उत्तराखंड में आसमानी आफत का कहर लगातार जारी है। शनिवार देर रात मसूरी-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहाड़ का एक विशाल हिस्सा भरभराकर सड़क पर आ गिरा। इस भीषण भूस्खलन के कारण हाईवे दोनों ओर से पूरी तरह बाधित हो गया है, जिससे बड़ी संख्या में पर्यटक और स्थानीय लोग जाम में फंसे हुए हैं। प्रशासन ने पहले ही भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी थी। फिलहाल, मूसलाधार बारिश और लगातार गिरते मलबे के कारण राहत कार्य में बाधा आ रही है।
⚡ क्यों हो रही है रिकॉर्ड तोड़ बारिश?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तराखंड के ऊपर बेहद जटिल और शक्तिशाली मौसमी प्रणालियां सक्रिय हैं। समुद्र तल से 9.6 किलोमीटर ऊपर तक फैला चक्रवाती परिसंचरण और मानसूनी द्रोणि (Monsoon Trough) का बांग्लादेश तक जाना, इस विनाशकारी बारिश का मुख्य कारण है। साथ ही, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ों पर ठंड बढ़ गई है और अगले 24 से 48 घंटे बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
⚠️ 12 जुलाई: 6 जिलों में अत्यंत भारी बारिश का हाई अलर्ट
मौसम विभाग ने आज यानी 12 जुलाई 2026 के लिए राज्य के 6 संवेदनशील जनपदों—देहरादून, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल और चम्पावत—के लिए अत्यंत भारी वर्षा का ‘हाई अलर्ट’ जारी किया है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और मूसलाधार बारिश की प्रबल संभावना है।
🚨 प्रशासन की सख्त हिदायत
अचानक होने वाली इस मूसलाधार बारिश से पहाड़ी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि:
अति आवश्यक न होने पर पर्वतीय मार्गों पर यात्रा न करें।
नदी-नालों और संवेदनशील ढलानों के पास न जाएं।
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें।
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