कोलकाता/नई दिल्ली: उत्तराखंड के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
प्रस्तावित कानून का मसौदा तैयार करने के लिए गठित राज्य की उच्चस्तरीय यूसीसी समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक नई दिल्ली स्थित पश्चिम बंगाल राज्य अतिथिगृह (State Guest House) में आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के लिए समान नागरिक संहिता के कानूनी प्रारूप, आवश्यक प्रावधानों और उसके जमीनी क्रियान्वयन की पूरी रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई।
🌐 पोर्टल और ईमेल के जरिए आम जनता से मांगे जाएंगे सुझाव: अखबारों में जारी होगा विज्ञापन
जनता की भागीदारी और सुझाव प्रक्रिया:
डिजिटल प्लेटफॉर्म: सूत्रों के अनुसार, समिति कानून के निर्माण में आम नागरिकों की राय और सुझावों को भी शामिल करेगी। इसके लिए जल्द ही एक आधिकारिक वेब पोर्टल तैयार किया जा रहा है और विशेष ईमेल आईडी जारी की जाएगी।
समयबद्ध सीमा: समिति इसी महीने प्रमुख समाचार पत्रों में सार्वजनिक विज्ञापन जारी कर नागरिकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करेगी, जिसके लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाएगी।
अंतिम ड्राफ्ट: राज्य सरकार द्वारा समिति के समक्ष रखे गए प्रारंभिक प्रस्ताव को जनता से प्राप्त प्रतिक्रियाओं और समीक्षा के बाद ही अंतिम रूप दिया जाएगा।
जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा और विवाह कानूनों का विलय:🏹 अनुसूचित जनजातियों को मिल सकती है पूर्ण छूट: 13 पुराने मैरिज एक्ट होंगे समाप्त
पारंपरिक रीति-रिवाजों का सम्मान: प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस कानून के दायरे से बाहर रख सकती है, जिससे उनके पारंपरिक व सांस्कृतिक रीति-रिवाजों में कोई प्रशासनिक हस्तक्षेप न हो।
विवाह कानूनों का एकीकरण: प्रस्तावित संहिता के अंतर्गत विभिन्न समुदायों के तहत लागू कम से कम 13 पुराने मैरिज एक्ट्स को समाप्त करके उनकी जगह एक साझा और एकीकृत विवाह अधिनियम लाया जा सकता है।
पारिवारिक मामलों में व्यापक सुधार:⚖️ लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य: बहुविवाह पर रोक और समान उत्तराधिकार नियम
लिव-इन का अनिवार्य पंजीकरण: प्रस्तावित कोड के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पार्टनर्स के लिए अपनी पार्टनरशिप का विधिवत रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य किया जा सकता है। इसका उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान रहेगा।
एक से अधिक निकाह/विवाह पर रोक: बंगाल यूसीसी के तहत बहुविवाह (Polygamy) की प्रथा पर पूर्ण रोक लगाने का प्रस्ताव शामिल किया जा रहा है।
सभी समुदायों के लिए समान अधिकार: नए मसौदे में विवाह, तलाक, भरण-पोषण (गुजारा भत्ता), बच्चों की कस्टडी और पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार से जुड़े नियम सभी धर्मों व समुदायों के नागरिकों के लिए पूरी तरह समान किए जाएंगे।
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