जालंधर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज जालंधर के परागपुर स्थित विशाल रैली स्थल से पंजाब की जनता को संबोधित किया।
मंच पर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले महान सिख गुरुओं, संतों और वीरों की पावन धरती को शीश नवाकर नमन किया और अपने भाषण की शुरुआत की।
अमित शाह ने भावुक होते हुए कहा कि जालंधर आना उनके लिए सदैव गौरव की बात रहा है और पंजाब को नशे की विभीषिका से बाहर निकालने के संकल्प के साथ यहां आना उनके लिए परम सौभाग्य है। उन्होंने पंजाब के गौरवशाली इतिहास और सीमाओं की रक्षा में पंजाबियों के सर्वोच्च बलिदानों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पंजाब का मेहनतकश किसान पूरे देश का पेट भरने के लिए दिन-रात अन्न पैदा करता है और देश के अन्न भंडार को समृद्ध रखता है।
🚫 ’31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब होगा चिट्टामुक्त’: नशा कारोबार को लेकर AAP सरकार पर बोला तीखा हमला
नशा उन्मूलन और सीमा पार तस्करी पर कड़ा प्रहार:
बलिदानों की धरती पर नशे का साया: अमित शाह ने कहा कि आजादी से पहले और आजादी के बाद भी देश की संप्रभुता के लिए पंजाबियों ने सबसे आगे रहकर शहादत दी है, लेकिन आज राज्य नशे के संकट से जूझ रहा है।
सरकार पर लचर कार्रवाई का आरोप: रैली में उन्होंने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में ‘चिट्टे’ (सिंथेटिक ड्रग्स) के अवैध कारोबार को बेलगाम चलने दिया गया और तस्करों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
नशामुक्ति का ऐतिहासिक संकल्प: अमित शाह ने मंच से जनता से आह्वान करते हुए कहा, “आप भाजपा का समर्थन करिए, 31 दिसंबर 2029 से पहले हम पूरे पंजाब को चिट्टे के इस काले व्यापार से पूरी तरह मुक्त कर देंगे।” उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार नशा रोधी अभियानों के जरिए इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता से जुटी है।
सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रचार तंत्र पर सवाल:📢 विज्ञापनों पर ₹785 करोड़ खर्च करने का आरोप: ‘जनता से किए चुनावी वादों का हिसाब दे सरकार’
विज्ञापनों पर भारी खर्च: गृह मंत्री ने राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर प्रहार करते हुए दावा किया कि सरकार हर साल जनता की गाढ़ी कमाई के 785 करोड़ रुपये केवल अपने प्रचार-प्रसार और विज्ञापनों पर पानी की तरह बहा रही है।
पुराने वादों की याद दिलाई: उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले जनता से बड़े-बड़े लोकलुभावन वादे किए गए थे, लेकिन आज जमीन पर हालात पूरी तरह जुदा हैं और अब सरकार को एक-एक पैसे व वादे का हिसाब देना चाहिए।
मोगा रैली का संदर्भ: उल्लेखनीय है कि ₹785 करोड़ के भारी-भरकम विज्ञापन खर्च का यह आरोप अमित शाह ने इससे पहले मार्च 2026 में आयोजित मोगा की रैली में भी प्रमुखता से उठाया था।
युवाओं के भविष्य और स्वास्थ्य ढांचे पर सवालिया निशान:🏥 25 लाख नौकरियां और 16 मेडिकल कॉलेज कहां हैं? स्वास्थ्य और रोजगार के वादों पर घेरा
बेरोजगारी का मुद्दा: अमित शाह ने विधानसभा चुनावों के दौरान युवाओं को 25 लाख सरकारी व गैर-सरकारी नौकरियां देने के वादे का जिक्र करते हुए पूछा कि वे नौकरियां आखिर किसे मिलीं और इस वादे का क्या हुआ?
अस्पतालों की बदहाली: उन्होंने 16 हजार मोहल्ला क्लीनिकों के दावों को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि केवल छोटे-मोटे क्लीनिकों के रंग-रोगन से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार नहीं होता।
मेडिकल कॉलेजों का अधूरा सपना: राज्य के प्रत्येक प्रमुख जिले में विश्वस्तरीय 16 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने की जो भव्य घोषणा की गई थी, वह आज तक अधर में लटकी हुई है।
किसानों के हित, राजस्व घाटे और पीड़ितों के हक पर तथ्य:🚜 हरियाणा ने दी 26 फसलों पर MSP: खनन राजस्व और दंगा पीड़ितों के मुद्दे पर भी बोला हमला
घटती खनन आय: गृह मंत्री ने अवैध रेत खनन रोकने और सरकारी खजाने की आय कई गुना बढ़ाने के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के कार्यकाल में खनन से प्राप्त राजस्व बढ़ने के बजाय और नीचे चला गया।
एमएसपी का दोहरा रवैया: उन्होंने 26 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने के अधूरे चुनावी वादे पर कहा कि पंजाब में किसानों को केवल छला गया, जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में भाजपा सरकार ने किसानों की फसलों पर प्रभावी MSP देकर राहत प्रदान की।
दंगा पीड़ितों की अनदेखी: अंत में अमित शाह ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों को आर्थिक व सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने के मुद्दे पर भी मान सरकार को घेरा और कहा कि दशकों से न्याय की आस लगाए बैठे पीड़ितों से किए गए वादे भी हवा-हवाई साबित हुए हैं।
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