मुंबई (महाराष्ट्र): महानगर में ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ऑटो चालकों का आरोप है कि उन्होंने निर्धारित पाठ्यक्रम (सिलेबस) के अनुसार मराठी सीखी है, लेकिन जांच के दौरान उनसे ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं जिनका प्रशिक्षण उन्हें नहीं दिया गया था। इस सख्ती और असमंजस की स्थिति के चलते बड़ी संख्या में चालक परेशान हैं और कई ने कार्रवाई के डर से सड़कों पर ऑटो चलाना तक बंद कर दिया है।
📚 4 दिन की पाठशाला और 15 बुनियादी सवालों का तय सिलेबस
प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम का विवरण:
प्रशिक्षण अवधि: ऑटो चालकों के अनुसार, मराठी भाषा सिखाने के लिए उन्हें चार दिवसीय पाठशाला में प्रतिदिन करीब 4 से 5 घंटे की ट्रेनिंग दी गई।
तय पाठ्यक्रम: यह 15 सवालों का सिलेबस ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री द्वारा मराठी पाठशालाओं, यूनियन कार्यालयों और आरटीओ कार्यालयों को उपलब्ध कराया गया था।
रोजमर्रा के संवाद: पाठ्यक्रम में सामान्य बोलचाल के प्रश्न शामिल थे; जैसे—नाम पूछना, खुले पैसे (छुट्टे) होना, क्यूआर (QR) कोड होना तथा वाहन को निर्धारित गति में चलाना। अधिकांश चालक इन सवालों के उत्तर मराठी में देने में सक्षम हो चुके हैं।
चालकों की आपत्तियां और अनुभव:❓ ‘सिलेबस से बाहर के प्रश्न पूछ रहा आरटीओ’, 20-25 वर्षों से रह रहे चालकों का दर्द
आउट ऑफ सिलेबस सवाल: चालकों का आरोप है कि आरटीओ जांच के दौरान उनसे गांव, परिवार और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से जुड़े अप्रत्याशित सवाल पूछे जा रहे हैं, जिनकी तैयारी उन्हें नहीं कराई गई थी।
स्थानीय मतदाता होने का तर्क: प्रयागराज, वाराणसी, जौनपुर और सुल्तानपुर आदि जिलों से आकर मुंबई में पिछले 20-25 वर्षों से रह रहे चालकों का कहना है कि वे यहीं के मतदाता हैं और मेहनत से आजीविका चला रहे हैं।
नियमों में स्पष्टता की मांग: चालकों ने सवाल उठाया कि चुनाव के समय भाषा की बाध्यता नहीं होती, ऐसे में आजीविका से जुड़े नियमों में पारदर्शिता और निर्धारित सिलेबस का ही पालन होना चाहिए।
यूनियन का रुख और सड़कों पर असर:⚠️ ऑटो यूनियन ने दी आंदोलन की चेतावनी, परमिट जांच के नाम पर सख्ती का आरोप
यूनियन की आपत्ति: ऑटो यूनियन ने चालकों के साथ कथित अनुचित सख्ती पर कड़ा विरोध जताया है और अधिकारियों से तय दायरे में रहने की अपील करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
दस्तावेजों की जांच का मुद्दा: चालकों का यह भी कहना है कि भाषा परीक्षण की आड़ में लाइसेंस, परमिट और चालान को लेकर अतिरिक्त दबाव बनाया जा रहा है।
यातायात पर प्रभाव: कार्रवाई के डर से चालकों द्वारा गाड़ियां खड़ी किए जाने के कारण महानगर के कई इलाकों में यात्रियों को ऑटो की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
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