नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में असम की उन ग्रामीण महिलाओं के साहस और दूरदर्शिता की सराहना की, जिन्होंने एक लुप्तप्राय पक्षी ‘हरगिला’ को बचाने का बीड़ा उठाया है। पीएम मोदी ने बताया कि कैसे कभी अपशगुन मानी जाने वाली यह चिड़िया अब असम के गांवों की शान बन गई है।
🤔 क्या है हरगिला चिड़िया का रहस्य?
असमिया भाषा में ‘हर’ का अर्थ हड्डी और ‘गिला’ का अर्थ निगलना होता है। अपनी विशालकाय काया (करीब 1.5 मीटर), गहरे रंग और सड़ी-गली चीजों को खाने की आदत के कारण इस पक्षी को लंबे समय तक अशुभ माना जाता था। लोग अक्सर इनके घोंसले वाले पेड़ों को काट देते थे, जिससे इनकी संख्या तेजी से घटने लगी थी।
👩🔬 पूर्णिमा देवी बर्मन और ‘हरगिला सेना’ का बदलाव
जीवविज्ञानी पूर्णिमा देवी बर्मन ने जब लोगों के मन में इस पक्षी के प्रति डर और गलत धारणाएं देखीं, तो उन्होंने वैज्ञानिक जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। उन्होंने स्थानीय महिलाओं को विज्ञान आधारित तथ्य समझाए और उन्हें इस संरक्षण अभियान से जोड़ा। देखते ही देखते हजारों ग्रामीण महिलाएं इससे जुड़ गईं और उन्हें ‘हरगिला सेना’ के नाम से पहचाना जाने लगा।
💡 जागरूकता से सामाजिक धारणाओं में बदलाव
प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्णिमा देवी बर्मन और उनकी हरगिला सेना ने यह साबित कर दिया है कि यदि समुदाय जागरूक हो और सामूहिक भागीदारी करे, तो न केवल जैव विविधता की रक्षा की जा सकती है, बल्कि सदियों पुरानी कुरीतियों और गलत धारणाओं को भी जड़ से खत्म किया जा सकता है। आज यह पक्षी डर का प्रतीक नहीं, बल्कि असम के गौरवपूर्ण पर्यावरण का हिस्सा है।
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