फ्लाई दुबई के विमान में भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर हमला करने वाले को-पायलट को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और नई जानकारी सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की जांच के मुताबिक, 29 साल का ओमानी को-पायलट इजराइल के तेल अवीव स्थित बेन गुरियन एयरपोर्ट पर विमान को क्रैश करना चाहता था। उसका मुख्य मकसद अमेरिका में हुए खौफनाक 9/11 जैसे आतंकी हमले को दोहराना और विमान में सवार ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान लेना था।
👥 कॉकपिट में हुआ संघर्ष, यात्रियों ने दबोचा हमलावर
घटना के वक्त विमान में 170 से ज्यादा यात्री सवार थे, जिनमें से ज्यादातर इजराइली नागरिक थे। को-पायलट ने अचानक कुल्हाड़ी से कैप्टन पर जानलेवा हमला कर दिया और विमान को नीचे गिराने की कोशिश की।
हालांकि, कैप्टन स्मित ने सूझबूझ दिखाते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद विमान में मौजूद यात्रियों ने तुरंत हमलावर को दबोच लिया।
इसके बाद विमान के अन्य पायलटों ने मोर्चा संभालते हुए सुरक्षित उड़ान जारी रखी और सऊदी अरब के एक एयरपोर्ट पर विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई।
यूएई के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शम्सी के अनुसार, यह को-पायलट करीब 10 साल पहले ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान कट्टरपंथी विचारों के संपर्क में आया था। ‘न्यूजर्सी टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावर हम्माम अल-हम्मामी ने 2015 से 2017 तक मेलबर्न के रॉयल मेलबर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RMIT) में पढ़ाई की थी, हालांकि उसने इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी नहीं की थी। जांच में सामने आया कि वह आतंकवादी संगठनों और आत्मघाती हमलों का समर्थन करने वाली किताबें और ऑनलाइन सामग्री देखने लगा था। उसे मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े समूहों का समर्थन मिलने की बात भी कही जा रही है।🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान कैसे कट्टरपंथी बना?
🛫 साजिश के तहत बना था पायलट और सुरक्षा जांच पर सवाल
जांचकर्ताओं के मुताबिक, को-पायलट ने यह स्वीकार किया कि विमान से हमला करने की उसकी योजना उसके पायलट बनने के फैसले से ही जुड़ी हुई थी। उसने जनवरी 2026 में फ्लाईदुबई ज्वाइन किया था, और इससे पहले वह चार साल ओमान एयर तथा कुछ समय मोरक्को की रॉयल एयर मारोक में काम कर चुका था। तेल अवीव की उड़ानों के दौरान उसने रास्ते की पूरी जानकारी जुटाई थी।
सुरक्षा जांच पर सवाल: यूएई प्रशासन का कहना है कि नौकरी से पहले उसने सभी जरूरी सुरक्षा जांच पास की थीं और अच्छा आचरण होने का सर्टिफिकेट भी दिया था, जिससे उसके नापाक इरादों का पहले पता नहीं चल सका। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ओमान के अधिकारियों द्वारा उसके कट्टरपंथी इतिहास की जानकारी होने के बावजूद उसे इतने संवेदनशील रूट पर विमान उड़ाने की अनुमति कैसे मिल गई?
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