कटिहार: बिहार के कटिहार जिले से एक सनसनीखेज और चर्चित मामले में न्याय की बड़ी जीत सामने आई है। कटिहार जिले के आजमनगर थाना क्षेत्र से जुड़े शाहरुल अपहरण एवं हत्याकांड मामले में सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश पंचम विजेंद्र कुमार की अदालत ने छह दोषियों को कठोर सश्रम आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इन सभी दोषियों पर युवक शाहरुल का सुनियोजित तरीके से अपहरण करने, उसके परिजनों से 50 लाख रुपये की भारी-भरकम फिरौती मांगने और फिरौती न मिलने पर उसकी बेरहमी से हत्या करने का गंभीर आरोप पूरी तरह से साबित हो चुका है। शातिर अपराधियों ने हत्या को अंजाम देने के बाद साक्ष्य मिटाने की नीयत से मृतक के शव को महानंदा नदी में फेंक दिया था। न्यायालय द्वारा इस बहुचर्चित मामले में जिन छह लोगों को दोषी करार दिया गया है, उनमें मोहम्मद गुलजार, प्रताप सिंह, मोहम्मद इमाम, विभीषण सिंह, मिथिलेश कुमार सिंह और शेखर सिंह के नाम शामिल हैं। पुलिस और अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, ये सभी छह दोषी आजमनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दिघलिया गांव के ही निवासी हैं, जिन्होंने इस खौफनाक वारदात को मिलकर अंजाम दिया था। इस मामले की कानूनी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक रामविलास पासवान ने बताया कि आजमनगर निवासी मोहम्मद शकील के पुत्र शाहरुल के अचानक लापता हो जाने के बाद, परिजनों ने गत 30 जनवरी 2022 को स्थानीय थाने में सनहा दर्ज कराया था। परिवार के लोगों ने देर शाम तक उसकी चप्पे-चप्पे पर काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा। इसके बाद, एक फरवरी 2022 को इस पूरे मामले में अपहरण की औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया। जब स्थानीय पुलिस ने इस अंधे मामले की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच शुरू की, तो सबसे पहले एक फोन कॉल ने इस सनसनीखेज वारदात का पर्दाफाश किया। जांच में यह बात सामने आई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर शाहरुल को मिलने के बहाने बुलाया था। पुलिस ने इसी अहम फोन कॉल को अपनी जांच का मुख्य सुराग बनाया और कड़ियां जोड़ते हुए इस अपराध में शामिल सभी छह आरोपियों की संलिप्तता का पता लगा लिया। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को धर दबोचा और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। पुलिसिया तफ्तीश में यह बात साफ हो गई थी कि शाहरुल का अपहरण करने के बाद अपराधियों ने उसके परिजनों से 50 लाख रुपये की फिरौती की मांग की थी। जब फिरौती की रकम नहीं मिल पाई, तो आरोपियों ने उसकी हत्या कर दी और शव को महानंदा नदी के हवाले कर दिया। इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश किए गए पुख्ता साक्ष्यों, वैज्ञानिक सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायाधीश ने सभी छह आरोपियों को दोषी करार दिया। लगभग चार साल तक चली लंबी और निरंतर कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार अदालत ने सभी छह दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाकर एक बड़ा संदेश दिया है। इस न्यायपूर्ण फैसले के बाद शाहरुल हत्याकांड में न्याय की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा हो गया है, और इतने वर्षों के संघर्ष के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने से समाज में कानून का भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।दोषियों में मोहम्मद गुलजार, प्रताप सिंह समेत छह लोग शामिल, आजमनगर थाना क्षेत्र के दिघलिया गांव के रहने वाले हैं सभी आरोपी
30 जनवरी 2022 को लापता हुआ था शाहरुल, परिजनों द्वारा काफी तलाश के बाद एक फरवरी को दर्ज कराई गई थी औपचारिक प्राथमिकी
एक फोन कॉल से खुला अपहरण और हत्या का पूरा राज, पुलिस की मुस्तैदी से गिरफ्त में आए सभी छह आरोपी
करीब चार साल चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया फैसला, पीड़ित परिवार को मिला न्याय
