देवघर: झारखंड की प्रसिद्ध बाबा नगरी देवघर में सरकारी गोदाम से लगभग 22 हजार क्विंटल अनाज के रहस्यमयी तरीके से गायब होने का गंभीर मामला अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। इस बड़े खाद्यान्न घोटाले के उजागर होने के बाद जिला प्रशासन के खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा स्थानीय थाने में प्राथमिकी (FIR) तो दर्ज करा दी गई है, लेकिन विडंबना यह है कि अब तक इस मामले में किसी भी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी या कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आ पाई है, जिससे लोगों में रोष व्याप्त है। इस पूरे सनसनीखेज प्रकरण का सबसे बुरा और सीधा असर जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की व्यवस्था पर पड़ता दिखाई दे रहा है। वर्तमान स्थिति यह बन चुकी है कि सितंबर और अक्टूबर महीने का नियमित राशन वितरण पूरी तरह से बाधित हो गया है, जिसके कारण जिले के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों के कार्डधारियों को अपने हक के सरकारी राशन के लिए दुकानों के लगातार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यह पूरा मामला देवघर स्थित बाजार समिति के समीप बने राज्य सरकार के झारखंड स्टेट फूड कॉरपोरेशन (SFC) के गोदाम से जुड़ा हुआ है, जहाँ से बड़े पैमाने पर लगभग 22 हजार क्विंटल अनाज के गायब होने की बात सामने आई थी। इस गंभीर अनियमितता के प्रकाश में आने के बाद खाद्य आपूर्ति विभाग ने तत्काल कड़ा संज्ञान लेते हुए आधिकारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसकी जांच अभी भी जारी है। पीडीएस दुकानदार संघ के अध्यक्ष अभय चंद्र झा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि गोदाम में अचानक अनाज का भारी स्टॉक कम होने के कारण सितंबर और अक्टूबर महीने का खाद्यान्न वितरण बुरी तरह अनियमित हो गया है। देवघर प्रखंड, मोहनपुर प्रखंड तथा देवघर नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई जन वितरण प्रणाली दुकानदारों तक निर्धारित कोटे के अनुसार पर्याप्त अनाज नहीं पहुँच पाया है, जिसकी वजह से दुकानदार भी समय पर अपने कार्डधारियों को राशन मुहैया कराने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि राशन प्राप्त करने की उम्मीद से दूर-दराज से पीडीएस दुकानों तक पहुंचने वाले गरीब और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को कई बार मायूस होकर खाली हाथ अपने घर लौटना पड़ रहा है। लगातार पर्याप्त मात्रा में अनाज की उपलब्धता न हो पाने के कारण अब आम कार्डधारियों और स्थानीय दुकानदारों के बीच तीखी नाराजगी भी खुलकर सामने आने लगी है। पीडीएस दुकानदार संघ के अध्यक्ष अभय चंद्र झा ने बताया कि अनाज के इस बड़े संकट को लेकर विभाग के तमाम उच्च अधिकारियों को जमीनी हकीकत से अवगत करा दिया गया है। संघ की तरफ से यह पुरजोर मांग रखी गई है कि सरकार सितंबर और अक्टूबर महीने के बकाया खाद्यान्न की आपूर्ति थोड़ा-थोड़ा करके ही सही, लेकिन निर्धारित मासिक कोटे के आधार पर तुरंत सुनिश्चित करे, ताकि कतार में खड़े कार्डधारियों को उनका हक मिल सके। देवघर जिले के भीतर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से व्यापक स्तर पर खाद्यान्न का वितरण किया जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरे जिले में कुल 970 जन वितरण प्रणाली की दुकानें सुचारू रूप से संचालित होती हैं। केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के तहत यहाँ केवल लाल कार्डधारियों के लिए ही लगभग 61 हजार 447 क्विंटल चावल की मासिक खपत होती है। इसके अलावा, राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीन कार्ड योजना के अंतर्गत भी लगभग 6 हजार 409 क्विंटल अनाज का वितरण किया जाता है। इस प्रकार पूरे जिले में दोनों प्रमुख योजनाओं को मिलाकर हर महीने औसतन लगभग 67 हजार 856 क्विंटल यानी करीब 68 हजार क्विंटल खाद्यान्न की भारी आवश्यकता रहती है। ऐसे में, एसएफसी गोदाम से अचानक 22 हजार क्विंटल अनाज का गायब होना जिले की पूरी आपूर्ति व्यवस्था के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर गया है। इस पूरे गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी प्रीति लता किस्कू ने बताया कि गोदाम से अचानक खाद्यान्न गायब होने के कारण जन वितरण प्रणाली की व्यवस्था पर प्रतिकूल असर जरूर पड़ा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और जिला खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से इस असंतुलन को दूर