दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल और बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल अपना-अपना दमखम दिखाने में पूरी तरह से जुटे हैं। इसी कड़ी में दतिया से कांग्रेस के उम्मीदवार बनाए गए घनश्याम सिंह का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि दतिया का उपचुनाव अब उनके लिए काफी आसान हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी उनके लिए कोई चुनौती नहीं हैं। भाजपा द्वारा आशुतोष तिवारी को टिकट दिए जाने पर तंज कसते हुए घनश्याम सिंह ने कहा, “जहां हमारे लिए चुनौती थी, वहां तो टिकट कट गया है। लोगों ने शायद आशुतोष तिवारी का नाम भी नहीं सुना होगा।” उन्होंने आगे कहा कि आशुतोष की पकड़ ग्रामीण क्षेत्रों में बिल्कुल भी नहीं है। दतिया विधानसभा के गांव के लोग आशुतोष को जानते तक नहीं हैं, क्योंकि वे कभी गांवों में गए ही नहीं।
आशुतोष तिवारी और पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की तुलना करते हुए घनश्याम सिंह ने बेबाकी से कहा कि नरोत्तम मिश्रा चुनाव मैदान में होते तो वे एक बहुत बड़ी चुनौती थे, लेकिन उनके सामने आशुतोष कुछ भी नहीं हैं। कांग्रेस प्रत्याशी ने आरोप लगाया कि आशुतोष केवल पार्टी, सरकार और प्रशासन के दम पर ही चुनाव लड़ रहे हैं। जब सारी ताकतें और पैसा लगेगा, तभी आशुतोष कुछ अच्छे वोट हासिल कर पाएंगे, अन्यथा उनका अपना कोई विशेष जनाधार नहीं है। अपनी प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए घनश्याम सिंह ने कहा कि दतिया में सबसे जरूरी बात ‘भ्रष्टाचार’ को जड़ से खत्म करना है, ताकि यहां की आम जनता विकास कार्यों का पूरा फायदा उठा सके। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि दतिया का सामाजिक ताना-बाना बिगड़ गया है और राजनीतिक दुश्मनी बहुत अधिक बढ़ गई है, जिससे लोग एक-दूसरे को दुश्मन समझने लगे हैं। उन्होंने संदेश दिया कि लोकतंत्र में विरोधी सिर्फ राजनीतिक विरोधी होता है, दुश्मन नहीं।‘गांव के लोग आशुतोष तिवारी को जानते तक नहीं’
‘नरोत्तम मिश्रा होते तो यकीनन एक बड़ी चुनौती थी’
‘राजनीतिक दुश्मनी खत्म करना और भाईचारा बढ़ाना प्राथमिकता’
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दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल और बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल अपना-अपना दमखम दिखाने में पूरी तरह से जुटे हैं। इसी कड़ी में दतिया से कांग्रेस के उम्मीदवार बनाए गए घनश्याम सिंह का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि दतिया का उपचुनाव अब उनके लिए काफी आसान हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी उनके लिए कोई चुनौती नहीं हैं।
‘गांव के लोग आशुतोष तिवारी को जानते तक नहीं’
भाजपा द्वारा आशुतोष तिवारी को टिकट दिए जाने पर तंज कसते हुए घनश्याम सिंह ने कहा, “जहां हमारे लिए चुनौती थी, वहां तो टिकट कट गया है। लोगों ने शायद आशुतोष तिवारी का नाम भी नहीं सुना होगा।” उन्होंने आगे कहा कि आशुतोष की पकड़ ग्रामीण क्षेत्रों में बिल्कुल भी नहीं है। दतिया विधानसभा के गांव के लोग आशुतोष को जानते तक नहीं हैं, क्योंकि वे कभी गांवों में गए ही नहीं।
‘नरोत्तम मिश्रा होते तो यकीनन एक बड़ी चुनौती थी’
आशुतोष तिवारी और पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की तुलना करते हुए घनश्याम सिंह ने बेबाकी से कहा कि नरोत्तम मिश्रा चुनाव मैदान में होते तो वे एक बहुत बड़ी चुनौती थे, लेकिन उनके सामने आशुतोष कुछ भी नहीं हैं। कांग्रेस प्रत्याशी ने आरोप लगाया कि आशुतोष केवल पार्टी, सरकार और प्रशासन के दम पर ही चुनाव लड़ रहे हैं। जब सारी ताकतें और पैसा लगेगा, तभी आशुतोष कुछ अच्छे वोट हासिल कर पाएंगे, अन्यथा उनका अपना कोई विशेष जनाधार नहीं है।
‘राजनीतिक दुश्मनी खत्म करना और भाईचारा बढ़ाना प्राथमिकता’
अपनी प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए घनश्याम सिंह ने कहा कि दतिया में सबसे जरूरी बात ‘भ्रष्टाचार’ को जड़ से खत्म करना है, ताकि यहां की आम जनता विकास कार्यों का पूरा फायदा उठा सके। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि दतिया का सामाजिक ताना-बाना बिगड़ गया है और राजनीतिक दुश्मनी बहुत अधिक बढ़ गई है, जिससे लोग एक-दूसरे को दुश्मन समझने लगे हैं। उन्होंने संदेश दिया कि लोकतंत्र में विरोधी सिर्फ राजनीतिक विरोधी होता है, दुश्मन नहीं।


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