बिलासपुर (छत्तीसगढ़): शहर के सरकंडा स्थित नलिनी प्रभा देव प्रसाद राय (एनडीआर) कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में महिला कर्मचारियों के कार्यस्थल पर मानसिक, शारीरिक एवं लैंगिक उत्पीड़न का अत्यंत गंभीर प्रकरण प्रकाश में आया है।
महिला जागृति सहायता समूह द्वारा 10 अगस्त को प्रस्तुत औपचारिक शिकायत का त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास विभाग) ने महाविद्यालय प्रबंधन, प्राचार्य तथा आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को ‘पोश एक्ट 2013’ के प्रावधानों के अंतर्गत पारदर्शी जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बिलासपुर कलेक्टर ने भी स्वतंत्र जांच समिति गठित कर तत्काल रिपोर्ट तलब की है।
⚠️ संस्था सचिव डीके राय पर संगीन आरोप: अभद्र व्यवहार, जातिसूचक टिप्पणियां और आपत्तिजनक स्पर्श
शिकायत पत्र में दर्ज प्रमुख आरोप:
अभद्रता एवं अपमान: शिकायत पत्र के अनुसार, महाविद्यालय के संस्था सचिव डीके राय पर महिला प्राध्यापिकाओं व शिक्षिकाओं के साथ नियमित रूप से गाली-गलौज, दुर्व्यवहार और जातिगत अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप है।
निजी जीवन पर टीका-टिप्पणी: आरोपी सचिव द्वारा महिला कर्मचारियों के व्यक्तिगत जीवन को लेकर सार्वजनिक रूप से अशोभनीय बातें कही जाती थीं और सहकर्मियों के समक्ष उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
शारीरिक उत्पीड़न व धमकियां: महिला कर्मियों को अनुचित व आपत्तिजनक ढंग से स्पर्श करने, बिना औपचारिक नियुक्ति व नियमित वेतन के कई महीनों तक काम कराकर मनमाने ढंग से सेवामुक्त करने तथा शासकीय अवकाश के दिनों में जबरन बुलाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत न करने का दबाव: उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज उठाने पर पीड़िता महिलाओं को पद से हटाने और कानूनी प्रक्रिया में न जाने की निरंतर धमकियां दी जाती रही हैं।
आरोपी का पूर्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक पहल:⚖️ पूर्व में भी दर्ज हो चुकी हैं शिकायतें: कोर्ट में विचाराधीन हैं कई मामले
लगातार शिकायतें: जानकारी के अनुसार, आरोपी सचिव के विरुद्ध पूर्व में भी प्रताड़ना और अनियमितताओं की शिकायतें सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष दर्ज कराई जा चुकी हैं, जिनमें से कुछ प्रकरण वर्तमान में अदालत में विचाराधीन हैं।
गोपनीयता और सुरक्षा: जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा जारी आदेश की प्रतिलिपि बिलासपुर कलेक्टर को भी सूचनार्थ भेजी गई है, ताकि शिकायतकर्ता महिलाओं की पहचान पूर्णतः गोपनीय रहे और वे बिना किसी भय के अपने बयान दर्ज करा सकें।
कलेक्टर का कड़ा रुख: कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया है कि कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार:🛡️ पोश एक्ट 2013 और कानून का सुरक्षा चक्र: संस्थानों के लिए क्या हैं कानूनी बाध्यताएं
अनिवार्य आंतरिक समिति (ICC): कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के अंतर्गत 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक शासकीय व अशासकीय संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है।
पहचान की पूर्ण गोपनीयता: अधिनियम की धारा 16 व 17 के तहत पीड़िता अथवा शिकायतकर्ता की पहचान उजागर करना कानूनन दंडनीय अपराध है।
प्रतिशोध पर रोक: जांच प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करना, स्थानांतरण करना अथवा सेवा समाप्ति का भय दिखाना सीधे तौर पर विधिक प्रावधानों का उल्लंघन माना जाता है।
जांच प्रक्रिया और विधिक संरक्षण:🔒 गवाहों को धमकाने पर निलंबन का प्रावधान: प्रशासन के पास सुरक्षित हैं कड़े अधिकार
प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की रोकथाम: संस्था के शीर्ष पद पर आसीन अधिकारियों के विरुद्ध जांच में गवाहों और पीड़ितों को प्रभावित करने की प्रबल आशंका रहती है, जिसके लिए कानून में विशेष सुरक्षा तंत्र का प्रावधान है।
कार्यस्थल से पृथक्करण: यदि आरोपी जांच को प्रभावित करने या गवाहों को डराने का प्रयास करता है, तो प्रशासन व जांच समिति के पास आरोपी को जांच चलने तक पद से निलंबित करने अथवा परिसर में प्रवेश से रोकने के पूर्ण वैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं।
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