शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व इस बार 11 अक्टूबर से धूमधाम से प्रारंभ हो चुका है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में दुर्गा अष्टमी (Durga Ashtami) का दिन बेहद विशेष, पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पावन अवसर पर माता रानी को पूरी, सूजी का हलवा और काले चने का विशेष भोग अर्पित किया जाता है। लगातार नौ दिनों तक फलाहार या व्रत रखने के बाद पक्का भोजन यानी पूरी, हलवा और चने से मां दुर्गा की पूजा संपन्न होती है। यह सात्विक भोजन माता रानी को अत्यंत प्रिय है और भक्तजन पूरी श्रद्धा व प्रेम के साथ इसे तैयार करते हैं। व्रत का समापन भी इसी शुद्ध भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण करके किया जाता है।
🥣 मां दुर्गा को क्यों प्रिय है हलवा, पूरी और चने का सात्विक भोग?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्गा अष्टमी के दिन पूरी, हलवा और काले चने का भोग लगाने का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है। नौ दिनों तक लगातार उपवास रखने के बाद जब यह सात्विक भोजन तैयार किया जाता है, तो इसे सबसे पहले देवी मां को समर्पित किया जाता है।
जल्द प्रसन्न होती हैं माता: मान्यता है कि इस विशेष भोग को अर्पित करने से माता रानी अपने भक्तों पर बहुत जल्द प्रसन्न होती हैं और उनके जीवन में सुख-शांति व समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
सकारात्मक ऊर्जा: इस पारंपरिक भोग को तैयार करने से घर में सात्विकता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ अष्टमी पर इस विशेष भोजन को ग्रहण करने के पीछे एक बहुत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण भी छिपा हुआ है:🧬 भोग से जुड़ा वैज्ञानिक कारण और सेहत के लिए इसके लाभ
तत्काल ऊर्जा का स्त्रोत: नौ दिनों तक लगातार उपवास रखने के बाद शरीर को तुरंत ताकत और ऊर्जा की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। काले चने में प्रोटीन और आयरन प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो उपवास से आई शारीरिक कमजोरी को तुरंत दूर करने में मदद करते हैं।
सुपाच्य आहार: सूजी का हलवा बेहद हल्का और सुपाच्य (Easy to digest) होता है, जो पेट के लिए काफी अच्छा माना जाता है। यह भोजन पाचन तंत्र पर बिना किसी अतिरिक्त दबाव के शरीर को भरपूर पोषण प्रदान करता है, इसलिए उपवास खोलने के लिए इस सात्विक आहार को सबसे उत्तम माना गया है।
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