पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती के उबटन से रचे गए भगवान गणेश का सिर जब क्रोधित भगवान शिव ने त्रिशूल से काट दिया था, तब मान्यता के अनुसार उनका वही मूल मानव सिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट के पास स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा में आज भी सुरक्षित रखा हुआ है, जहाँ इसे ‘आदि गणेश’ के रूप में पूजा जाता है.
🪨 2. गुफा के भीतर शिला के रूप में विराजमान हैं ‘आदि गणेश’, ब्रह्मकमल से लगातार गिरती हैं जल की बूंदें
पाताल भुवनेश्वर गुफा के अंदर एक विशेष शिला को भगवान गणेश के कटे हुए मस्तक का प्रतीक माना जाता है. इस आदि गणेश शिला के ठीक ऊपर प्राकृतिक रूप से 108 पंखुड़ियों वाला ब्रह्मकमल स्थित होने की मान्यता है, जिससे निरंतर जल की बूंदें गणेश जी के मस्तक पर गिरती रहती हैं और श्रद्धालु इसे एक अत्यंत दिव्य व पवित्र संरचना मानते हैं.
🔱 3. भगवान शिव खुद करते हैं मस्तक की रक्षा, कलियुग में आदि शंकराचार्य ने की थी इस पवित्र गुफा की खोज
लोकमान्यताओं के अनुसार, स्वयं भगवान शिव पाताल भुवनेश्वर गुफा में गणेश जी के इस कटे हुए सिर की रक्षा करते हैं, जिससे यह स्थल और अधिक रहस्यमयी बन जाता है. धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, कलियुग में इस पवित्र और अद्भुत गुफा की खोज महान संत आदि शंकराचार्य द्वारा की गई थी, जिसके भीतर की प्राकृतिक आकृतियाँ आज भी देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं.
यह खबर आपको कैसी लगी?


धार्मिक




























