मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और विकास के दावों पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि सरकार भले ही आदिवासियों के विकास के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश के कई इलाकों में न तो बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं हैं, न रोजगार के साधन हैं और न ही बच्चों के लिए शिक्षा की पुख्ता व्यवस्था है। उन्होंने छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से बच्चों की मौत, बालाघाट में कुपोषण, मलेरिया व खसरा से हुई बच्चों की जान जाने, सागर में जहरीली शराब कांड और इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों का हवाला देते हुए सरकार को पूरी तरह नाकाम बताया है।
📄 “सरकार श्वेत पत्र लाकर जनता को बताए, हजारों करोड़ खर्च होने के बाद भी कुपोषण और अत्याचार क्यों नहीं रुके?”
पत्रकारों से चर्चा करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि वे इस संवेदनशील विषय पर किसी तरह की राजनीतिक बयानबाजी नहीं करना चाहते, लेकिन प्रदेश की जनता के सामने सरकार को ‘श्वेत पत्र’ लाकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि हर साल हजारों-करोड़ रुपये का बजट खर्च होने के बावजूद आज भी आदिवासी अंचलों से कुपोषण दूर क्यों नहीं हो सका है। उन्होंने सवाल उठाया कि दूरदराज के इलाकों में आज भी डॉक्टर और शिक्षक क्यों नहीं पहुंच पा रहे हैं तथा लगातार आदिवासियों पर अत्याचार की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं?
🎯 राहुल गांधी के बालाघाट दौरे पर भाजपा के हमलों का पलटवार, कहा—”हम विपक्ष के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, सरकार कहां है?”
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बालाघाट दौरे पर भाजपा द्वारा लगाए जा रहे ‘राजनीति करने’ के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए पीसीसी चीफ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी विपक्ष होने के नाते अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभा रही है, लेकिन सवाल यह है कि इस संकट के समय में सरकार और जिम्मेदार मंत्री कहां हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री प्रभावित इलाकों में कितनी बार गए और मुख्यमंत्री ने जमीनी हकीकत जानने के लिए क्या किया? राहुल गांधी आदिवासी समाज के दर्द को गहराई से समझने, उनकी पीड़ा को देश के सामने लाने और सोई हुई सरकार को जगाने के लिए आ रहे हैं ताकि वे अपने संवैधानिक दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन कर सकें।
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