करने तथा खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को जल्द से जल्द पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ, पूरी तरह से सरकारी राशन और अनुदानित अनाज पर निर्भर रहने वाले गरीब और विपन्न परिवारों के सामने अपनी आजीविका और घरेलू जरूरतों को पूरा करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। राशन की दुकान तक पहुंचने के बाद भी कोटे का अनाज हाथ न लगने से कार्डधारियों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। जरूरतमंद लाभुकों का कहना है कि सरकार द्वारा मिलने वाला यह राशन उनके परिवार के भरण-पोषण का सबसे बड़ा और मुख्य सहारा है, और ऐसे समय पर राशन न मिलने से उनके समक्ष भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो रही है। फिलहाल, सरकारी गोदाम से अनाज के गायब होने का यह बहुचर्चित मामला जांच के कानूनी दायरे में आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसका सीधा और भारी खामियाजा उन आम परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जो हर महीने सिर्फ सरकारी राशन की उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं।सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर पड़ रहा है सीधा असर, कई इलाकों में कार्डधारियों को राशन के लिए लगाने पड़ रहे हैं चक्कर
बाजार समिति स्थित एसएफसी गोदाम से जुड़ा है मामला, खाद्य आपूर्ति विभाग ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी
पीडीएस दुकानदार संघ के अध्यक्ष अभय चंद्र झा का बयान, कहा— देवघर प्रखंड और नगर निगम क्षेत्र में आपूर्ति हुई है प्रभावित
दुकानों से खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं आम लोग, कार्डधारियों और दुकानदारों के बीच बढ़ रही है नाराजगी
बकाया खाद्यान्न की आपूर्ति सुचारू करने और वितरण अवधि बढ़ाने की मांग, उच्च अधिकारियों को दी गई स्थिति की जानकारी
जिले में हर महीने होती है लगभग 68 हजार क्विंटल अनाज की खपत, 970 राशन दुकानें हैं संचालित
प्रशासनिक दावा— व्यवस्था को जल्द से जल्द पटरी पर लाने और स्थिति सामान्य करने के लिए किए जा रहे हैं प्रयास
गरीब लाभुकों का बड़ा सवाल— आखिर कब मिलेगा उन्हें उनके हिस्से का पूरा राशन और राहत?
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देवघर: झारखंड की प्रसिद्ध बाबा नगरी देवघर में सरकारी गोदाम से लगभग 22 हजार क्विंटल अनाज के रहस्यमयी तरीके से गायब होने का गंभीर मामला अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। इस बड़े खाद्यान्न घोटाले के उजागर होने के बाद जिला प्रशासन के खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा स्थानीय थाने में प्राथमिकी (FIR) तो दर्ज करा दी गई है, लेकिन विडंबना यह है कि अब तक इस मामले में किसी भी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी या कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आ पाई है, जिससे लोगों में रोष व्याप्त है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर पड़ रहा है सीधा असर, कई इलाकों में कार्डधारियों को राशन के लिए लगाने पड़ रहे हैं चक्कर
इस पूरे सनसनीखेज प्रकरण का सबसे बुरा और सीधा असर जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की व्यवस्था पर पड़ता दिखाई दे रहा है। वर्तमान स्थिति यह बन चुकी है कि सितंबर और अक्टूबर महीने का नियमित राशन वितरण पूरी तरह से बाधित हो गया है, जिसके कारण जिले के कई ग्रामीण और शहरी इलाकों के कार्डधारियों को अपने हक के सरकारी राशन के लिए दुकानों के लगातार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
बाजार समिति स्थित एसएफसी गोदाम से जुड़ा है मामला, खाद्य आपूर्ति विभाग ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी
यह पूरा मामला देवघर स्थित बाजार समिति के समीप बने राज्य सरकार के झारखंड स्टेट फूड कॉरपोरेशन (SFC) के गोदाम से जुड़ा हुआ है, जहाँ से बड़े पैमाने पर लगभग 22 हजार क्विंटल अनाज के गायब होने की बात सामने आई थी। इस गंभीर अनियमितता के प्रकाश में आने के बाद खाद्य आपूर्ति विभाग ने तत्काल कड़ा संज्ञान लेते हुए आधिकारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसकी जांच अभी भी जारी है।
पीडीएस दुकानदार संघ के अध्यक्ष अभय चंद्र झा का बयान, कहा— देवघर प्रखंड और नगर निगम क्षेत्र में आपूर्ति हुई है प्रभावित
