रांची (झारखंड): झारखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और चुनाव अभियान समिति के सदस्य, पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने उन्हें औपचारिक रूप से कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है। के.एन. त्रिपाठी पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य की महागठबंधन सरकार की कार्यशैली पर दिए गए विवादित बयान के कारण की गई है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने स्पष्ट किया है कि संगठन में अनुशासन, सामूहिक जिम्मेदारी और महागठबंधन धर्म सर्वोपरि है, जिससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
🎤 पलामू प्रेस वार्ता में दिए गए बयान पर घिरे के.एन. त्रिपाठी, गठबंधन धर्म के उल्लंघन का आरोप
मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने बताया कि 28 जुलाई 2026 को पलामू में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान के.एन. त्रिपाठी ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था।
उन्होंने कानून-व्यवस्था, राज्य पुलिस और गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर जो सवाल खड़े किए थे, वे पार्टी की निर्धारित नीतियों और महागठबंधन की सामूहिक जिम्मेदारी के अनुरूप बिल्कुल नहीं हैं। राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस आंतरिक रूप से लोकतांत्रिक विचार-विमर्श में विश्वास रखती है, लेकिन सार्वजनिक मंचों से ऐसे बयानबाजी करना, जिससे पार्टी संगठन और महागठबंधन की एकजुटता प्रभावित हो, कतई स्वीकार्य नहीं है।
🏛️ “पार्टी फोरम पर रखनी चाहिए थी बात”: मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा का तीखा हमला
राकेश सिन्हा ने संगठनात्मक मर्यादा पर जोर देते हुए कहा कि कांग्रेस एक अनुशासित संगठन है और पार्टी के प्रत्येक छोटे-बड़े नेता व कार्यकर्ता के लिए अनुशासनात्मक दायरे का पालन करना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि यदि के.एन. त्रिपाठी को किसी विषय या विभाग की कार्यशैली पर कोई आपत्ति या मतभेद था, तो उन्हें अपनी बात पार्टी के अधिकृत आंतरिक मंचों पर रखनी चाहिए थी। सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान देने से न केवल संगठन की छवि धूमिल होती है, बल्कि विपक्षी दलों को भी भ्रम फैलाने का अवांछित अवसर मिल जाता है।
⚖️ पार्टी संविधान के तहत होगी आगे की कार्रवाई, संगठन का हित सर्वोपरि
पार्टी के मीडिया प्रभारी ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा जारी यह कारण बताओ नोटिस विशुद्ध रूप से संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है।
के.एन. त्रिपाठी से नोटिस प्राप्ति के सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनके द्वारा दिए गए जवाब के आधार पर ही आगे की कार्रवाई पार्टी के संविधान और अनुशासनात्मक नियमों के तहत तय की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी महागठबंधन की मजबूती, अनुशासन और जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के प्रति पूरी तरह गंभीर है तथा अनुशासनहीनता को किसी भी स्तर पर बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।
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