जमशेदपुर: झारखंड के जमशेदपुर शहर में रात के समय दुकानों और सड़कों पर मौजूद आम नागरिकों को हटाने के लिए पुलिस कर्मियों द्वारा लाठियां बरसाए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना के सामने आने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ खुद सत्ता पक्ष के नेता भी पुलिस की इस कार्यशैली और रवैये पर खुलकर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। नेताओं का साफ तौर पर कहना है कि आम नागरिकों और राहगीरों को इस तरह से पीटना किसी भी स्थिति में अपराध नियंत्रण का सही समाधान नहीं हो सकता है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कड़े सवाल किए हैं।
❓ क्या है पूरा मामला और क्यों वायरल हो रहा है वीडियो?
सामने आए वायरल वीडियो में रात्रि गश्ती (नाइट पेट्रोलिंग) के दौरान पुलिसकर्मी सड़कों और खुली दुकानों पर मौजूद लोगों को बेरहमी से हटाते हुए और उनपर लाठियां चलाते हुए साफ नजर आ रहे हैं। इस अमानवीय घटना को लेकर बाबूलाल मरांडी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में अपराध पर नियंत्रण रखना बेशक जरूरी है, लेकिन आम नागरिकों को इस तरह सरेआम पीटना किसी भी परिस्थिति में न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे शब्दों में सवाल किया कि आखिर यह किस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई है? पुलिस अपने नकारेपन और नाकामी को छुपाने तथा अपराधियों पर लगाम लगाने के नाम पर आखिरकार आम जनता के ऊपर ही लाठियां क्यों बरसा रही है?
🏛️ ‘यह कार्रवाई लालू-राबड़ी के जंगलराज की याद दिलाती है’ – बाबूलाल मरांडी
बाबूलाल मरांडी ने कड़े शब्दों में हमला बोलते हुए कहा कि जनता को पीटने से कभी भी अपराध का खात्मा नहीं हो सकता। यदि सरकार और प्रशासन को वास्तव में कार्रवाई करनी है, तो उन भ्रष्ट अधिकारियों और अपराधियों से मिलीभगत करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए। अगर ऐसी सख्ती पूरी ईमानदारी से भ्रष्ट तंत्र और अपराधियों पर दिखाई जाए, तो पूरे झारखंड की तस्वीर ही बदल सकती है। उन्होंने आगे यह भी सवाल किया कि क्या सरकार यह चाहती है कि राज्य का आम आदमी सूरज ढलते ही अपने घरों में दुबक कर बैठ जाए? इस तरह की तानाशाही कार्रवाई तो लोगों को पुराने ‘लालू-राबड़ी के जंगलराज’ की याद ताजा करवा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इससे तो बेहतर यही होगा कि पूरे राज्य में शाम चार बजे के बाद औपचारिक रूप से कर्फ्यू ही घोषित कर दिया जाए, ताकि पुलिस को कोयला, बालू और पत्थर के अवैध कारोबार को सुरक्षित तरीके से संरक्षण देने के लिए पूरा समय मिल सके और इस भ्रष्ट तंत्र की अवैध कमाई भी सुचारू रूप से चलती रहे।
🛑 सीता सोरेन ने भी पुलिस की कार्यशैली पर जताई गहरी नाराजगी
इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी और भाजपा नेत्री सीता सोरेन ने भी पुलिस की इस बर्बर कार्यशैली पर अपनी कड़ी आपत्ति और नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा और अपराध नियंत्रण के नाम पर आम नागरिकों के मन में भय या आतंक पैदा करना बिल्कुल नहीं होना चाहिए, बल्कि उनका काम जनता के भीतर सुरक्षा का पुख्ता विश्वास जगाना है। रात्रि गश्ती के नाम पर सड़कों और दुकानों पर शांति से मौजूद आम जनता और मेहनत-मजदूरी करने वालों पर लाठियां बरसाना किसी भी लिहाज से न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस को अपनी मुस्तैदी और सख्ती का प्रदर्शन अपराधियों, भ्रष्ट तत्वों और अवैध धंधेबाजों पर करना चाहिए, न कि दो वक्त की रोटी कमाने वाले आम और गरीब लोगों पर।
🔴 कांग्रेस नेता डॉ. अजय कुमार ने भी पुलिस की कार्रवाई को बताया अमानवीय और बर्बर
इस सनसनीखेज मामले को लेकर केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. अजय कुमार ने पुलिस द्वारा की गई इस कार्रवाई को पूरी तरह से अमानवीय और अत्यंत बर्बर करार दिया है। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर की सड़कों से सामने आया पुलिस का यह अमानवीय चेहरा बेहद विचलित करने वाला और शर्मनाक है।
🛡️ ‘वर्दी का काम जनता में सुरक्षा का भाव जगाना है, खौफ पैदा करना नहीं’ – डॉ. अजय कुमार
डॉ. अजय कुमार ने अपने एक पूर्व आईपीएस अधिकारी के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि उनका हमेशा से यह दृढ़ विश्वास रहा है कि पुलिस की वर्दी का असली काम आम जनता के दिलों में सुरक्षा और भरोसे का भाव पैदा करना होता है, न कि लाठियों और डंडों के बल पर लोगों के मन में खौफ पैदा करना। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध पर लगाम कसने के लिए बहुत से पेशेवर तरीके और कानूनी प्रक्रियाएं निर्धारित हैं, न कि इस प्रकार राह चलते और सामान्य नागरिकों की सरेआम बेरहमी से पिटाई करना। उन्होंने राज्य के तमाम पुलिस उच्च अधिकारियों से जोरदार अनुरोध किया है कि वे इस शर्मनाक घटना का तुरंत स्वतः संज्ञान लें और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
यह खबर आपको कैसी लगी?


झारखण्ड




























