रांची: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनवादी) यानी सीपीआई (माले) की प्रमुख छात्र इकाई ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) का 11वां अखिल भारतीय राष्ट्रीय सम्मेलन आगामी 28 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक महाराष्ट्र के नागपुर शहर में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। इस आगामी राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों के सिलसिले में शनिवार को राजधानी रांची में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसके दौरान आयोजन से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां मीडिया के साथ साझा की गईं। इस दौरान वक्ताओं ने सम्मेलन के मुख्य उद्देश्यों, देश भर के छात्र-युवाओं के बीच चल रहे विभिन्न संघर्षों तथा झारखंड राज्य के भीतर आइसा की संगठनात्मक और आंदोलनात्मक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान ‘GEN-Z के नए हिंदुस्तान’ के निर्माण के मजबूत आह्वान के साथ इस राष्ट्रीय सम्मेलन के आधिकारिक पोस्टर का भी विधिवत लोकार्पण किया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आइसा की झारखंड राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पादीप ने कहा कि आज देश का संपूर्ण छात्र-युवा वर्ग गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा, रोजगार के पुख्ता अवसरों तथा पूरी तरह पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर लगातार सड़कों पर उतरकर संघर्ष करने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा के तेजी से हो रहे निजीकरण, शैक्षणिक संस्थानों की दयनीय और बदहाल स्थिति तथा लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं व भर्ती परीक्षाओं में हो रही भारी धांधली के खिलाफ मुखर हो रही आवाजों को एक मजबूत मंच प्रदान करने और उन्हें एक व्यापक छात्र आंदोलन की दिशा देने में आइसा हमेशा से अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। आइसा की राज्य अध्यक्ष ने अपने संबोधन में आगे कहा कि चाहे राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा में हुए पेपर लीक के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन हो, अथवा झारखंड में रांची स्थित ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा टर्फ ग्राउंड से उठी जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में हुई धांधली व भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष की हुंकार हो, आइसा ने हर मोर्चे पर छात्र वर्ग के लोकतांत्रिक और शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी दृढ़ता के साथ लड़ाई लड़ी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आइसा की स्पष्ट वैचारिक सोच यह है कि शिक्षा समाज के किसी भी वर्ग के लिए कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का एक मौलिक और बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार होना चाहिए। विभा पुष्पादीप ने कहा कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी मांग यह है कि देश के सभी छात्र-युवा अपनी असीम ऊर्जा, आकांक्षाओं और संघर्षों को एक सूत्र में पिरोते हुए एक ऐसे ‘नए हिंदुस्तान’ के निर्माण की दिशा में आगे कदम बढ़ाएं, जहां हर नागरिक को शिक्षा, पक्के रोजगार, सामाजिक समानता, वास्तविक लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की पूरी गारंटी मिल सके। इसी व्यापक और दूरगामी संकल्प को ध्यान में रखते हुए आगामी 28 से 30 नवंबर को महाराष्ट्र के नागपुर में आइसा का यह 11वां अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है, जो छात्र राजनीति में एक नया मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन की तैयारियों और सांगठनिक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ ने जानकारी दी कि झारखंड के विभिन्न जिलों में इस राष्ट्रीय सम्मेलन की सफलता को लेकर बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। राज्य के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्थानीय इकाइयों में जिला सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही, संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत व धारदार बनाने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों में नई संयोजन समितियों का गठन भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य प्रयास यह है कि झारखंड के अधिक से अधिक छात्र-युवाओं को शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की इस लंबी लड़ाई से जोड़ते हुए नागपुर के इस राष्ट्रीय सम्मेलन को ऐतिहासिक और बेहद व्यापक बनाया जाए। रांची में आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आइसा की राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पादीप, राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ, राज्य उपाध्यक्ष विजय कुमार, राज्य सह सचिव रितेश मिश्रा के अलावा मो. समी, सोनाली केवट और निखिल राज समेत संगठन के कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता पूरी सक्रियता के साथ उपस्थित रहे।राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पादीप का बयान, बोलीं— शिक्षा, रोजगार और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहा है आज का युवा
छात्रों के लोकतांत्रिक और शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर डटा रहा है संगठन
नए भारत के निर्माण का संकल्प, जहां शिक्षा, रोजगार, समानता और सामाजिक न्याय की हो पक्की गारंटी
झारखंड के जिलों और विश्वविद्यालयों में चलाया जा रहा है व्यापक सदस्यता अभियान, बोले राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई प्रमुख छात्र नेता रहे मौजूद, आयोजन को सफल बनाने का लिया गया संकल्प
