गढ़वा (झारखंड): पड़ोसी राज्य बिहार में खेत के बीचों-बीच बने अजीबो-गरीब पुल को लेकर उपजे विवाद जैसी ही एक हैरान करने वाली तस्वीर अब झारखंड के गढ़वा जिले से सामने आई है।
जिले के रमकंडा प्रखंड अंतर्गत पतसर गांव में ‘प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना’ (PMGSY) के तहत लगभग 1.81 करोड़ रुपये की लागत से एक पुल का निर्माण कराया गया। किंतु विडंबना यह रही कि औपचारिक उद्घाटन से पूर्व ही पहली बारिश में इसके पहुंच पथ (Approach Road) का गार्डवाल पूरी तरह धराशायी हो गया। अब यह भारी-भरकम ढांचा ग्रामीणों के लिए सुविधा के बजाय गंभीर मुसीबत का कारण बन गया है।
🌾 धान की क्यारी में बना दिया 25 फीट ऊंचा पुल, पहली ही बारिश में धराशायी हुआ गार्डवाल
मामले की जमीनी हकीकत यह है कि रमकंडा प्रखंड के उदयपुर-चेटे मार्ग पर पतसर गांव के पास ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंताओं ने पहले तो धान की उपजाऊ क्यारी के बीचों-बीच करीब 25 फीट ऊंचा पुल खड़ा कर दिया।
तत्पश्चात पहुंच पथ को सहारा देने हेतु मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए गार्डवाल का निर्माण कराया गया। किंतु घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग के चलते मानसून की पहली सामान्य बारिश भी यह ढांचा सहन नहीं कर सका और गार्डवाल ताश के पत्तों की भांति ढह गया।
🚜 “कमीशनखोरी के लिए बनाया गया बेवजह का पुल, छोटी पुलिया से हल हो जाती समस्या”: आक्रोशित ग्रामीण
स्थानीय निवासियों ने निर्माण कार्य पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि गांव के किसी भी नागरिक ने यहां इतने विशालकाय पुल के निर्माण की कभी मांग नहीं की थी और न ही इसके लिए कोई प्रशासनिक आवेदन दिया गया था।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि आवश्यकता थी भी, तो एक छोटी पुलिया या छलका (Culvert) बनाने से आवागमन सुलभ हो जाता। इतने ऊंचे और ढलानदार पुल पर गाड़ियां और मवेशी चढ़ाना बेहद जोखिम भरा है। ग्रामीणों ने सीधा आरोप लगाया कि केवल सरकारी बजट खपाने और वित्तीय कमीशनखोरी के लिए इस निरर्थक परियोजना को अंजाम दिया गया है, जिससे जनता को कोई लाभ नहीं हो रहा है।
🏛️ सरपंच ने जताई आपत्ति, गढ़वा उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा बोले—”कार्यपालक अभियंता से मांगेंगे रिपोर्ट”
ग्राम पंचायत के सरपंच ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि पतसर गांव के इस स्थल पर इतने बड़े पुल की तनिक भी प्रासंगिकता नहीं थी। कमीशन का खेल खेलने वाले अधिकारियों व ठेकेदारों की पोल पहली ही बारिश में खुल गई है।
वहीं, इस गंभीर प्रशासनिक लापरवाही पर गढ़वा के उपायुक्त (DC) पशुपति नाथ मिश्रा ने बताया कि मीडिया माध्यमों से यह प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) से तत्काल वार्ता कर तकनीकी खामियों की समीक्षा करेंगे और ध्वस्त गार्डवाल की अविलंब मरम्मत व जवाबदेही तय करने हेतु आवश्यक कार्रवाई करेंगे।
⚠️ शुरुआत से ही ग्रामीणों ने किया था विरोध, तकनीकी अनदेखी से उजागर हुआ भ्रष्टाचार
उल्लेखनीय है कि इस पुल और गार्डवाल के निर्माण की शुरुआत से ही पतसर के ग्रामीण लगातार इसका विरोध करते आ रहे थे।
तकनीकी खामियों, ढलान की अत्यधिक ऊंचाई और निम्नस्तरीय निर्माण सामग्री को लेकर ग्रामीणों ने कई बार काम भी रुकवाया था। किंतु विभागीय अधिकारियों ने जनआक्रोश और शिकायतों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। अब पहली बारिश में गार्डवाल गिरते ही योजना में बरती गई घोर अनियमितताओं और शासकीय धन के दुरुपयोग की पोल सबके सामने आ गई है।
यह खबर आपको कैसी लगी?


झारखण्ड



























