रांची (झारखंड): राजधानी में संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए रांची पुलिस ने अपने अधिकारियों व जवानों की फील्ड दक्षता सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाया है।
इसी कड़ी में जिले के थाना प्रभारियों, पुलिस पदाधिकारियों और मुस्तैद रहने वाले टाइगर मोबाइल के जवानों को नियमित रूप से फायरिंग अभ्यास कराया जा रहा है, ताकि किसी भी आकस्मिक घटना या आपात स्थिति में उनकी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और सटीक हथियार संचालन की दक्षता को उच्च स्तर पर बनाए रखा जा सके।
🏟️ जैप-1 ग्राउंड में जवानों ने साधा सटीक निशाना: एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर हुआ सत्र
फायरिंग सत्र और एसएसपी के दिशा-निर्देश:
अभ्यास स्थल: वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रांची राकेश रंजन के निर्देशानुसार, बरियातू स्थित झारखंड सशस्त्र पुलिस-1 (JAP-1) ग्राउंड में इस वृहद फायरिंग अभ्यास का आयोजन किया गया।
प्रतिभागियों का विवरण: इस विशेष अभ्यास सत्र में जिले के विभिन्न थानों के थाना प्रभारी, विवेचना अधिकारी और विशेष रूप से टाइगर मोबाइल में तैनात पुलिस बल शामिल हुआ।
सुरक्षा मानकों का पालन: पुलिसकर्मियों ने निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए छोटे हथियारों (पिस्तौल/रिवॉल्वर आदि) से लक्ष्य पर सटीक निशाना साधने का अभ्यास किया।
एसएसपी का वक्तव्य: एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि इस अभ्यास का प्राथमिक उद्देश्य विपरीत परिस्थितियों में जवानों की निर्णय क्षमता, अनुशासन और आत्मविश्वास को सुदृढ़ बनाना है, ताकि त्वरित कार्रवाई में कोई चूक न हो।
त्वरित पुलिसिंग और मैदानी भूमिका:🏍️ अपराध नियंत्रण की रीढ़ है ‘टाइगर मोबाइल’: क्विक रिस्पांस को धार देने पर विशेष जोर
फर्स्ट रिस्पॉन्डर: रांची शहर के व्यस्त इलाकों, तंग गलियों और प्रमुख चौराहों पर गश्त करने वाली ‘टाइगर मोबाइल’ किसी भी आपराधिक वारदात या आपातकालीन सूचना पर घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाली इकाई है।
दक्षता की आवश्यकता: चूंकि ये जवान सीधे तौर पर अपराधियों के आमने-सामने होते हैं, इसलिए उनका शारीरिक रूप से चुस्त-दुरुस्त रहने के साथ-साथ हथियार चलाने में अत्यंत दक्ष होना अनिवार्य माना गया है।
अभ्यास में व्यापक भागीदारी: इसी रणनीतिक महत्व को देखते हुए फायरिंग अभ्यास सत्र में टाइगर मोबाइल के जवानों की विशेष और सघन भागीदारी सुनिश्चित की गई।
हथियारों के वैज्ञानिक रखरखाव के निर्देश:🛡️ केवल निशानेबाजी नहीं, हथियारों का रखरखाव और सुरक्षा भी अहम: तकनीकी मानकों की हुई जांच
तकनीकी प्रशिक्षण: फायरिंग अभ्यास के दौरान केवल गोली चलाने पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया गया, बल्कि हथियारों के समुचित रखरखाव और सुरक्षा से जुड़े तकनीकी पहलुओं को भी बारीकी से समझाया गया।
जांच प्रक्रिया: जवानों को बताया गया कि फायरिंग से पूर्व और पश्चात हथियारों के आंतरिक पुर्जों, बैरल, ट्रिगर मैकेनिज्म और मैगजीन की स्थिति की जांच करना आवश्यक है, ताकि धूल, जंग या यांत्रिक खराबी के कारण ऐन वक्त पर हथियार जाम न हो।
जिम्मेदारी का बोध: वरिष्ठ अधिकारियों ने जवानों को स्पष्ट संदेश दिया कि हथियार केवल आत्मरक्षा या बल प्रयोग का माध्यम नहीं, बल्कि एक गंभीर विधिक जिम्मेदारी है; इसलिए उसका सुरक्षित और हमेशा कार्यशील स्थिति में रहना अनिवार्य है।
यह खबर आपको कैसी लगी?


झारखण्ड




