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रांची: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनवादी) यानी सीपीआई (माले) की प्रमुख छात्र इकाई ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन’ (आइसा) का 11वां अखिल भारतीय राष्ट्रीय सम्मेलन आगामी 28 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक महाराष्ट्र के नागपुर शहर में भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। इस आगामी राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों के सिलसिले में शनिवार को राजधानी रांची में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसके दौरान आयोजन से जुड़ी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां मीडिया के साथ साझा की गईं। इस दौरान वक्ताओं ने सम्मेलन के मुख्य उद्देश्यों, देश भर के छात्र-युवाओं के बीच चल रहे विभिन्न संघर्षों तथा झारखंड राज्य के भीतर आइसा की संगठनात्मक और आंदोलनात्मक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान ‘GEN-Z के नए हिंदुस्तान’ के निर्माण के मजबूत आह्वान के साथ इस राष्ट्रीय सम्मेलन के आधिकारिक पोस्टर का भी विधिवत लोकार्पण किया गया।
राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पादीप का बयान, बोलीं— शिक्षा, रोजगार और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहा है आज का युवा
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आइसा की झारखंड राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पादीप ने कहा कि आज देश का संपूर्ण छात्र-युवा वर्ग गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा, रोजगार के पुख्ता अवसरों तथा पूरी तरह पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर लगातार सड़कों पर उतरकर संघर्ष करने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा के तेजी से हो रहे निजीकरण, शैक्षणिक संस्थानों की दयनीय और बदहाल स्थिति तथा लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं व भर्ती परीक्षाओं में हो रही भारी धांधली के खिलाफ मुखर हो रही आवाजों को एक मजबूत मंच प्रदान करने और उन्हें एक व्यापक छात्र आंदोलन की दिशा देने में आइसा हमेशा से अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।
छात्रों के लोकतांत्रिक और शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर मोर्चे पर डटा रहा है संगठन
आइसा की राज्य अध्यक्ष ने अपने संबोधन में आगे कहा कि चाहे राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा में हुए पेपर लीक के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन हो, अथवा झारखंड में रांची स्थित ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा टर्फ ग्राउंड से उठी जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में हुई धांधली व भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष की हुंकार हो, आइसा ने हर मोर्चे पर छात्र वर्ग के लोकतांत्रिक और शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी दृढ़ता के साथ लड़ाई लड़ी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आइसा की स्पष्ट वैचारिक सोच यह है कि शिक्षा समाज के किसी भी वर्ग के लिए कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का एक मौलिक और बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार होना चाहिए।
नए भारत के निर्माण का संकल्प, जहां शिक्षा, रोजगार, समानता और सामाजिक न्याय की हो पक्की गारंटी
विभा पुष्पादीप ने कहा कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी मांग यह है कि देश के सभी छात्र-युवा अपनी असीम ऊर्जा, आकांक्षाओं और संघर्षों को एक सूत्र में पिरोते हुए एक ऐसे ‘नए हिंदुस्तान’ के निर्माण की दिशा में आगे कदम बढ़ाएं, जहां हर नागरिक को शिक्षा, पक्के रोजगार, सामाजिक समानता, वास्तविक लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की पूरी गारंटी मिल सके। इसी व्यापक और दूरगामी संकल्प को ध्यान में रखते हुए आगामी 28 से 30 नवंबर को महाराष्ट्र के नागपुर में आइसा का यह 11वां अखिल भारतीय सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है, जो छात्र राजनीति में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
झारखंड के जिलों और विश्वविद्यालयों में चलाया जा रहा है व्यापक सदस्यता अभियान, बोले राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ
सम्मेलन की तैयारियों और सांगठनिक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ ने जानकारी दी कि झारखंड के विभिन्न जिलों में इस राष्ट्रीय सम्मेलन की सफलता को लेकर बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। राज्य के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्थानीय इकाइयों में जिला सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही, संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत व धारदार बनाने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों में नई संयोजन समितियों का गठन भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य प्रयास यह है कि झारखंड के अधिक से अधिक छात्र-युवाओं को शिक्षा, रोजगार, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की इस लंबी लड़ाई से जोड़ते हुए नागपुर के इस राष्ट्रीय सम्मेलन को ऐतिहासिक और बेहद व्यापक बनाया जाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई प्रमुख छात्र नेता रहे मौजूद, आयोजन को सफल बनाने का लिया गया संकल्प
रांची में आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आइसा की राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पादीप, राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ, राज्य उपाध्यक्ष विजय कुमार, राज्य सह सचिव रितेश मिश्रा के अलावा मो. समी, सोनाली केवट और निखिल राज समेत संगठन के कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता पूरी सक्रियता के साथ उपस्थित रहे।


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