सागर: सागर शहर ही नहीं बल्कि पूरे जिले में अवैध प्लॉटिंग का काला कारोबार इन दिनों जमकर फलफूल रहा है। यह अवैध काम बिना किसी शासकीय अनुमति के और नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर किया जा रहा है। लगातार मिल रही शिकायतों पर कड़ी सख्ती दिखाते हुए जिला कलेक्टर प्रतिभा पाल ने जिले के 12 कॉलोनाइजरों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उनके अवैध निर्माण हटाने, जमीन के खसरे में ‘अहस्तांतरणीय’ दर्ज कराने और संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराने के कड़े निर्देश एसडीएम को दिए हैं। पिछले कुछ दिनों से बीना, रहली और राहतगढ़ क्षेत्रों से अवैध प्लॉटिंग की लगातार शिकायतें कलेक्टर के पास पहुँच रही थीं। इसके बाद कलेक्टर ने सभी संबंधित एसडीएम को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में इस तरह के अवैध हालात न बनने दें। अपना खुद का आशियाना और घर बनाने का सपना पूरा करने के फेर में आम लोग इन शातिर अवैध कॉलोनाइजरों के जाल में फंस जाते हैं। लोगों ने बिना पूरी जाँच-पड़ताल किए ही इन कॉलोनाइजरों से प्लॉट और मकान खरीद लिए हैं। कलेक्टर द्वारा कराई गई प्रशासनिक जाँच में यह बात सामने आई है कि बिना सक्षम अनुमति के अवैध रूप से प्लॉटिंग कर नई कॉलोनियाँ विकसित करने का गोरखधंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने 12 अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर न्यायालय से पारित आदेशों के अनुसार, संबंधित अनावेदकों को अवैध कॉलोनी के सभी चिह्नांकित निर्माणों को खुद हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है। कार्रवाई के निर्देश: तय सीमा में निर्माण न हटाने पर प्रशासनिक अमला खुद निर्माण हटाएगा। इसके साथ ही भूमि के खसरे के कॉलम नंबर 12 में ‘अहस्तांतरणीय’ दर्ज किया जाएगा ताकि उस जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लग सके और सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
पंजीयक को सूची: मध्य प्रदेश नगर पालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 के तहत संबंधित एसडीएम को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि वे उक्त भूमि के क्रय-विक्रय पर रोक लगाने के लिए उप-पंजीयक (Sub-Registrar) कार्यालय को तुरंत सूची भेजें।
आम नागरिकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए प्रशासन ने कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है: सिर्फ रजिस्ट्री के कागजात देखकर ही कभी भी प्लॉट न खरीदें।
जमीन के कानूनी और मालिकाना हक की पूरी जाँच जरूर करें।
विक्रेता से जमीन के मूल दस्तावेज मांगें और शुरुआती मालिकाना हक की पड़ताल करें।
खसरा या प्लॉट नंबर लेकर उसका तहसील कार्यालय में जाकर मिलान अवश्य करें।
यह जरूर देखें कि जमीन मौजूदा विक्रेता के नाम पर विधिवत ट्रांसफर हो चुकी है या नहीं।
यह भी जाँच लें कि उस जमीन पर पहले से किसी प्रकार का बैंक लोन या कर्ज तो नहीं है।
जमीन का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करें और मौके पर जाकर प्लॉट का सही सीमांकन करवाएं।
🏠 बिना पड़ताल के प्लॉट खरीदकर फंसे लोग, बीना और रहली में सबसे ज्यादा मामले
🔨 15 दिन में अवैध निर्माण हटाने का अल्टीमेटम, खसरे में दर्ज होगा ‘अहस्तांतरणीय’
📝 प्लॉट या मकान खरीदने से पहले इन बातों की जरूर करें पड़ताल
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सागर: सागर शहर ही नहीं बल्कि पूरे जिले में अवैध प्लॉटिंग का काला कारोबार इन दिनों जमकर फलफूल रहा है। यह अवैध काम बिना किसी शासकीय अनुमति के और नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर किया जा रहा है। लगातार मिल रही शिकायतों पर कड़ी सख्ती दिखाते हुए जिला कलेक्टर प्रतिभा पाल ने जिले के 12 कॉलोनाइजरों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उनके अवैध निर्माण हटाने, जमीन के खसरे में ‘अहस्तांतरणीय’ दर्ज कराने और संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कराने के कड़े निर्देश एसडीएम को दिए हैं।
🏠 बिना पड़ताल के प्लॉट खरीदकर फंसे लोग, बीना और रहली में सबसे ज्यादा मामले
पिछले कुछ दिनों से बीना, रहली और राहतगढ़ क्षेत्रों से अवैध प्लॉटिंग की लगातार शिकायतें कलेक्टर के पास पहुँच रही थीं। इसके बाद कलेक्टर ने सभी संबंधित एसडीएम को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में इस तरह के अवैध हालात न बनने दें। अपना खुद का आशियाना और घर बनाने का सपना पूरा करने के फेर में आम लोग इन शातिर अवैध कॉलोनाइजरों के जाल में फंस जाते हैं। लोगों ने बिना पूरी जाँच-पड़ताल किए ही इन कॉलोनाइजरों से प्लॉट और मकान खरीद लिए हैं। कलेक्टर द्वारा कराई गई प्रशासनिक जाँच में यह बात सामने आई है कि बिना सक्षम अनुमति के अवैध रूप से प्लॉटिंग कर नई कॉलोनियाँ विकसित करने का गोरखधंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है।
🔨 15 दिन में अवैध निर्माण हटाने का अल्टीमेटम, खसरे में दर्ज होगा ‘अहस्तांतरणीय’
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने 12 अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर न्यायालय से पारित आदेशों के अनुसार, संबंधित अनावेदकों को अवैध कॉलोनी के सभी चिह्नांकित निर्माणों को खुद हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।
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कार्रवाई के निर्देश: तय सीमा में निर्माण न हटाने पर प्रशासनिक अमला खुद निर्माण हटाएगा। इसके साथ ही भूमि के खसरे के कॉलम नंबर 12 में ‘अहस्तांतरणीय’ दर्ज किया जाएगा ताकि उस जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लग सके और सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
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पंजीयक को सूची: मध्य प्रदेश नगर पालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 के तहत संबंधित एसडीएम को यह निर्देश भी दिए गए हैं कि वे उक्त भूमि के क्रय-विक्रय पर रोक लगाने के लिए उप-पंजीयक (Sub-Registrar) कार्यालय को तुरंत सूची भेजें।
📝 प्लॉट या मकान खरीदने से पहले इन बातों की जरूर करें पड़ताल
आम नागरिकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए प्रशासन ने कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
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सिर्फ रजिस्ट्री के कागजात देखकर ही कभी भी प्लॉट न खरीदें।
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जमीन के कानूनी और मालिकाना हक की पूरी जाँच जरूर करें।
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विक्रेता से जमीन के मूल दस्तावेज मांगें और शुरुआती मालिकाना हक की पड़ताल करें।
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खसरा या प्लॉट नंबर लेकर उसका तहसील कार्यालय में जाकर मिलान अवश्य करें।
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यह जरूर देखें कि जमीन मौजूदा विक्रेता के नाम पर विधिवत ट्रांसफर हो चुकी है या नहीं।
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यह भी जाँच लें कि उस जमीन पर पहले से किसी प्रकार का बैंक लोन या कर्ज तो नहीं है।
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जमीन का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करें और मौके पर जाकर प्लॉट का सही सीमांकन करवाएं।


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