आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की संदिग्ध आत्महत्या का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस बहुचर्चित मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला से मैराथन पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि यह पूछताछ करीब 8 घंटे तक चली, जिसके दौरान जांच टीम ने प्रोफेसर से घटना से जुड़े तमाम तीखे सवाल किए। मृतक छात्र के परिवार ने प्रोफेसर दूल्ला पर गंभीर आरोप लगाते हुए जातिगत भेदभाव का हवाला दिया है और उनकी गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं।
📝 क्या है पूरा मामला? परीक्षा के दौरान मोबाइल इस्तेमाल करते पकड़े जाने के कुछ घंटों बाद मिला था शव
बीते 18 सितंबर को 22 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे का शव पवई कैंपस स्थित हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका हुआ पाया गया था। यह दुखद घटना तब घटी जब परीक्षा हॉल में साहिल को मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ लिया गया था। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, परीक्षा के दौरान फोन का उपयोग करने पर प्रोफेसर दूल्ला ने उन्हें एक तरफ खींचा था। संस्थान के अनुसार साहिल ने उत्तर जानने के लिए प्रश्नपत्र चैटजीपीटी पर अपलोड किया था। इस घटना के बाद छात्रों ने परिसर में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस ने मृतक के पिता रविंद्र वाकोडे की शिकायत पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है, जबकि प्रोफेसर को डीन पद से हटाकर छुट्टी पर भेज दिया गया है।
⚖️ प्रोफेसर ने आरोपों का किया खंडन, वहीं आईआईटी बॉम्बे के संकाय सदस्य समर्थन में उतरे
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल संस्थान के नियमों और दिशानिर्देशों का पालन किया था और किसी भी तरह की अपमानजनक या जातिवादी टिप्पणी नहीं की। दूसरी ओर, आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम के प्रमुख प्रो. राजकुमार पंत सहित अन्य संकाय सदस्यों ने प्रोफेसर का बचाव करते हुए कहा कि वे केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे और उन्हें इस तरह बदनाम करना पूरे शिक्षण समुदाय के लिए चिंता का विषय है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की गहराई से जांच कर रही है।
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