भोपाल: नाना पाटेकर जब स्टेज पर आए थे, तो खचाखच भरा रवीन्द्र भवन का हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा था. नाना पाटेकर की शानदार फिल्म ‘प्रहार’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका था, और मध्य प्रदेश वह पहला राज्य था, जहां इस फिल्म को मिलने वाली सफलता के बाद उन्हें सम्मानित किया जा रहा था. वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के संस्कृति सलाहकार और उस समय मध्य प्रदेश फिल्म विकास निगम के महाप्रबंधक रहे श्रीराम तिवारी करीब तीस बरस पहले के उस स्वर्णिम दौर में लौटते हुए नाना पाटेकर से जुड़े प्रोजेक्ट्स और कई अनसुनी यादों को साझा करते हैं.
🤝 पुरस्कार में मिले 31 हजार रुपए श्रमिक संगठनों को किए भेंट, 1991 के उस दौर को किया याद
श्रीराम तिवारी बताते हैं कि उस समय सुंदरलाल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और नाना पाटेकर को शासन की ओर से सम्मानस्वरूप 31 हजार रुपए की राशि प्रदान की गई थी, लेकिन उन्होंने वह राशि तुरंत आदिवासियों के हित में काम कर रहे श्रमिक संगठनों को भेंट कर दी थी. करीब पैंतीस साल पहले मध्य प्रदेश के साथ नाना का यह गहरा जुड़ाव हुआ था. श्रीराम तिवारी 1991 के उस दौर को याद करते हुए कहते हैं कि नाना पाटेकर का अंदाज बेहद बेबाक, बेखौफ और दो टूक बात कहने वाला रहा है. फिल्म विकास निगम भले ही 1995 के आसपास बंद हो गया, लेकिन नाना के साथ उनका मेल-मु मुलाकातों का सिलसिला हमेशा बरकरार रहा.
🌊 विक्रमोत्सव के दौरान ‘महादेव की नदी कथा’ में सूत्रधार बनने वाले थे नाना, श्रीराम तिवारी ने जताई गहरी क्षति
संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने बताया कि इतने लंबे अंतराल के बाद बीते वर्ष उनकी टीम ने एक बार फिर नाना पाटेकर से संपर्क किया था. हमारी तैयारी विक्रमोत्सव और गंगा दशहरे पर ‘महादेव की नदी कथा’ करने की थी, जिसमें यह तय हुआ था कि नाना इस कथा में सूत्रधार की भूमिका निभाएंगे और विभिन्न पात्रों का परिचय कराएंगे, हालांकि बजट ओवर होने के कारण यह प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका. श्रीराम तिवारी भावुक होते हुए कहते हैं कि अंदाजा नहीं था कि इस तरह का जुड़ाव अधूरा रह जाएगा, आज ऐसा महसूस होता है जैसे भारत के सांस्कृतिक खजाने से कोई बेहद मूल्यवान और अनमोल चीज हमेशा के लिए चली गई हो.
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