हैदराबाद: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी भगीरथ को शनिवार रात पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज एक संवेदनशील मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार के दावों के मुताबिक, उनके बेटे ने कानून का सम्मान करते हुए पुलिस के सामने आत्मसमर्पण (सरेंडर) किया है। पुलिस ने शनिवार देर रात भगीरथ की गहन मेडिकल जांच कराई और उसके बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बंदी भगीरथ को 14 दिनों के लिए, यानी 29 मई 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश सुनाया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भगीरथ को हैदराबाद की चेरलापल्ली जेल में शिफ्ट किया जाएगा।
⚖️ वकीलों के जरिए किया स्वेच्छा से सरेंडर: एडवोकेट करुणासागर बोले—हमें देश की न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा
बंदी भगीरथ के कानूनी सलाहकार एडवोकेट करुणासागर ने मामले का ब्योरा देते हुए कहा, “मैंने वरिष्ठ अधिवक्ता एंथोनी रेड्डी के साथ मिलकर शनिवार रात करीब 8:15 बजे टेक पार्क के पास बंदी भगीरथ को आधिकारिक तौर पर पुलिस के हवाले कर दिया था। पुलिस ने कानूनन भगीरथ को अपनी हिरासत में ले लिया। हमने पहले घंटे से ही जांच में पूरा सहयोग किया है और भगीरथ ने अपनी तरफ से सारी आवश्यक जानकारी स्वेच्छा से पुलिस अधिकारियों को दे दी है।” उन्होंने आगे कहा कि हमें देश की निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और हमें पूरा विश्वास है कि हम इन तमाम राजनीतिक व व्यक्तिगत आरोपों से अदालत में बेदाग साबित होकर बरी होंगे।
📋 लुकआउट सर्कुलर जारी होने के बाद बढ़ा दबाव: पीड़िता और उसकी मां का मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज हुआ बयान
इस हाई-प्रोफाइल सरेंडर से पहले दिन में साइबराबाद पुलिस ने काफी आक्रामक रुख अपना रखा था। पुलिस ने भगीरथ के खिलाफ देशव्यापी ‘लुकआउट सर्कुलर’ (Lookout Circular) जारी किया था और पुलिस की कई विशेष विंग्स उसकी तलाश में छापेमारी कर रही थीं। इसी जांच के तहत शनिवार को स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष कथित पीड़िता (17 वर्ष) और उसकी मां, जो इस आपराधिक मामले में मुख्य शिकायतकर्ता हैं, के धारा 164 के तहत बयान दर्ज किए गए थे। दूसरी तरफ, केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए साफ किया कि उन्होंने स्वयं अपने बेटे को पुलिस के सामने पेश होने और जांच में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कहा था।
❌ तेलंगाना हाईकोर्ट से नहीं मिली थी अंतरिम सुरक्षा: अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद बढ़ीं भगीरथ की मुश्किलें
यह पूरा घटनाक्रम तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा भगीरथ को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा (Interim Protection) देने से साफ इनकार करने के ठीक एक दिन बाद सामने आया। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भगीरथ लगातार यह कह रहे हैं कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है और उन्होंने अपने वकीलों के सामने अपने पक्ष में कई डिजिटल सबूत भी पेश किए थे। वकीलों की राय थी कि यह मामला कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है और भगीरथ को नियमित जमानत मिल जाएगी, जिसके कारण आत्मसमर्पण करने में थोड़ी तकनीकी देरी हुई। शुक्रवार रात भगीरथ द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और इस स्तर पर कोई भी राहत देने से मना कर दिया था।
✉️ केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाने की उठी मांग: के. कविता ने पीएम मोदी को पत्र लिख स्वतंत्र जांच की वकालत की
इस बीच, इस मामले को लेकर तेलंगाना की राजनीति में भी उबाल आ गया है। तेलंगाना रक्षा सेना (टीआरएस) की अध्यक्ष के. कविता ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर केंद्रीय मंत्रिमंडल से गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार को तुरंत हटाने की पुरजोर मांग की है। कविता का तर्क है कि जब तक केंद्रीय मंत्री अपने पद पर बने रहेंगे, तब तक उनके बेटे से जुड़े इस गंभीर पॉक्सो मामले में स्थानीय पुलिस द्वारा निष्पक्ष, स्वतंत्र और बिना किसी दबाव के जांच सुनिश्चित कर पाना मुमकिन नहीं होगा।
💰 भगीरथ का प्रति-आरोप, लड़की के परिवार ने की ₹5 करोड़ की मांग: 8 मई को दर्ज हुआ था यौन उत्पीड़न का मामला
उल्लेखनीय है कि भगीरथ के खिलाफ 8 मई को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पॉक्सो अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ था। पीड़िता की मां ने आरोप लगाया था कि भगीरथ का उनकी बेटी के साथ संबंध था और उसने उसका यौन उत्पीड़न किया। हालांकि, भगीरथ ने भी पुलिस में एक प्रति-शिकायत (Cross-Complaint) दर्ज कराई है। भगीरथ का आरोप है कि लड़की और उसके माता-पिता ने एक सुनियोजित साजिश के तहत उस पर शादी करने का अनुचित दबाव डाला। जब उसने इस शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो लड़की के माता-पिता ने कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी और 5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की। भगीरथ ने दावा किया कि डर के मारे उसने शुरू में लड़की के पिता को 50,000 रुपये दिए थे, लेकिन बाद में करोड़ों की मांग और आत्महत्या की धमकी मिलने लगी। फिलहाल, मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के सख्त निर्देशानुसार इस पूरे हाई-प्रोफाइल मामले की कमान एक वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी को सौंपी गई है, जो जांच की निगरानी कर रहे हैं।


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