नई दिल्ली: शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के खिलाफ दायर मानहानि के मामले में अतिरिक्त गवाहों को बुलाने और अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने की मजीठिया की याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि निचली अदालत और हाई कोर्ट ने इस मामले पर पहले ही उचित विचार किया है।
📜 क्या थी मजीठिया की दलील?
सुनवाई के दौरान मजीठिया के वकील ने तर्क दिया कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते समय स्वतंत्र तर्कों का अभाव रखा था। साथ ही, उन्होंने CrPC की धारा 311 की व्याख्या पर सवाल उठाए और संजय सिंह के बाद के बयानों को भी रिकॉर्ड में शामिल करने की मांग की थी। हालांकि, संजय सिंह के वकील ने स्पष्ट किया कि आवश्यक सामग्री पहले से ही अदालत के रिकॉर्ड का हिस्सा है।
🗳️ 2016 का मानहानि मामला और राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह कानूनी विवाद साल 2016 का है। पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मोगा में एक रैली के दौरान संजय सिंह ने अकाली दल के नेताओं पर नशा तस्करी से जुड़े होने का सनसनीखेज आरोप लगाया था। इस बयान के बाद बिक्रम मजीठिया ने संजय सिंह के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था। तब से लेकर आज तक पंजाब की राजनीति में ‘नशा’ एक बड़ा मुद्दा रहा है और यह केस उसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की एक लंबी कड़ी का हिस्सा है।
🔍 आगे की राह
हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद मजीठिया ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अब शीर्ष अदालत ने भी उनकी याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के बाद अब ट्रायल कोर्ट में मामले की कार्यवाही पर सबकी निगाहें टिकी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कानूनी लड़ाई का असर भविष्य की पंजाब राजनीति पर भी पड़ता रहेगा।
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