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कटिहार: बिहार के कटिहार जिले से एक सनसनीखेज और चर्चित मामले में न्याय की बड़ी जीत सामने आई है। कटिहार जिले के आजमनगर थाना क्षेत्र से जुड़े शाहरुल अपहरण एवं हत्याकांड मामले में सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश पंचम विजेंद्र कुमार की अदालत ने छह दोषियों को कठोर सश्रम आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इन सभी दोषियों पर युवक शाहरुल का सुनियोजित तरीके से अपहरण करने, उसके परिजनों से 50 लाख रुपये की भारी-भरकम फिरौती मांगने और फिरौती न मिलने पर उसकी बेरहमी से हत्या करने का गंभीर आरोप पूरी तरह से साबित हो चुका है। शातिर अपराधियों ने हत्या को अंजाम देने के बाद साक्ष्य मिटाने की नीयत से मृतक के शव को महानंदा नदी में फेंक दिया था।
दोषियों में मोहम्मद गुलजार, प्रताप सिंह समेत छह लोग शामिल, आजमनगर थाना क्षेत्र के दिघलिया गांव के रहने वाले हैं सभी आरोपी
न्यायालय द्वारा इस बहुचर्चित मामले में जिन छह लोगों को दोषी करार दिया गया है, उनमें मोहम्मद गुलजार, प्रताप सिंह, मोहम्मद इमाम, विभीषण सिंह, मिथिलेश कुमार सिंह और शेखर सिंह के नाम शामिल हैं। पुलिस और अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, ये सभी छह दोषी आजमनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दिघलिया गांव के ही निवासी हैं, जिन्होंने इस खौफनाक वारदात को मिलकर अंजाम दिया था।
30 जनवरी 2022 को लापता हुआ था शाहरुल, परिजनों द्वारा काफी तलाश के बाद एक फरवरी को दर्ज कराई गई थी औपचारिक प्राथमिकी
इस मामले की कानूनी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए अपर लोक अभियोजक रामविलास पासवान ने बताया कि आजमनगर निवासी मोहम्मद शकील के पुत्र शाहरुल के अचानक लापता हो जाने के बाद, परिजनों ने गत 30 जनवरी 2022 को स्थानीय थाने में सनहा दर्ज कराया था। परिवार के लोगों ने देर शाम तक उसकी चप्पे-चप्पे पर काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा। इसके बाद, एक फरवरी 2022 को इस पूरे मामले में अपहरण की औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया।
एक फोन कॉल से खुला अपहरण और हत्या का पूरा राज, पुलिस की मुस्तैदी से गिरफ्त में आए सभी छह आरोपी
जब स्थानीय पुलिस ने इस अंधे मामले की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच शुरू की, तो सबसे पहले एक फोन कॉल ने इस सनसनीखेज वारदात का पर्दाफाश किया। जांच में यह बात सामने आई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर शाहरुल को मिलने के बहाने बुलाया था। पुलिस ने इसी अहम फोन कॉल को अपनी जांच का मुख्य सुराग बनाया और कड़ियां जोड़ते हुए इस अपराध में शामिल सभी छह आरोपियों की संलिप्तता का पता लगा लिया। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को धर दबोचा और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। पुलिसिया तफ्तीश में यह बात साफ हो गई थी कि शाहरुल का अपहरण करने के बाद अपराधियों ने उसके परिजनों से 50 लाख रुपये की फिरौती की मांग की थी। जब फिरौती की रकम नहीं मिल पाई, तो आरोपियों ने उसकी हत्या कर दी और शव को महानंदा नदी के हवाले कर दिया।
करीब चार साल चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया फैसला, पीड़ित परिवार को मिला न्याय
इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश किए गए पुख्ता साक्ष्यों, वैज्ञानिक सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायाधीश ने सभी छह आरोपियों को दोषी करार दिया। लगभग चार साल तक चली लंबी और निरंतर कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार अदालत ने सभी छह दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाकर एक बड़ा संदेश दिया है। इस न्यायपूर्ण फैसले के बाद शाहरुल हत्याकांड में न्याय की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा हो गया है, और इतने वर्षों के संघर्ष के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने से समाज में कानून का भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।


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