छतरपुर (मध्य प्रदेश): जिले के सरकारी अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है।
ग्राम सिंगरोन निवासी एक आदिवासी प्रसूता महिला को समय पर खून (ब्लड) न मिल पाने के कारण पहले नवजात बच्चे की मौत हो गई और इसके कुछ ही देर बाद उपचार के अभाव में मां ने भी दम तोड़ दिया। पीड़ित परिवार का गंभीर आरोप है कि वे अस्पताल परिसर में खून की व्यवस्था के लिए दर-दर भटकते रहे और गुहार लगाते रहे, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई मदद या त्वरित सुनवाई नहीं की गई।
इस संवेदनशील घटना की सूचना मिलते ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने मौके पर पहुंचकर मामले की विस्तृत प्रशासनिक जांच के आदेश दिए हैं।
🚑 बमीठा से जिला अस्पताल किया गया था रेफर: परिजनों को बताई गई थी खून की भारी कमी
घटनाक्रम और रेफरल प्रक्रिया का विवरण:
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से रेफर: मृतका संध्या आदिवासी को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर पहले बमीठा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था।
गंभीर स्थिति के कारण रेफरल: बमीठा के चिकित्सकों ने स्थिति नाजुक देखकर उन्हें तत्काल छतरपुर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
खून की व्यवस्था के लिए भटके परिजन: जिला अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन/खून की भारी कमी है, जिसके बाद परिजन ब्लड बैंक और अस्पताल में व्यवस्था के लिए भागदौड़ करते रहे, लेकिन समय रहते खून उपलब्ध नहीं हो सका।
पीड़ित परिवार का दर्द और प्रशासनिक उदासीनता:⚖️ ‘बच्चा जिंदा पैदा हुआ था, खून के अभाव में दोनों ने दम तोड़ा’: परिजनों के गंभीर आरोप
ससुर का बयान: मृतका के ससुर रजऊ आदिवासी ने रोते हुए आरोप लगाया कि उनकी बहू को तुरंत खून चढ़ाने की सख्त जरूरत थी। उन्होंने पूरे अस्पताल में खून की तलाश की और डॉक्टरों व स्टाफ से मिन्नतें कीं, लेकिन किसी ने उनकी पीड़ा नहीं सुनी।
मौत का क्रम: परिजनों का दावा है कि बच्चा जन्म के समय जीवित था, लेकिन उचित उपचार और ऑक्सीजन/ब्लड सपोर्ट न मिलने से उसने थोड़ी देर में दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत की खबर सुनते ही सदमे और गंभीर कमजोरी के कारण मां संध्या की तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई और उसकी भी जान चली गई।
स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष और जांच के निर्देश:🩺 सीएमएचओ आरपी गुप्ता का बयान: ‘मामले के सभी पहलुओं की होगी निष्पक्ष जांच’
सीएमएचओ का अस्पताल दौरा: घटना के बाद जिला सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने स्वयं जिला अस्पताल पहुंचकर ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों, नर्सों और परिजनों से पूरी घटना की जानकारी ली।
प्रशासन का तर्क: सीएमएचओ ने बताया कि महिला की डिलीवरी सामान्य प्रक्रिया से हुई थी और अस्पताल रिकॉर्ड के मुताबिक बच्चा मृत ही पैदा हुआ था।
अचानक तबीयत बिगड़ने की बात: उन्होंने कहा कि प्रसव के लगभग दो घंटे बाद तक महिला की हालत स्थिर बताई गई थी, लेकिन अचानक अत्यधिक घबराहट और पसीना आने के बाद स्थिति बिगड़ी और उसकी मृत्यु हो गई।
दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन: सीएमएचओ ने आश्वस्त किया कि डिलीवरी के दौरान प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं और ब्लड बैंक की क्या भूमिका रही, इन सभी बिंदुओं पर गहन जांच की जा रही है और लापरवाही पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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