दुर्गा पूजा को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और अनुशासनबद्ध तरीके से संपन्न कराने के लिए धनबाद जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में पूजा पंडालों की सुरक्षा, यातायात, बिजली, स्वास्थ्य और विसर्जन व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जनसुरक्षा और सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। हर पूजा समिति को नियमों का पालन करने को लेकर अंडरटेकिंग देनी होगी और अग्निशमन, भवन व विद्युत विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य होगा।
🚫 सुरक्षा और अनुशासन पर विशेष जोर: डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध और सीसीटीवी से निगरानी
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए पंडालों में महिला व पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतार, पर्याप्त बैरिकेडिंग और प्रवेश-निकास की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, पूजा के दौरान डीजे के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है और विसर्जन जुलूस व पंडालों में केवल निर्धारित ध्वनि सीमा के भीतर ही लाउडस्पीकर बजाए जा सकेंगे। असामाजिक तत्वों और अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा कसने के लिए साइबर मॉनिटरिंग सेल को सक्रिय कर दिया गया है तथा हर प्रमुख पंडाल में इंटरनेट से जुड़े सीसीटीवी कैमरे लगाने को कहा गया है।
🏆 प्रोत्साहन और स्वास्थ्य सुविधाएं: सर्वश्रेष्ठ समितियों को पुरस्कार और अस्पताल अलर्ट पर
उत्कृष्ट कार्य करने वाली पूजा समितियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशासन द्वारा प्रथम पुरस्कार 51 हजार, द्वितीय 41 हजार, तृतीय 31 हजार और चौथे से दसवें स्थान तक के लिए 11-11 हजार रुपये के नकद पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके साथ ही, जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहने, विसर्जन घाटों पर गोताखोर व बैरिकेडिंग की व्यवस्था करने तथा खाद्य सुरक्षा टीम को पंडालों के आसपास खान-पान की गुणवत्ता जांचने के निर्देश दिए गए हैं।
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