियोजन पक्ष (सरकारी वकीलों) ने माननीय न्यायाधीश के सामने यह मजबूत दलील दी कि आजम खान और उनका बेटा अब्दुल्ला आजम पहले से ही इसी तरह के एक अन्य फर्जी जन्म प्रमाणपत्र (Fake Birth Certificate) मामले में भी कोर्ट द्वारा सीधे तौर पर दोषी ठहराए जा चुके हैं। ऐसे में बार-बार जाली सरकारी दस्तावेज तैयार करना और उनका लाभ लेना सीधे तौर पर एक आदतन अपराध (Habitual Offense) की श्रेणी का मामला बनता है। अभियोजन ने इसी क्रिमिनल बैकग्राउंड के आधार पर समाज में कड़ा संदेश देने के लिए दोनों को कानूनन अधिकतम सजा देने की मांग की थी।
सेशन कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्यों को दोबारा परखने के बाद आजम खान और उनके बेटे की सजा को 7 साल से बढ़ाकर सीधे 10 साल कर दिया। इस दोहरे पैन कार्ड केस में मुख्य आरोप यह था कि दोनों ने पूरी तरह से सोची-समझी रणनीति के तहत अलग-अलग जन्म तिथियां दिखाकर महत्वपूर्ण वित्तीय व पहचान दस्तावेज तैयार करवाए और बाद में बिना किसी डर के उनका धड़ल्ले से इस्तेमाल विधानसभा चुनाव के शपथ पत्रों (हलफनामों) तथा अन्य महत्वपूर्ण आधिकारिक व बैंकिंग कामों में किया था।
👨⚖️ साल 2019 में दर्ज हुआ था फर्जीवाड़े का मुकदमा: जन्मतिथि विवाद में अब्दुल्ला पहले ही गंवा चुके हैं अपनी विधायकी
जालसाजी और जाल रचने का यह आपराधिक मामला साल 2019 में रामपुर के स्थानीय थाने में दर्ज कराया गया था। जांच के दौरान पुलिस और आयकर विभाग (Income Tax Department) के आधिकारिक रिकॉर्ड, विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग को सौंपे गए दस्तावेज और अन्य तकनीकी प्रमाण कोर्ट के समक्ष पेश किए गए थे, जो आरोपियों को बरी करने के तर्कों के खिलाफ अकाट्य साबित हुए। उल्लेखनीय है कि आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम पहले भी इसी तरह के एक गंभीर जन्मतिथि विवाद के कारण अपनी उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्यता (विधायक पद) गंवा चुके हैं, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके दस्तावेजों को अवैध पाते हुए उनकी विधायकी रद्द करने का ऐतिहासिक आदेश दिया था।
सपा नेता आजम खान पर रामपुर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न थानों में जमीनों पर अवैध कब्जे, भड़काऊ भाषण और जालसाजी समेत पहले से ही कई दर्जनों आपराधिक मामले विचाराधीन हैं। हाल ही में साल 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रामपुर के तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक व अमर्यादित टिप्पणी करने के मामले में भी एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा उन्हें 2 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद से उनकी राजनीतिक मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।
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