उत्तराखंड की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई हैं. हाल ही में उन्होंने एक रोते हुए वीडियो शेयर करते हुए अपने पति गिरधारी लाल साहू पर घरेलू हिंसा, धोखाधड़ी (पहली शादी छिपाने), अवैध संबंध, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और जान से मारने की धमकी के आरोप लगाए थे. वहीं गिरधारी लाल ने भी पत्नी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. इस बीच खबर है कि रेखा आर्य के आरोपों की जांच के लिए 9 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है. अधिकारियों ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या द्वारा अपने पति गिरधारी लाल साहू पर लगाए गए शारीरिक हमले, उत्पीड़न, जातिसूचक टिप्पणियां करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोपों की जांच के लिए 9 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है. पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जया बलोनी के नेतृत्व वाली एक टीम इस मामले की जांच करेगी. बलोनी ने कहा, “इस घटना की जांच के लिए 9 सदस्यीय SIT बनाई गई है. मंत्री के अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद हम जांच शुरू करेंगे और इसे जल्द से जल्द पूरा करेंगे.” गुरुवार शाम को, रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून के कैंट थाना पुलिस स्टेशन में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई. साथ ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने साहू पर शारीरिक हमले, उत्पीड़न, जातिसूचक टिप्पणियां करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया. यह एफआईआर कानून की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई थी, जिसमें ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम’ की तीन धाराएं भी शामिल हैं. अपनी पत्नी के साथ चल रहे इस विवाद के बीच, साहू ने शुक्रवार को एक वीडियो जारी कर मंत्री पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि मंत्री के पास 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति है. उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि किसी उपयुक्त एजेंसी से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए. हालांकि, उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया. उन्होंने आगे दावा किया कि गुरुवार शाम को मंत्री द्वारा शेयर की गई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग पूरी तरह फर्जी थी, जिसे एआई (AI) की मदद से तैयार किया गया था और इसका मुख्य मकसद परिवार के भीतर फूट डालना था. साहू ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताकर खारिज कर दिया और वीडियो के अंत में अपनी पत्नी रेखा आर्या से एफआईआर वापस लेने व अपना बयान बदलने की अपील की. इस बीच, शुक्रवार शाम को राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एक वीडियो बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि अगर आर्या उत्पीड़न का शिकार हुई हैं तो उत्तराखंड की बेटी के तौर पर हमारी पूरी सहानुभूति उनके साथ है. हालांकि, गोदियाल ने मंत्री के पति द्वारा लगाए गए 210 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति जुटाने और स्कूली बच्चों के मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) के राशन में गड़बड़ी करने के आरोपों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि रेखा आर्या और मुख्यमंत्री को इन गंभीर आरोपों पर अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए. गोदियाल ने कहा, “इन गंभीर आरोपों को देखते हुए, और सार्वजनिक मर्यादा बनाए रखने के लिए, मुख्यमंत्री को मंत्री से इस्तीफा लेना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए. एक तरफ अंकिता भंडारी का मामला है और दूसरी तरफ रेखा आर्या का—आखिर यह सब कब तक चलेगा? सरकार को उत्तराखंड में महिलाओं की स्थिति पर जवाब देना चाहिए.”👮♀️ एसपी ग्रामीण जया बलोनी करेंगी एसआईटी (SIT) टीम का नेतृत्व
💰 पति गिरधारी लाल साहू का पलटवार, मंत्री पत्नी पर लगाए 210 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप
🏛️ कांग्रेस का बयान और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग
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उत्तराखंड की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई हैं. हाल ही में उन्होंने एक रोते हुए वीडियो शेयर करते हुए अपने पति गिरधारी लाल साहू पर घरेलू हिंसा, धोखाधड़ी (पहली शादी छिपाने), अवैध संबंध, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और जान से मारने की धमकी के आरोप लगाए थे. वहीं गिरधारी लाल ने भी पत्नी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. इस बीच खबर है कि रेखा आर्य के आरोपों की जांच के लिए 9 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है.
अधिकारियों ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या द्वारा अपने पति गिरधारी लाल साहू पर लगाए गए शारीरिक हमले, उत्पीड़न, जातिसूचक टिप्पणियां करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोपों की जांच के लिए 9 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है.
👮♀️ एसपी ग्रामीण जया बलोनी करेंगी एसआईटी (SIT) टीम का नेतृत्व
पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जया बलोनी के नेतृत्व वाली एक टीम इस मामले की जांच करेगी. बलोनी ने कहा, “इस घटना की जांच के लिए 9 सदस्यीय SIT बनाई गई है. मंत्री के अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद हम जांच शुरू करेंगे और इसे जल्द से जल्द पूरा करेंगे.”
गुरुवार शाम को, रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून के कैंट थाना पुलिस स्टेशन में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई. साथ ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने साहू पर शारीरिक हमले, उत्पीड़न, जातिसूचक टिप्पणियां करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया. यह एफआईआर कानून की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई थी, जिसमें ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम’ की तीन धाराएं भी शामिल हैं.
💰 पति गिरधारी लाल साहू का पलटवार, मंत्री पत्नी पर लगाए 210 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप
अपनी पत्नी के साथ चल रहे इस विवाद के बीच, साहू ने शुक्रवार को एक वीडियो जारी कर मंत्री पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि मंत्री के पास 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति है. उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि किसी उपयुक्त एजेंसी से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए. हालांकि, उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया.
उन्होंने आगे दावा किया कि गुरुवार शाम को मंत्री द्वारा शेयर की गई एक ऑडियो रिकॉर्डिंग पूरी तरह फर्जी थी, जिसे एआई (AI) की मदद से तैयार किया गया था और इसका मुख्य मकसद परिवार के भीतर फूट डालना था. साहू ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताकर खारिज कर दिया और वीडियो के अंत में अपनी पत्नी रेखा आर्या से एफआईआर वापस लेने व अपना बयान बदलने की अपील की.
🏛️ कांग्रेस का बयान और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग
इस बीच, शुक्रवार शाम को राज्य कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एक वीडियो बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि अगर आर्या उत्पीड़न का शिकार हुई हैं तो उत्तराखंड की बेटी के तौर पर हमारी पूरी सहानुभूति उनके साथ है. हालांकि, गोदियाल ने मंत्री के पति द्वारा लगाए गए 210 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति जुटाने और स्कूली बच्चों के मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) के राशन में गड़बड़ी करने के आरोपों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि रेखा आर्या और मुख्यमंत्री को इन गंभीर आरोपों पर अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए.
गोदियाल ने कहा, “इन गंभीर आरोपों को देखते हुए, और सार्वजनिक मर्यादा बनाए रखने के लिए, मुख्यमंत्री को मंत्री से इस्तीफा लेना चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए. एक तरफ अंकिता भंडारी का मामला है और दूसरी तरफ रेखा आर्या का—आखिर यह सब कब तक चलेगा? सरकार को उत्तराखंड में महिलाओं की स्थिति पर जवाब देना चाहिए.”


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