बुरहानपुर: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में मुस्लिम तेली समाज के युवाओं और वरिष्ठ जनों द्वारा एक बेहद सराहनीय और प्रेरणादायक पहल की शुरुआत की गई है। समाज ने पहली बार 21 जोड़ों के भव्य सामूहिक निकाह सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस अनूठे आयोजन में शादियों में होने वाली बेहिसाब फिजूलखर्ची, दहेज के लेन-देन, बैंड-बाजे और प्री-वेडिंग शूट जैसी चीजों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का सख्त फैसला लिया गया है, ताकि गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों को अनावश्यक आर्थिक दबाव से मुक्ति मिल सके।
महज 21 हजार रुपये के पंजीयन शुल्क में मिलेंगे गृहस्थी के बड़े तोहफे
इस सामूहिक निकाह की सबसे बड़ी खूबी यह है कि कमेटी की ओर से दूल्हा-दुल्हन के परिजनों से केवल 21 हजार रुपये का मामूली पंजीयन शुल्क लिया जाएगा। इसके बदले नवदंपती को उपहार स्वरूप फ्रिज, कूलर, वॉशिंग मशीन, पेटी पलंग, अलमारी और बर्तन सेट समेत गृहस्थी का संपूर्ण सामान भेंट किया जाएगा। इस योजना के जरिए न सिर्फ महंगे और खर्चीले विवाहों से राहत मिलेगी, बल्कि कई जरूरतमंद परिवारों का अपने बच्चों की शादी कराने का सपना आसानी से पूरा हो सकेगा।
विभिन्न राज्यों और शहरों से जोड़े करा रहे हैं पंजीयन
आगामी 22 नवंबर को इस भव्य इज्तेमाई शादी (सामुूहिक विवाह सम्मेलन) का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के इंदौर, खंडवा, बुरहानपुर के अलावा पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के जलगांव, अकोला और पाचौरा जैसे विभिन्न क्षेत्रों के जोड़ों ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना शुरू कर दिया है। फिलहाल 15 जोड़ों ने अपनी स्वेच्छा से पंजीयन करवा लिया है, जबकि समिति का लक्ष्य कुल 21 जोड़ों के निकाह संपन्न कराने का है, जिसे आने वाले एक महीने के भीतर पूरा करने की योजना है।
शादी के भारी कर्ज और आर्थिक बोझ से मिलेगी बड़ी राहत
आज के दौर में शादियों पर होने वाले बेलगाम खर्च ने आम और गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है। मुस्लिम तेली समाज द्वारा उठाया गया यह कदम समाज के गरीब व मध्यमवर्गीय तबके को भारी-भरकम कर्ज और आर्थिक संकट से बचाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इसके माध्यम से समाज में आपसी भाईचारे, एकता और सामूहिकता की भावना को भी मजबूती प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है।
दिखावे और शान-शौकत को छोड़कर सादगी को दी जा रही प्राथमिकता
समाज के सक्रिय सदस्य रियाज फारुक खोकर ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में शादियों में प्रदर्शन और दिखावे की संस्कृति ने लोगों को कर्ज के दलदल में धकेल दिया है। इसी सोच को बदलने के लिए समाज ने प्रतिष्ठा और दिखावे के बजाय सादगी, आपसी सहयोग और मानवता को प्राथमिकता देने की नींव रखी है। नाममात्र शुल्क लेकर समाज के सक्षम लोगों के सहयोग से जोड़ों को गृहस्थी का जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि हर परिवार बिना किसी तनाव के इस नेक काम का हिस्सा बन सके।
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