दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘एनालॉग पनीर’ और नॉन-डेयरी प्रोडक्ट्स के बढ़ते चलन के खिलाफ दाखिल एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ा संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह याचिका राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कथित तौर पर असली ‘पनीर’ के नाम पर बेचे या परोसे जा रहे डेयरी एनालॉग्स के खिलाफ फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को पूरी सख्ती से लागू करने की मांग को लेकर दायर की गई है।
दिल्ली हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की डिवीजन बेंच ने इस मामले में केंद्र सरकार, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI), दिल्ली सरकार और उसके फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट को आधिकारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
🍽️ कस्टमर के पास यह जानने का कोई तरीका नहीं कि डिश मिल्क प्रोडक्ट है या एनालॉग
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि जब कोई भी ग्राहक किसी होटल या रेस्टोरेंट में पनीर से बनी डिश ऑर्डर करता है, तो वह यही मानकर चलता है कि उसे मिलने वाली डिश शुद्ध डेयरी प्रोडक्ट होगी, कोई एनालॉग नहीं।
पहचान करना नामुमकिन: दुर्भाग्यवश, आज के समय में ग्राहक के पास यह जानने का कोई प्रैक्टिकल तरीका नहीं है कि परोसी गई डिश असली मिल्क प्रोडक्ट है या किसी अलग कंपोजिशन वाला एनालॉग।
शक्ल और स्वाद में एक जैसे: यह पनीर की एक रेप्लिका (प्रतिलिपि) हो सकती है, जो दिखने और स्वाद में बिल्कुल पनीर जैसी ही लगती है, लेकिन इसे डिस्क्लोज करने या ग्राहकों को बताने का कोई पारदर्शी मैकेनिज्म मौजूद नहीं है।
अदालत के यह पूछने पर कि इस मामले में किन कानूनी अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, वकील ने फूड प्रोडक्शन स्टैंडर्ड और फूड एडिटिव्स से जुड़े 2011 के FSSAI रेगुलेशंस का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि असली पनीर एक ऐसा पौष्टिक प्रोडक्ट है जिसमें प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है, जबकि डेयरी एनालॉग्स में मुख्य रूप से सिर्फ कार्बोहाइड्रेट होते हैं और उनकी न्यूट्रिशनल वैल्यू (पोषण मूल्य) न के बराबर होती है। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने त्योहारी सीजन (नवरात्रि और दशहरा) का हवाला देते हुए कुछ खास सैंपलिंग के निर्देश देने की अंतरिम राहत मांगी, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल कोई तुरंत आदेश पारित नहीं किया है।
🔍 अन्य राज्यों के कदमों का जिक्र और फूड सेफ्टी नियमों के पालन की मांग
इस PIL में सक्षम अधिकारियों को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 और उसके तहत बने नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि चुनौती किसी भी कानूनी रूप से निर्मित डेयरी एनालॉग के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन प्रोडक्ट्स के खिलाफ है जिन्हें बिना उनकी असली पहचान बताए ‘पनीर’ के रूप में धड़ल्ले से बेचा, सप्लाई या परोसा जा रहा है। विशेष रूप से होटल, रेस्टोरेंट, केटरर, ढाबे और क्लाउड किचन इस दायरे में आते हैं।
अन्य राज्यों के उपाय: याचिका में महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों का भी विशेष जिक्र किया गया है। उदाहरण के लिए, पंजाब के फूड सेफ्टी अधिकारियों द्वारा जारी उस आदेश का हवाला दिया गया है जिसमें एक तय समय के लिए एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर पर रोक लगाई गई थी।
ओखला सब्जी मंडी की कार्रवाई: इसके अलावा, अगस्त 2026 में दिल्ली फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट द्वारा ओखला सब्जी मंडी में संदिग्ध पनीर के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी जिक्र किया गया है, जिसके तहत लगभग 508 किलो संदेहास्पद प्रोडक्ट को नष्ट किया गया था।
याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली में डेयरी एनालॉग या नॉन-डेयरी प्रोडक्ट्स को पनीर के रूप में परोसने पर रोक लगाई जाए और पनीर से जुड़े उत्पादों की ज्वाइंट मॉनिटरिंग, औचक निरीक्षण, सैंपलिंग और लैब टेस्टिंग की व्यवस्था को और अधिक पुख्ता किया जाए।
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