रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (JPCC) की अनुशासन कमेटी ने राज्य के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता योगेंद्र साव को पार्टी अनुशासन के उल्लंघन के गंभीर मामले में कारण बताओ (शो कॉज) नोटिस जारी किया है। अनुशासन कमेटी के अध्यक्ष डॉ. रामेश्वर उरांव द्वारा जारी इस नोटिस में योगेंद्र साव से तीन दिनों के अंदर अपना लिखित स्पष्टीकरण देने और स्वयं उपस्थित होकर यह बताने को कहा गया है कि पार्टी संविधान के प्रावधानों के तहत उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?
📢 निष्कासन रद्द होने के बाद फिर विवादों में घिरे: मुख्यमंत्री पर आपत्तिजनक बयान देने से नाराज हुआ शीर्ष नेतृत्व
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने इस कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि नोटिस में इस बात का उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी पार्टी अनुशासन के उल्लंघन के कारण योगेंद्र साव को पार्टी से निष्कासित किया गया था। बाद में पार्टी नेतृत्व ने उनके लंबे संगठनात्मक योगदान को ध्यान में रखते हुए निष्कासन का निर्णय निरस्त कर दिया था। लेकिन हाल ही में मीडिया के माध्यम से उनके द्वारा मुख्यमंत्री और सत्ताधारी गठबंधन के प्रमुख नेताओं को लेकर दिए गए आपत्तिजनक और विवादास्पद बयानों को पार्टी नेतृत्व ने अत्यंत गंभीरता से लिया है।
🛑 “संगठन की छवि को बार-बार पहुंचा रहे नुकसान”: अनुशासन कमेटी ने सख्त रुख अपनाया
शो कॉज नोटिस के अनुसार, योगेंद्र साव का हालिया आचरण और सार्वजनिक बयानबाज़ी कांग्रेस पार्टी के सिद्धांतों और नीतियों के पूर्णतः विपरीत है।
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि शीर्ष नेतृत्व द्वारा दिए गए निर्देशों की लगातार अवहेलना की जा रही है। अनुशासन कमेटी ने कहा है कि बार-बार इस प्रकार का अनुशासनहीन आचरण यह स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी अनुशासन के विरुद्ध गतिविधियां दोहराई जा रही हैं, जिससे संगठन की साख और छवि को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। इसी कारण उनसे जवाब मांगा गया है कि उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
⚖️ “विचारों की स्वतंत्रता के साथ अनुशासन भी बेहद जरूरी”: मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा का बयान
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने स्पष्ट किया कि संगठन में अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में प्रत्येक कार्यकर्ता को विचारों की स्वतंत्रता है, लेकिन इसके साथ ही संगठनात्मक अनुशासन भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। पार्टी के अधिकृत मंच से बाहर जाकर ऐसे सार्वजनिक वक्तव्य देना जो पार्टी की घोषित नीति, सिद्धांतों और नेतृत्व के निर्देशों के विपरीत हों, संगठन के लिए किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
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