महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की चिमूर तहसील के जांभुलघाट स्थित सरकारी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक आवासीय आश्रमशाला एक बड़े विवाद के घेरे में आ गई है। यहाँ आरोप है कि शनिवार को लगभग 80 विद्यार्थियों के सिर के आधे बाल ही ट्रिमर से काटकर उन्हें वैसे ही छोड़ दिया गया। आधे मुंडे सिर वाले इन छात्रों की तस्वीरें जब सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से सामने आईं, तो प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। इसके बाद आनन-फानन में रात के समय ही बच्चों के बाल दोबारा काटे गए, जिससे स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
✂️ डैंड्रफ और खुजली की समस्या का हवाला: ट्रिमर की चार्जिंग खत्म होने के कारण बीच में ही रोकी गई थी कटिंग
इस रेजिडेंशियल स्कूल में पहली से 11वीं कक्षा तक करीब 572 विद्यार्थी रहकर पढ़ाई करते हैं। स्कूल प्रबंधन और अधीक्षक प्रशांत मेश्राम का कहना है कि बच्चों के सिर में डैंड्रफ (रूसी) और खुजली की समस्या को दूर करने के लिए बाल काटने का निर्णय लिया गया था। शनिवार दोपहर करीब 3 बजे कटिंग का काम शुरू हुआ, लेकिन इसी दौरान ट्रिमर की बैटरी डिस्चार्ज हो जाने के कारण काम अधूरा छोड़ दिया गया। अधीक्षक का दावा है कि बच्चों को इधर-उधर जाने से रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा था, लेकिन आधे कटे बालों की तस्वीरें वायरल होने के बाद रात करीब 11 बजे से सुबह 4 बजे तक दोबारा कटिंग करनी पड़ी।
🔍 पहले भी आ चुका है बासी भोजन का मामला: अभिभावकों ने की उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
इस घटना ने आश्रमशाला की आंतरिक व्यवस्था और बच्चों की देखभाल पर गहरी चिंता पैदा कर दी है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि सोते हुए या रात के वक्त बच्चों के बाल काटना मानसिक प्रताड़ना जैसा है। खास बात यह है कि इससे पहले भी इसी आश्रमशाला में छात्रों को बासी भोजन परोसे जाने और उनकी तबीयत बिगड़ने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब अभिभावकों ने आदिवासी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए।
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