रायपुर। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से स्मार्ट हमर लैब योजना ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। राजधानी के जिला अस्पताल पंडरी में प्रदेश की पहली हमर लैब में हार्मोनल एनालाइजर, इलेक्ट्रोलाइट एनालाइजर मशीनें न होने की वजह से करीब 20 से अधिक जांच प्रभावित हैं। व्यवस्था को लेकर यहां स्वास्थ्य मंत्री, सचिव समेत आला अधिकारियों ने कई बार दौरे तो किए, लेकिन बुनियादी सुविधाएं बहाल नहीं हो पाईं। नतीजा यह है कि इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीजों को प्राइवेट लैब में जांच करानी पड़ रही है।
जानकारी के मुताबिक, जिला अस्पताल के हमर लैब में हार्मोनल एनालाइजर, इलेक्ट्रोलाइट एनालाइजर मशीनें के लिए वर्ष भर पहले प्रस्ताव भेजा जा चुका है। वहीं इसके लिए कई बार स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा गया है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई है। हार्मोनल एनालाइजर मशीन से थायराइड, विटामिन-डी, विटामिन-बी 12, कैल्शियम समेत 20 से 25 तरह की जाच होती है। वहीं इलेक्ट्रोलाइट मशीन के माध्यम से सोडियम, पोटेशियम जैसी पांच तरह की जांच होती है।
अस्पताल में इस तरह की जांच के लिए 200 से अधिक मरीज आते हैं। सुविधाओं के अभाव में कुछ मजबूरी में प्राइवेट लैब में जांच कराते हैं तो कुछ बिना जांच, इलाज के लौट रहे हैं। लैब कर्मियों ने बताया कि इन जांचों में अलग-अलग शुल्क के आधार पर अधिकतम 3000 रुपये तक खर्च आता है, लेकिन अस्पताल में सुविधाओं के तहत निश्शुल्क व सरकारी दर पर जांच की जाती है।
मैनपावर नहीं, ऑनलाइन सुविधा भी अधर में
स्मार्ट हमर लैब में 20 लैब तकनीशियन की जगह 12 ही कार्य कर रहे हैं। वहीं, लैब असिस्टेंट व अन्य कर्मियों की कमी है। इधर, जांच के लिए आनलाइन पंजीयन और मोबाइल पर रिपोर्ट भेजे जाने की सेवाएं शुरू की जानी थीं, लेकिन आधी-अधूरी सुविधाओं के साथ ही यह सेवा भी मरीजों को नहीं मिल रही है।
वर्जन
जांच मशीन के लिए स्वास्थ्य विभाग को कई बार पत्र लिखा गया है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत गर्भवती महिलाओं के हार्मोनल जांच प्राइवेट लैब में अस्पताल अपने खर्चे पर करा रहा।
-डा. पीके गुप्ता, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल
वर्जन
हार्मोनल जांच की सुविधाएं नहीं होने से समस्या तो आ रही है। स्वास्थ्य विभाग को मशीन उपलब्ध करानी हैं। वहां से मशीनें मिलेंगी, तब सुविधाएं शुरू होंगी।
-डॉ. मीरा बघेल, सीएमएचओ, जिला रायपुर
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