पीडीएस दुकानदार संघ के अध्यक्ष अभय चंद्र झा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि गोदाम में अचानक अनाज का भारी स्टॉक कम होने के कारण सितंबर और अक्टूबर महीने का खाद्यान्न वितरण बुरी तरह अनियमित हो गया है। देवघर प्रखंड, मोहनपुर प्रखंड तथा देवघर नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई जन वितरण प्रणाली दुकानदारों तक निर्धारित कोटे के अनुसार पर्याप्त अनाज नहीं पहुँच पाया है, जिसकी वजह से दुकानदार भी समय पर अपने कार्डधारियों को राशन मुहैया कराने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे हैं।
दुकानों से खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं आम लोग, कार्डधारियों और दुकानदारों के बीच बढ़ रही है नाराजगी
स्थिति यह हो गई है कि राशन प्राप्त करने की उम्मीद से दूर-दराज से पीडीएस दुकानों तक पहुंचने वाले गरीब और जरूरतमंद उपभोक्ताओं को कई बार मायूस होकर खाली हाथ अपने घर लौटना पड़ रहा है। लगातार पर्याप्त मात्रा में अनाज की उपलब्धता न हो पाने के कारण अब आम कार्डधारियों और स्थानीय दुकानदारों के बीच तीखी नाराजगी भी खुलकर सामने आने लगी है।
बकाया खाद्यान्न की आपूर्ति सुचारू करने और वितरण अवधि बढ़ाने की मांग, उच्च अधिकारियों को दी गई स्थिति की जानकारी
पीडीएस दुकानदार संघ के अध्यक्ष अभय चंद्र झा ने बताया कि अनाज के इस बड़े संकट को लेकर विभाग के तमाम उच्च अधिकारियों को जमीनी हकीकत से अवगत करा दिया गया है। संघ की तरफ से यह पुरजोर मांग रखी गई है कि सरकार सितंबर और अक्टूबर महीने के बकाया खाद्यान्न की आपूर्ति थोड़ा-थोड़ा करके ही सही, लेकिन निर्धारित मासिक कोटे के आधार पर तुरंत सुनिश्चित करे, ताकि कतार में खड़े कार्डधारियों को उनका हक मिल सके।
जिले में हर महीने होती है लगभग 68 हजार क्विंटल अनाज की खपत, 970 राशन दुकानें हैं संचालित
देवघर जिले के भीतर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से व्यापक स्तर पर खाद्यान्न का वितरण किया जाता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस पूरे जिले में कुल 970 जन वितरण प्रणाली की दुकानें सुचारू रूप से संचालित होती हैं। केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के तहत यहाँ केवल लाल कार्डधारियों के लिए ही लगभग 61 हजार 447 क्विंटल चावल की मासिक खपत होती है। इसके अलावा, राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रीन कार्ड योजना के अंतर्गत भी लगभग 6 हजार 409 क्विंटल अनाज का वितरण किया जाता है। इस प्रकार पूरे जिले में दोनों प्रमुख योजनाओं को मिलाकर हर महीने औसतन लगभग 67 हजार 856 क्विंटल यानी करीब 68 हजार क्विंटल खाद्यान्न की भारी आवश्यकता रहती है। ऐसे में, एसएफसी गोदाम से अचानक 22 हजार क्विंटल अनाज का गायब होना जिले की पूरी आपूर्ति व्यवस्था के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर गया है।
प्रशासनिक दावा— व्यवस्था को जल्द से जल्द पटरी पर लाने और स्थिति सामान्य करने के लिए किए जा रहे हैं प्रयास
इस पूरे गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी प्रीति लता किस्कू ने बताया कि गोदाम से अचानक खाद्यान्न गायब होने के कारण जन वितरण प्रणाली की व्यवस्था पर प्रतिकूल असर जरूर पड़ा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और जिला खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से इस असंतुलन को दूर करने तथा खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को जल्द से जल्द पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
गरीब लाभुकों का बड़ा सवाल— आखिर कब मिलेगा उन्हें उनके हिस्से का पूरा राशन और राहत?
दूसरी तरफ, पूरी तरह से सरकारी राशन और अनुदानित अनाज पर निर्भर रहने वाले गरीब और विपन्न परिवारों के सामने अपनी आजीविका और घरेलू जरूरतों को पूरा करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। राशन की दुकान तक पहुंचने के बाद भी कोटे का अनाज हाथ न लगने से कार्डधारियों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। जरूरतमंद लाभुकों का कहना है कि सरकार द्वारा मिलने वाला यह राशन उनके परिवार के भरण-पोषण का सबसे बड़ा और मुख्य सहारा है, और ऐसे समय पर राशन न मिलने से उनके समक्ष भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो रही है। फिलहाल, सरकारी गोदाम से अनाज के गायब होने का यह बहुचर्चित मामला जांच के कानूनी दायरे में आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसका सीधा और भारी खामियाजा उन आम परिवारों को भुगतना पड़ रहा है, जो हर महीने सिर्फ सरकारी राशन की उम्मीद लगाए बैठे रहते हैं।


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