नवाब भोपाल के अहमदाबाद पैलेस से लगी हुई राहत मंजिल इमारत में रहते थे, जो असल में नवाबी परिवार का गेस्ट हाउस हुआ करता था. इस इमारत को विशेष रूप से बापू के लिए खादी से सजाया गया था. इतिहासकार आलोक गुप्ता बताते हैं कि बापू यहाँ 8 से 10 सितंबर 1929 तक रहे थे, और यहाँ हुई प्रार्थना सभा में कस्तूरबा गांधी (बा) और मीरा बेन ने भी हिस्सा लिया था. नवाब शाहजहां बेगम द्वारा बनवाए गए समर रेस्ट हाउस यानी बेनजीर मैदान में 10 सितंबर 1929 को बापू की एक विशाल और ऐतिहासिक जनसभा हुई थी. आज भी इतिहासकार इस मैदान को बापू के स्मारक के रूप में विकसित करने की लगातार मांग कर रहे हैं. इतिहासकार आलोक गुप्ता बताते हैं कि भोपाल नवाब हमीदुल्ला खां की पूरी कोशिश थी कि बापू की भोपाल यात्रा से जुड़ी हर बात, यानी प्लेटफॉर्म से लेकर उनके डिपार्चर के समय तक, सब कुछ गुप्त रखा जाए. अपनी तीन दिन की यात्रा के बाद 10 सितंबर को जब बापू लौट रहे थे, तो स्टेशन के रास्ते में गुजराती मोढ समाज ने उनका भव्य सम्मान किया और हरिजन फंड के लिए 501 रुपए की बड़ी धनराशि भेंट की. इसके बाद 1933 में भी जब बापू अपनी हरिजन यात्रा पर निकले थे, तब ट्रेन से गुजरते हुए वे कुछ देर के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन पर रुके थे, जहाँ प्रभात फेरी के बाद लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी और एक छोटी सी बच्ची ने अपनी अंगूठी बापू को दान करने की कोशिश की थी.🚂 गुपचुप रखी गई थी बापू की यात्रा, स्टेशन पर गुजराती समाज ने किया था सम्मानित और जुटाई थी राशि
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नवाब भोपाल के अहमदाबाद पैलेस से लगी हुई राहत मंजिल इमारत में रहते थे, जो असल में नवाबी परिवार का गेस्ट हाउस हुआ करता था. इस इमारत को विशेष रूप से बापू के लिए खादी से सजाया गया था. इतिहासकार आलोक गुप्ता बताते हैं कि बापू यहाँ 8 से 10 सितंबर 1929 तक रहे थे, और यहाँ हुई प्रार्थना सभा में कस्तूरबा गांधी (बा) और मीरा बेन ने भी हिस्सा लिया था. नवाब शाहजहां बेगम द्वारा बनवाए गए समर रेस्ट हाउस यानी बेनजीर मैदान में 10 सितंबर 1929 को बापू की एक विशाल और ऐतिहासिक जनसभा हुई थी. आज भी इतिहासकार इस मैदान को बापू के स्मारक के रूप में विकसित करने की लगातार मांग कर रहे हैं.
🚂 गुपचुप रखी गई थी बापू की यात्रा, स्टेशन पर गुजराती समाज ने किया था सम्मानित और जुटाई थी राशि
इतिहासकार आलोक गुप्ता बताते हैं कि भोपाल नवाब हमीदुल्ला खां की पूरी कोशिश थी कि बापू की भोपाल यात्रा से जुड़ी हर बात, यानी प्लेटफॉर्म से लेकर उनके डिपार्चर के समय तक, सब कुछ गुप्त रखा जाए. अपनी तीन दिन की यात्रा के बाद 10 सितंबर को जब बापू लौट रहे थे, तो स्टेशन के रास्ते में गुजराती मोढ समाज ने उनका भव्य सम्मान किया और हरिजन फंड के लिए 501 रुपए की बड़ी धनराशि भेंट की. इसके बाद 1933 में भी जब बापू अपनी हरिजन यात्रा पर निकले थे, तब ट्रेन से गुजरते हुए वे कुछ देर के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन पर रुके थे, जहाँ प्रभात फेरी के बाद लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी और एक छोटी सी बच्ची ने अपनी अंगूठी बापू को दान करने की कोशिश की थी.


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