प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): इलाहाबाद उच्च न्यायालय (High Court) के कड़े रुख और निर्देशों के उपरांत फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर कानून की वकालत करने के आरोपी 12 अधिवक्ताओं के विरुद्ध वैधानिक कानूनी कार्रवाई प्रारंभ हो गई है।
देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से कथित तौर पर फर्जी एलएलबी व अन्य डिग्रियां हासिल कर ‘बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश’ में धोखाधड़ी से पंजीकरण कराने के मामले में पुलिस ने सभी 12 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर मामले की गहन विवेचना शुरू कर दी है।
📜 यूपी बार काउंसिल के सचिव की तहरीर पर प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज
यह संपूर्ण आपराधिक मामला प्रयागराज स्थित सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में दर्ज किया गया है।
पुलिस केस ‘बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश’ के सचिव आर.के. शुक्ला द्वारा दी गई आधिकारिक तहरीर के आधार पर दर्ज हुआ है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि संबंधित वकीलों ने भिन्न-भिन्न विश्वविद्यालयों की संदिग्ध डिग्रियों के आधार पर बार काउंसिल में अपना पंजीकरण कराया था, किंतु जब विभागीय स्तर पर उन डिग्रियों का सत्यापन (Verification) कराया गया, तो वे प्रथम दृष्टया फर्जी एवं कूटरचित पाई गईं।
👨⚖️ 3 जून 2026 को हाईकोर्ट ने जारी किया था सख्त आदेश, पुलिस कर रही है दस्तावेजों की पड़ताल
फर्जी डिग्रियों के आधार पर अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण के बढ़ते मामलों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अत्यंत गंभीरता से लिया था।
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, 3 जून 2026 को हाईकोर्ट द्वारा इस संदर्भ में कड़े प्रशासनिक व कानूनी कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए थे, जिसके बाद कार्रवाई की प्रक्रिया में तेजी आई। बार काउंसिल की शिकायत पर पुलिस ने सभी 12 आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज जमा करने की धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब पुलिस विवेचना के दौरान संदिग्ध डिग्रियों, संबंधित विश्वविद्यालयों द्वारा जारी प्रमाणपत्रों और बार काउंसिल में जमा अभिलेखों की फोरेंसिक व विभागीय जांच की जाएगी।
📍 लखनऊ, कानपुर व गौतमबुद्धनगर समेत कई जिलों से जुड़े हैं आरोपी, एफआईआर में ये नाम शामिल
प्राथमिकी में नामजद किए गए अधिवक्ताओं का संबंध उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मथुरा, गौतमबुद्धनगर, हरदोई, सहारनपुर, गाजियाबाद तथा प्रतापगढ़ सहित अनेक जिलों से है।
एफआईआर में दर्ज प्रमुख नामों में सुनील कुमार अवस्थी, नफीजुल हसन सिद्दीकी, शोभित कुमार यादव, पंकज कुमार, जय नारायण कटियार, नफीस अहमद, देवेश कुमार, श्याम सिंघल, पवन हिंदोल, दीपक कश्यप, अभय सर्वसेना और सत्यम मिश्रा शामिल हैं।
🔍 जांच के घेरे में सत्यापन प्रक्रिया: फर्जी कागजातों से कैसे हुआ पंजीकरण?
इस मामले में शामिल श्याम सिंघल और पवन हिंदोल का संबंध भारतीय जनता पार्टी से बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपों की निष्पक्ष पुष्टि विस्तृत जांच के उपरांत ही संभव होगी।
पुलिस विवेचना में मुख्य रूप से यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित डिग्रियां वास्तव में किन-किन विश्वविद्यालयों से जारी दर्शाई गई थीं, उनकी प्रामाणिकता क्या है और बार काउंसिल में पंजीकरण के समय किस स्तर पर लापरवाही या सांठगांठ से उनका सत्यापन हुआ। इसके साथ ही यह भी गंभीर जांच का विषय होगा कि फर्जी दस्तावेज होने के बावजूद अधिवक्ता के रूप में इनका पंजीकरण कैसे स्वीकृत हो गया।
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