फ्रांस में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं. शनिवार को देशभर में करीब 5.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे. गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, राजधानी पेरिस में 1.10 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया. हालांकि, प्रदर्शन आयोजित करने वालों ने इससे भी ज्यादा लोगों के शामिल होने का दावा किया. पेरिस में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. रेनेस, लियोन और मार्सिले में भी प्रदर्शन हुए. प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग ऐतिहासिक मूर्तियों पर चढ़ गए. कई जगह आग लगाई गई. लिली और मार्सिले में प्रदर्शनकारियों के सरकारी इमारतों में घुसने की खबरें भी सामने आईं. पेरिस में 36 साल की पॉलीन ने सीएनएन से कहा कि देश में दौलत और सत्ता कुछ लोगों के हाथों में जमा हो रही है. उन्होंने युवाओं के समर्थन में प्रदर्शन करने की बात कही. 38 साल की लुईस ने कहा कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के शासन में लोकतंत्र कमजोर हुआ है. उनके मुताबिक, कुछ अरबपति मीडिया को नियंत्रित करते हैं. फ्रांस में पिछले महीने भी छात्रों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे. अब यह आंदोलन सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया है. प्रदर्शनकारी स्कूलों की खराब हालत, बढ़ती महंगाई और सरकार की निष्क्रियता से नाराज हैं. इससे पहले छात्रों ने कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या कम करने, शिक्षकों पर खर्च बढ़ाने और जलवायु संकट का सामना करने लायक स्कूलों का बुनियादी ढांचा बनाने की मांग की थी. उन्होंने युवाओं के खिलाफ पुलिस हिंसा रोकने की भी मांग की. पिछले 15 साल में फ्रांस में जन्मदर बढ़ने और शिक्षा के लिए धन में कटौती के कारण स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ गई, लेकिन शिक्षकों की संख्या कम हो गई. शिक्षा मंत्री एडुआर जफ्रे ने हाल के हफ्तों में छात्रों से कई बार मुलाकात की है, लेकिन अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है. शनिवार को प्रदर्शन खत्म होने के बाद पेरिस में कुछ युवाओं ने दुकानों में लूटपाट की और आग लगाई. पुलिस ने जवाब में आंसू गैस छोड़ी और लाठियां चलाईं. इस दौरान 1000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. राष्ट्रपति मैक्रों ने उपद्रव करने वालों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि पुलिस थानों, सरकारी कार्यालयों और दुकानों पर हमला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें सजा दी जाएगी. पेरिस पुलिस ने भी कहा कि वह उपद्रवियों के सामने पीछे नहीं हटेगी. हालांकि, पुलिस की सख्ती को लेकर भी सवाल उठे हैं. हफ्ते की शुरुआत में पुलिस कार्रवाई के दौरान एक 14 साल के लड़के का जबड़ा टूट गया था. उत्तर-पश्चिमी शहर अलेंकॉन में एक पुलिसकर्मी को लड़की की गर्दन पकड़ते हुए कैमरे में भी देखा गया, जबकि कानून के तहत इस तरह की कार्रवाई पर रोक है.🎒 स्कूलों की खस्ता हालत, बढ़ती महंगाई और सरकारी नीतियों से नाराज युवा
👮♂️ पुलिस की सख्त कार्रवाई और 1000 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी
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फ्रांस में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं. शनिवार को देशभर में करीब 5.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे. गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, राजधानी पेरिस में 1.10 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया. हालांकि, प्रदर्शन आयोजित करने वालों ने इससे भी ज्यादा लोगों के शामिल होने का दावा किया. पेरिस में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. रेनेस, लियोन और मार्सिले में भी प्रदर्शन हुए.
प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग ऐतिहासिक मूर्तियों पर चढ़ गए. कई जगह आग लगाई गई. लिली और मार्सिले में प्रदर्शनकारियों के सरकारी इमारतों में घुसने की खबरें भी सामने आईं. पेरिस में 36 साल की पॉलीन ने सीएनएन से कहा कि देश में दौलत और सत्ता कुछ लोगों के हाथों में जमा हो रही है. उन्होंने युवाओं के समर्थन में प्रदर्शन करने की बात कही. 38 साल की लुईस ने कहा कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के शासन में लोकतंत्र कमजोर हुआ है. उनके मुताबिक, कुछ अरबपति मीडिया को नियंत्रित करते हैं.
🎒 स्कूलों की खस्ता हालत, बढ़ती महंगाई और सरकारी नीतियों से नाराज युवा
फ्रांस में पिछले महीने भी छात्रों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे. अब यह आंदोलन सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध में बदल गया है. प्रदर्शनकारी स्कूलों की खराब हालत, बढ़ती महंगाई और सरकार की निष्क्रियता से नाराज हैं. इससे पहले छात्रों ने कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या कम करने, शिक्षकों पर खर्च बढ़ाने और जलवायु संकट का सामना करने लायक स्कूलों का बुनियादी ढांचा बनाने की मांग की थी. उन्होंने युवाओं के खिलाफ पुलिस हिंसा रोकने की भी मांग की.
पिछले 15 साल में फ्रांस में जन्मदर बढ़ने और शिक्षा के लिए धन में कटौती के कारण स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ गई, लेकिन शिक्षकों की संख्या कम हो गई. शिक्षा मंत्री एडुआर जफ्रे ने हाल के हफ्तों में छात्रों से कई बार मुलाकात की है, लेकिन अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है.
👮♂️ पुलिस की सख्त कार्रवाई और 1000 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी
शनिवार को प्रदर्शन खत्म होने के बाद पेरिस में कुछ युवाओं ने दुकानों में लूटपाट की और आग लगाई. पुलिस ने जवाब में आंसू गैस छोड़ी और लाठियां चलाईं. इस दौरान 1000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. राष्ट्रपति मैक्रों ने उपद्रव करने वालों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि पुलिस थानों, सरकारी कार्यालयों और दुकानों पर हमला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उन्हें सजा दी जाएगी.
पेरिस पुलिस ने भी कहा कि वह उपद्रवियों के सामने पीछे नहीं हटेगी. हालांकि, पुलिस की सख्ती को लेकर भी सवाल उठे हैं. हफ्ते की शुरुआत में पुलिस कार्रवाई के दौरान एक 14 साल के लड़के का जबड़ा टूट गया था. उत्तर-पश्चिमी शहर अलेंकॉन में एक पुलिसकर्मी को लड़की की गर्दन पकड़ते हुए कैमरे में भी देखा गया, जबकि कानून के तहत इस तरह की कार्रवाई पर रोक है.


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