झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC-CGL) परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में आरोपी राहुल कुमार की संदिग्ध भूमिका ने परीक्षा की गोपनीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीआईडी की जांच में यह बात सामने आई है कि राहुल खुद इस परीक्षा का एक अभ्यर्थी था, इसके बावजूद वह उस एजेंसी से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था जिसे प्रश्नपत्रों की छपाई और अन्य गोपनीय कार्य सौंपे गए थे।
📱 मानेसर प्रिंटिंग यूनिट से कनेक्शन और वॉट्स्ऐप पर सवालों का आदान-प्रदान
सीआईडी के अनुसार, राहुल ‘ICN India Pvt. Ltd.’ से जुड़ा था, जिसे JSSC-CGL परीक्षा के प्रश्नपत्रों और ओएमआर शीट की प्रिंटिंग का जिम्मा मिला था। परीक्षा का अभ्यर्थी होने के बावजूद राहुल मानेसर स्थित प्रिंटिंग फैसिलिटी में मौजूद था और गोपनीय प्रश्नपत्रों तक उसकी सीधी पहुंच थी। जांच में मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और वॉट्स्ऐप चैट से यह संकेत मिले हैं कि परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर सामग्री का आदान-प्रदान किया गया था। अभियोजन पक्ष का कहना है कि राहुल की भूमिका महज एक परीक्षार्थी तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह लीक नेटवर्क की एक अहम कड़ी था।
⚖️ अतिरिक्त सबूतों के आधार पर कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
दूसरी ओर, आरोपी राहुल के वकीलों का दावा था कि उसके पास से मिले चैट सामान्य पढ़ाई से जुड़े थे और उसके खिलाफ किसी आर्थिक लाभ का ठोस प्रमाण नहीं है। हालांकि, सीआईडी द्वारा पेश किए गए सीडीआर, लोकेशन डेटा और अन्य आरोपियों (सोमांश प्रकाश, मिथिलेश सिंह आदि) के साथ कनेक्शन को देखते हुए अदालत ने उसकी दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया राहुल की भूमिका को सामान्य अभ्यर्थी के रूप में नहीं देखा जा सकता, जिसके चलते 5 अक्टूबर 2026 को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
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