अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की दो दिवसीय अखिल भारतीय पदाधिकारी बैठक अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में सफलतापूर्वक संपन्न हो गई।
2 और 3 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में देशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र हितों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के दौरान छात्रसंघ चुनाव, छात्रावासों (Hostels) की बुनियादी स्थिति, समय पर छात्रवृत्ति का वितरण, आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और संगठन के आगामी अभियानों की रूपरेखा तय की गई। इसके अतिरिक्त, हाल के महीनों में विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों में संपन्न हुए छात्रसंघ चुनावों में अभाविप के प्रदर्शन की समीक्षा की गई तथा कैप्टन स्मित मछार के अदम्य साहस की सराहना करते हुए उन्हें सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित करने की मांग उठाई गई।
🏆 विश्वविद्यालयों में ऐतिहासिक विजय का परचम: PU, DU और हरियाणा में शानदार प्रदर्शन की समीक्षा
हालिया छात्रसंघ चुनावों में संगठन की उपलब्धियों का विस्तृत ब्योरा:
पंजाब विश्वविद्यालय (PU) में इतिहास: संगठन के अनुसार, पंजाब विश्वविद्यालय में 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी छात्र संगठन ने लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जो अभाविप के खाते में आई।
हरियाणा और उत्तराखंड में दबदबा: हरियाणा विश्वविद्यालय में कुल 38 में से 33 सीटों पर जीत हासिल हुई। वहीं उत्तराखंड के 92 कॉलेजों में से 64 में तथा 54 कॉलेजों में अध्यक्ष पद पर परिषद के प्रत्याशियों ने विजय प्राप्त की।
दिल्ली और केरल में परचम: दिल्ली विश्वविद्यालय (DUSU) में अध्यक्ष, सचिव और सह-सचिव पदों पर कब्जा जमाया। केरलम के संस्कृत महाविद्यालय में सभी 14 सीटों पर और गुवाहाटी विश्वविद्यालय में 3 महत्वपूर्ण पदों पर अभाविप की जीत का विशेष उल्लेख किया गया।
छात्र राजनीति और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर संगठन का रुख:🗳️ देशभर के परिसरों में नियमित छात्रसंघ चुनाव बहाल करने पर जोर: लोकतांत्रिक भागीदारी को बताया जरूरी
चुनाव बहाली की मांग: अभाविप ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों से मांग की कि देश के प्रत्येक राज्य और कॉलेज परिसर में नियमित छात्रसंघ चुनाव तुरंत बहाल किए जाएं।
प्रतिनिधित्व का माध्यम: संगठन का स्पष्ट मत है कि छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों के भीतर लोकतांत्रिक चेतना, नेतृत्व क्षमता और उनके संवैधानिक प्रतिनिधित्व को सुदृढ़ करने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।
छात्रों की आवाज: नियमित चुनावों से परिसरों में पारदर्शी व्यवस्था कायम होती है और आम छात्रों की समस्याओं का त्वरित समाधान संभव होता है।
पूर्वोत्तर भारत और शेष देश के छात्रों के बीच संवाद की कार्ययोजना:🤝 SEIL@60 और पूर्वोत्तर संपर्क अभियान: राष्ट्रीय एकात्मता को और अधिक मजबूत करने का संकल्प
SEIL के 60 वर्ष: बैठक में SEIL (स्टूडेंट्स एक्सपीरियंस इन इंटर-स्टेट लिविंग) के 60 वर्ष पूरे होने पर ‘SEIL@60’ और विशेष ‘SEIL यात्रा’ के माध्यम से पूर्वोत्तर और देश के अन्य राज्यों के विद्यार्थियों के बीच आत्मीय संवाद बढ़ाने की योजना बनी।
छह दशकों का समर्पण: अभाविप ने रेखांकित किया कि पूर्वोत्तर भारत में राष्ट्रीय एकात्मता और सांस्कृतिक समन्वय स्थापित करने का यह कार्य संगठन द्वारा पिछले छह दशकों से निरंतर किया जा रहा है।
प्रमुख आगामी आयोजन: इसके अलावा आगामी 72वें राष्ट्रीय अधिवेशन, सदस्यता अभियान-2026, जनजातीय विद्यार्थी कार्य, संत शिरोमणि रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष, श्री गुरु तेगबहादुर जी के बलिदान के 350 वर्ष, आपातकाल विरोधी आंदोलन के 50 वर्ष और प्रा. यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार को लेकर कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
संगठनात्मक नेतृत्व का संदेश और भविष्य की दिशा:🌟 ईटानगर में पहली बार आयोजित हुई राष्ट्रीय बैठक: राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी का संबोधन
ऐतिहासिक आयोजन: ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने बताया कि ईटानगर में पहली बार अखिल भारतीय स्तर की पदाधिकारी बैठक का आयोजन हुआ है, जो अपने आप में ऐतिहासिक है।
पूर्वोत्तर में युवाओं की भूमिका: उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में छात्र शक्ति को सकारात्मक दिशा देने और राष्ट्रीय एकात्मता के भाव को सुदृढ़ करने में SEIL की भूमिका मील का पत्थर साबित हो रही है।
लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान: डॉ. सोलंकी ने छात्रसंघ चुनावों में मिली शानदार सफलता को युवाओं के विश्वास से जोड़ते हुए दोहराया कि देश के प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का लोकतांत्रिक अवसर अवश्य मिलना चाहिए।
यह खबर आपको कैसी लगी?


गुजरात




























