इंदौर में प्रकाशित एक अखबार में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हवाले से एक कथित पत्र के दावे ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। पत्र में दावा किया गया है कि इंदौर की उपेक्षा से नाराज होकर विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और विकास कार्यों के नाम पर सारा ध्यान उज्जैन में केंद्रित करने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।
🗣️ क्या बोले कैलाश विजयवर्गीय?
मीडिया के सामने इस कथित पत्र पर नाराजगी जाहिर करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ”पता नहीं कहां से ऐसी बातें लिख देते हैं, जिस अखबार ने खबर छापी है, उसी से पूछिए।” उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ऐसी किसी भी चिट्ठी का कोई आधार नहीं है और उन्होंने इसे महज अफवाह बताया है।
🤝 सियासी बयानबाजी: कांग्रेस ने की तारीफ, दिग्विजय सिंह ने साधा निशाना
विजयवर्गीय ने भले ही पत्र की बात नकारी हो, लेकिन कांग्रेस को भाजपा पर हमला करने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इसे विजयवर्गीय का ‘साहसी कदम’ बताया है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने तंज कसते हुए ट्वीट किया, ”माननीय श्री कैलाश विजयवर्गीय जी, आपका दर्द मैं समझ रहा हूं। जो श्री मोहन यादव जी आपके चरण छूता था, वह अब आपके साथ यह व्यवहार कर रहा है।”
📑 वायरल चिट्ठी के कथित 5 मुख्य बिंदु
अखबार में प्रकाशित वायरल पत्र में निम्नलिखित मुद्दों को लेकर असंतोष जताया गया है:
मास्टर प्लान: नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा मास्टर प्लान को लंबे समय से जारी न करना।
मेट्रोपॉलिटन रीजन: इंदौर का 59% योगदान होने के बावजूद रीजन का नाम ‘उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन’ करना।
SGSITS की उपेक्षा: RGPV का विस्तार इंदौर के बजाय उज्जैन में करने का प्रयास।
औद्योगिक असंतोष: पीथमपुर के औद्योगिक हब को छोड़कर उज्जैन के विक्रमपुरी पर पूरा ध्यान केंद्रित करना।
एयरपोर्ट और सिंहस्थ: इंदौर एयरपोर्ट के विस्तार और सिंहस्थ कार्यों में इंदौर की अनदेखी करना।
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