दुनिया के शीर्ष औद्योगिक देशों के समूह G7 ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति संकट से निपटने के लिए एक बड़ा संयुक्त कदम उठाया है।
ऊर्जा संकट की गंभीर चुनौतियों के बीच G7 देशों ने अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) से 100 मिलियन (10 करोड़) बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बाजार में जारी करने पर औपचारिक सहमति व्यक्त की है।
इस आपातकालीन फैसले में वैश्विक स्तर पर औद्योगिक और परिवहन क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले डीजल की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, ताकि माल ढुलाई और उत्पादन लागत को नियंत्रित किया जा सके।
⏳ 20 दिनों में पहुंचेगी डीजल की बड़ी खेप: 4 महीने तक जारी रहेगा निकासी अभियान
आपातकालीन तेल निकासी की रूपरेखा और समय-सारणी:
तत्काल शुरुआत: G7 के आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार, सदस्य देशों के रणनीतिक भंडार से तेल और ईंधन निकालने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू की जाएगी।
चार महीने की समयसीमा: यह संपूर्ण निकासी अभियान आगामी लगभग चार महीनों तक चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
शुरुआती 20 दिनों का लक्ष्य: बाजार में तुरंत स्थिरता लाने के उद्देश्य से पहले 20 दिनों के भीतर ही डीजल की एक बड़ी खेप अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने की ठोस योजना बनाई गई है।
IEA करेगा समन्वय: इस पूरी निकासी प्रक्रिया, लॉजिस्टिक्स और देशों के बीच संतुलन की निगरानी व समन्वय का दायित्व अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) को सौंपा गया है।
वैश्विक स्तर पर ईंधन की अभूतपूर्व महंगाई का विश्लेषण:📈 अमेरिका और यूरोप में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर: महंगाई ने बढ़ाई चिंता
अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर: यह वैश्विक निर्णय ऐसे नाजुक समय पर लिया गया है जब अमेरिका में डीजल की खुदरा कीमतें ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच चुकी हैं।
कीमतों के आंकड़े: 2 अक्टूबर को अमेरिका में डीजल का औसत मूल्य 6.37 डॉलर प्रति गैलन दर्ज किया गया, जबकि 22 सितंबर को यह 6.52 डॉलर प्रति गैलन के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था।
यूरोपीय बाजारों पर दबाव: यूरोप के अधिकांश देश भी रिफाइनरी संकट और आपूर्ति बाधित होने के कारण डीजल की भारी किल्लत और असहनीय मूल्य वृद्धि का सामना कर रहे हैं।
अमेरिकी रुख और आपूर्ति बढ़ाने की रणनीति:🎙️ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान: यूरोपीय डीजल स्टॉक से तत्काल मिलेगी राहत
यूरोप के साथ तालमेल: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले को त्वरित और निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि यूरोपीय देश अपने विशाल डीजल रिजर्व से भारी मात्रा में ईंधन बाजार में लाने पर पूरी तरह सहमत हो चुके हैं।
बाजार में तरलता: ट्रंप ने रेखांकित किया कि इस संयुक्त पहल से अमेरिका के घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता में तुरंत सुधार होगा और लंबे समय से उपभोक्ताओं पर पड़ रहे महंगाई के दबाव में कमी आएगी।
G7 देशों के बीच आंतरिक व्यापार और सहयोग के नियम:🌐 ऊर्जा निर्यात पर प्रतिबंध न लगाने पर सहमति: रिफाइनरी क्षमता बढ़ाने पर जोर
निर्यात पर रोक नहीं: G7 सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से यह स्पष्ट किया है कि संकट के इस दौर में किसी भी सदस्य देश द्वारा ऊर्जा, कच्चे तेल या पेट्रोलियम उत्पादों के आपसी निर्यात पर कोई व्यापारिक पाबंदी नहीं लगाई जाएगी।
मेंटेनेंस का समन्वय: रिफाइनरियों के नियमित मेंटेनेंस शेड्यूल को आपस में तालमेल बनाकर तय किया जाएगा, जिससे उत्पादन में किसी तरह का अनावश्यक व्यवधान न आए।
उत्पादन क्षमता का दोहन: सदस्य देशों ने जहां भी संभव हो, अपनी रिफाइनिंग इकाइयों की परिचालन क्षमता को अधिकतम स्तर तक बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
ऐलान के तुरंत बाद बाजार की प्रतिक्रिया:📉 कच्चे तेल और गैसऑयल की कीमतों में गिरावट: अंतरराष्ट्रीय बाजार का शुरुआती रुझान
ब्रेंट और WTI में नरमी: G7 की घोषणा सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में दिसंबर डिलीवरी वाले सौदों में करीब 1.1% की गिरावट दर्ज की गई और यह 101.23 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 2.3% फिसलकर 90.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
यूरोपीय गैसऑयल फ्यूचर्स धड़ाम: यूरोपीय बाजार में गैसऑयल फ्यूचर्स में 7% से अधिक की तेज गिरावट देखी गई, जिससे उपभोक्ताओं को फौरी राहत के संकेत मिले हैं।
बाजार में स्थिति स्पष्ट होने की प्रतीक्षा: ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि बाजार इस बात की आधिकारिक स्पष्टता का इंतजार कर रहा है कि 100 मिलियन बैरल की यह घोषणा पूरी तरह से नया अतिरिक्त कोटा है या इसमें पूर्व में घोषित कुछ प्रतिबद्धताओं को भी समाहित किया गया है।
यह खबर आपको कैसी लगी?


व्यापार



























